युवा तलाश करेंगे जलवायु संकट का समाधान

22 जुलाई 2019

क्या युवा कंप्यूटर प्रोग्रामर कोडिंग के माध्यम से जलवायु संकट का समाधान ढूंढ सकते हैं? संयुक्त राष्ट्र में युवा मामलों की विशेष दूत जयाथमा विक्रमानायके ने हाल ही में एक नई प्रतियोगिता “रीबूट द अर्थ” की शुरुआत की है जिसकी मदद से संयुक्त राष्ट्र, शिक्षा जगत, नागरिक समाज और युवाओं के बीच पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देते हुए जलवायु आपात स्थिति का समाधान ढूंढने का प्रयास किया जाएगा.  

युवा मामलों की विशेष दूत जयाथमा विक्रमानायके के कार्यालय के अनुसार यह प्रतियोगिता एक ‘ग्लोबल हैकॉथॉन’ है जहां कंप्यूटर प्रोग्रामर, वैज्ञानिक और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ कोडिंग के ज़रिए  जलवायु संकटों से संबंधित स्थानीय समस्याओं के हल तलाश करने की कोशिश करेंगे.

हर देश, इलाक़े और समुदाय की ज़रूरतों पर आधारित एक सॉफ़्टवेयर तैयार किया जाएगा या फिर वहां पहले से चले आ रहे कार्यक्रमों को बेहतर बनाने का प्रयास होगा.

यह हैकाथॉन यूनाइटेड नेशंस टैक्नोलॉजी इनोवेशन लैब्स की मलेशिया, फ़िनलैंड, भारत, मिस्र और जर्मनी में स्थित प्रयोगशालाओं में अगस्त में होगा.

चुनौतियों की एक श्रृंखला के तहत हर देश से एक टीम चुनी जाएगी और फिर उस टीम के पास न्यूयॉर्क में ‘रीबूट द अर्थ’ पुरस्कार समारोह में हिस्सा लेने का अवसर होगा.

यह समारोह इस वर्ष 21 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर वार्ता के दौरान होगा.

हर देश से जीतने वाली टीम को अवसर मिलेगा कि वह अपने समाधान जनवरी 2020 में स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में होने वाली बैठक में प्रदर्शित कर सके.

साथ ही प्रतियोगिता में मुख्य विजेता टीम के सॉफ़्टवेयर के प्रस्ताव को यूएन टैक्नोलॉजी इनोवेशन लैब में विकिसित किया जाएगा.

इस प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने से संबंधित ज़्यादा जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की युवा मामलों की विशेष दूत जयाथमा विक्रमानायके ने यूएन समाचार के साथ बातचीत में बताया कि वैश्विक जलवायु चुनौतियों से निपटने में युवाओं की मुख्य भूमिका है – युवा ही बदलाव और नवप्रवर्तन (इनोवेशन) के वाहक हैं.

“वैश्विक जलवायु आंदोलन का नेतृत्व युवा कर रहे हैं और जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाने में संयुक्त राष्ट्र युवाओं का समर्थन करता है.”

यूथ 2030’ रणनीति की शुरुआत से ही संयुक्त राष्ट्र वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई का दायरा बढ़ा रहा है ताकि युवाओं की ज़रूरतों को पूरा करने, उनके अधिकारों को मान्यता दिलाने और बदलाव लाने में उनकी भूमिका को संवारा जा सके.

युवा मामलों की विशेष दूत के अनुसार, ‘रीबूट द अर्थ’ के ज़रिए युवाओं के लिए एक मंच तैयार करने का प्रयास हो रहा है ताकि वे अपने अभिनव विचारों और समाधानों को संयुक्त राष्ट्र के साथ साझा कर सकें, और वैश्विक स्तर पर जलवायु संकट के विरुद्ध लड़ाई में बराबर के हिस्सेदार बन सकें.

“रीबूट द अर्थ युवाओं के पास अपनी क्षमताओं और विचारों को प्रदर्शित करने का एक अवसर है और संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर वार्ता में पहचान पाने का भी.”

“इस साल हैकाथॉन के विजेताओं को हम क्लाइमेट रीबूट ट्रुप्स कह रहे हैं. उन्हें दीर्घकालीन परियोजनाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करना होगा और ऐसे समाधानों को बढ़ावा देना होगा जिनसे समुदायों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जाए.”

 

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