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एक मरीज़ की मौत के बाद इबोला पर क़ाबू पाने के प्रयास तेज़

पिछले एक साल में इबोला के 2,600 मामलों की पुष्टि हो चुकी है.
UNICEF/Tremeau
पिछले एक साल में इबोला के 2,600 मामलों की पुष्टि हो चुकी है.

एक मरीज़ की मौत के बाद इबोला पर क़ाबू पाने के प्रयास तेज़

स्वास्थ्य

काँगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में मंगलवार को गोमा शहर में इबोला संक्रमण का एक नया मामला सामने आया और पीड़ित मरीज़ की मौत हो गई है. 10 लाख से ज़्यादा की आबादी वाले गोमा शहर में इबोला का यह दूसरा मामला था जिससे घनी आबादी वाले इलाक़ों में बीमारी फैलने का जोखिम बना हुआ है. संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने इबोला संक्रमण को सीमित दायरे में रखने और उससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मज़बूत वैश्विक प्रयासों और निवेश की आवश्यकता को ज़रूरी बताया है.

गोमा शहर एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है और पड़ोसी देश रवांडा की सीमा से लगा है. इबोला वायरस को न फैलने देने के लिए शहर में प्रवेश करने और बाहर जाने वाले रास्तों की निगरानी की जा रही है.

अभी इस बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है कि क्या गोमा में इबोला का दूसरा केस पहले मामले से जुड़ा हो सकता है.

ठीक एक साल पहले एक अगस्त 2018 को कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य ने उत्तर कीवु प्रांत में इबोला वायरस के नए सिरे से फैलने की घोषणा की थी.

दो सप्ताह पहले ही इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति क़रार दिया गया था.

इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस, मानवीय मामलों और आपात राहत के लिए अवर महासचिव मार्क लोकॉक, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के कार्यकारी निदेशक डेविड बीज़ली ने संयुक्त रूप से एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने इबोला से निपटने के लिए समन्वित प्रयासों और ज़्यादा निवेश की ज़रूरत को रेखांकित किया है.

पिछले एक साल में इबोला के दो हज़ार 600 मामलों की पुष्टि हो चुकी है जिनमें एक हज़ार 800 से ज़्यादा लोगों की मौतें इतुरी और उत्तर किवु प्रांत में हुई हैं. 770 लोगों को बचाने में सफलता मिली है. हर तीन में से एक मरीज़ बच्चा है.

इबोला के इलाज के लिए इतुरी प्रांत के कोमान्डा में बनाई गई एक यूनिट.
WHO/Lindsay Mackenzie
इबोला के इलाज के लिए इतुरी प्रांत के कोमान्डा में बनाई गई एक यूनिट.

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य की सरकार के नेतृत्व में अब तक यूएन एजेंसियों और स्थानीय समुदाय के सहयोग से ये क़दम उठाए गए हैं:

  • एक लाख 70 हज़ार लोगों को टीके लगाए गए हैं
  • 7 करोड़ 70 लाख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की एहतियात के तौर पर जांच
  • 20 हज़ार लोगों से रोज़ संपर्क ताकि वे बीमार न पड़ें
  • हर सप्ताह 8 लैबों में तीन हज़ार से ज़्यादा नमूनों का परीक्षण
  • हाथ धोने के लिए 10 हज़ार से ज़्यादा जगहों पर इंतज़ाम
  • 25 हज़ार से ज़्यादा स्कूली बच्चों को प्रतिदिन भोजन का वितरण
  • 4 लाख से ज़्यादा मरीज़ों और अन्य लोगों को भोजन सामग्री के लिए सहायता

साझा वक्तव्य में कहा गया है, “इबोला वायरस मां से बच्चे, पति से पत्नी, मरीज़ से देखभाल करने वालों, मृत व्यक्ति से शोकाकुल परिजनों तक फैलता है. इस बीमारी से आम जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है – स्थानीय व्यवसाय प्रभावित होते हैं, बच्चों का स्कूल जाना रुक जाता है, और ज़रूरी और रोज़मर्रा की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं.”

यूएन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला पर क़ाबू पाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों की सराहना की है.

हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि निरंतर और व्यापक प्रयासों के बावजूद बीमारी अब भी फैल रही है – और इसका हिंसा और संघर्ष से ग्रस्त इलाक़ों में फैलना स्थिति को और जटिल बना रहा है.

हाल के महीनों में स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य केंद्रों पर हथियारबंद गुटों ने हमले किए हैं और हिंसा के कारण लोग भी विस्थापन का शिकार हुए हैं.

हिंसा की वजह से स्थानीय समुदायों तक राहत पहुंचाने के काम में बाधाएं भी पेश आ रही हैं.

साझा बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इबोला पर क़ाबू पाने के प्रयासों में और ज़्यादा मदद की अपील की गई है.