हेपेटाइटिस के उन्मूलन के लिए निवेश बढ़ाने की पुकार

27 जुलाई 2019

रविवार, 28 जुलाई, को विश्व हेपेटाइटिस दिवस है. इस अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सभी देशों से हेपेटाइटिस के उन्मूलन के लिए साहसिक राजनीतिक नेतृत्व का  प्रदर्शन करने और बीमारी के परीक्षण और इलाज को आसान बनाने के लिए ज़रूरी निवेश करने का अनुरोध किया है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की रणनीति पर अमल के ज़रिए 2030 तक 45 लाख मौतों को रोका जा सकता है.

हेपेटाइटिस वायरस संक्रमण पांच प्रकार के होते हैं – ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘डी’ और ‘ई’. 95 फ़ीसदी से ज़्यादा मौतों के लिए लंबे समय तक रहने वाले हेपेटाइटिस ‘बी’ और ‘सी’ संक्रमण ज़िम्मेदार हैं जबकि ‘ए’ और ‘ई’ से ज़िंदगी को आमतौर पर ख़तरा नहीं होता. हेपेटाइटिस ‘डी’ एक ऐसा संक्रमण है जो कई बार हेपेटाइटिस ‘ई’ से पीड़ित लोगों को हो जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक नई रिपोर्ट शुक्रवार को ‘लान्सेट ग्लोबल हेल्थ’ में प्रकाशित हुई है. रिपोर्ट दर्शाती है कि निम्न- और मध्य-आय वाले 67 देशों हेपेटाइटिस के उन्मूलन के लिए हर साल 6 अरब डॉलर का निवेश करन से वर्ष 2030 तक 45 लाख मौतों को रोका जा सकता है. इस निवेश को लंबे समय तक जारी रखने से 2 करोड़ 60 लाख ज़िंदगियों को बचाया जा सकता है.

67 देशों में वायरल हेपेटाइटिस सार्वजनिक स्वास्थ्य पर मंडराता एक ऐसा ख़तरा है जिसके 2030 तक उन्मूलन के लिए 58 अरब डॉलर से ज़्यादा की धनराशि की आवश्यकता है. इन प्रयासों के ज़रिए हेपेटाइटिस के नए संक्रमणों के मामलों में 90 फ़ीसदी और मौतों में 65 फ़ीसदी की कमी लाने का प्रयास किया जाएगा.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक डॉ टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने बताया कि, “आज हेपेटाइटिस से पीड़ित 80 फ़ीसदी से ज़्यादा लोगों को बीमारी की रोकथाम, उसके परीक्षण या इलाज की सेवाएं मुहैया नहीं हैं.”

“विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर हम साहसिक राजनैतिक नेतृत्व और निवेशों की अपील कर रहे हैं. हम सभी देशों से अपील करते हैं कि हेपेटाइटिस के लिए लाभकारी पैकेज के तौर पर एकीकृत सेवाओं की व्यवस्था की जाए जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में उनकी यात्रा का हिस्सा होंगी.”

हेपेटाइटिस वायरस संक्रमण पांच प्रकार के होते हैं – ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘डी’ और ‘ई’.
UNICEF/UNI28505/Adam Dean
हेपेटाइटिस वायरस संक्रमण पांच प्रकार के होते हैं – ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘डी’ और ‘ई’.

निदान के लिए ज़रूरी परीक्षणों और हेपेटाइटिस ‘बी’ और ‘सी’ के इलाज के लिए दवाइयों में निवेश के ज़रिए सभी देश मरीजों की जान बचा सकते हैं और सिरोसिस और लीवर कैंसर जैसी बीमारियों के लंबे इलाज में होने वाले ख़र्च में कमी ला सकती हैं. हेपेटाइटिस का सही इलाज न होने पर ये गंभीर बीमारियां होने की आशंका रहती है.

स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कुछ देश इस दिशा में ज़रूरी कार्रवाई कर रहे हैं. उदाहरण के तौर पर, भारत सरकार ने हेपेटाइटिस ‘बी’ और ‘सी’ के मुफ़्त परीक्षण और इलाज की घोषणा की है जो सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के तहत उसके प्रयासों का अंग है. इसके अलावा ज़रूरी दवाइयों की क़ीमतों में कमी लाई गई है.

भारत में हेपेटाइटिस ‘सी’ के इलाज का ख़र्च प्रति वर्ष 40 डॉलर से भी कम है और हेपेटाइटिस ‘बी’ के इलाज में 30 डॉलर से भी कम का ख़र्च आता है. पाकिस्तान सरकार भी हेपेटाइटिस के इलाज में कम क़ीमतों में इलाज सुनिश्चित करने के प्रयासों में जुटी है. इससे दोनों देशों में तीन सालों के भीतर स्वास्थ्य ख़र्चों में कमी लाई जा सकती है. 

पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जहां हर साल हेपेटाइटिस ‘सी’ वायरस से संक्रमण की दर सबसे ज़्यादा है और जिस पर क़ाबू पाने के लिए इंजेक्शन लगाने का अभियान शुरू किया जा रहा है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की वैश्विक हेपेटाइटिस रणनीति में 2016 और 2030 के बीच हेपेटाइटिस के संक्रमणों में 90 फ़ीसदी और मौतों में 65 फ़ीसदी की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है.

यूएन एजेंसी को सदस्य देशों से वैश्विक रणनीति को अपनाए जाने पर समर्थन मिला है और अब तक 194 में से 124 देश उसी पर आधारित योजनाएं तैयार कर रहे हैं. लेकिन उनमें से 40 फ़ीसदी देशों में उन्मूलन प्रयासों के लिए ज़रूरी बजट सुनिश्चित किया जाना अब भी एक चुनौती बना हुआ है.

 

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