कॉक्सेस बाज़ार में घातक होते मॉनसून से निपटने की मुस्तैदी

12 जुलाई 2019

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने कहा है कि बांग्लादेश में चार जुलाई से लगातार हो रही बारिश की वजह से कॉक्सेस बाज़ार का शरणार्थी शिविर बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे भारी ढाँचागत नुक़सान होने के साथ-साथ अनेक लोग हताहत भी हुए हैं. बहुत नाज़ुक हालात का सामना कर रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है जो शिविरों में ही नई ज़मीन पर बनाए गए हैं.

जिनीवा में एजेंसी के प्रवक्ता ने बताया कि इस बारिश और बाढ़ से लगभग पाँच हज़ार 600 लोग विस्थापित हुए हैं. प्रवक्ता ने पत्रकारों से हुई बातचीत में कहा कि आने वाले दिनों में और ज़्यादा बारिश होने का अनुमान लगाया गया है जिससे परेशानी जारी रहने की संभावना है. साथ ही प्रवक्ता ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में मानसूनी हालात की वजह से ये तबाहकुन हालात बांग्लादेश में भी पैदा हुए हैं.

अप्रैल महीने से लेकर इस तबाही वाले मौसम की वजह से 45 हज़ार से भी ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. जुलाई में विश्व खाद्य कार्यक्रम ने मानसूनी बारिश से प्रभावित हुए हज़ारों शरणार्थियों को खाद्य सामग्री के पैकेट उपलब्ध कराए थे. इनमें पका हुआ भोजन, ऊर्जा देने वाले बिस्कुट और खाने की सूखी चीज़ें जैसे चावल, दालें और तेल वग़ैरा शामिल थे.   

भारी बारिश और बाढ़ की वजह से पैदा हुए कीचड़ और पानी की वजह से यातायात जाम हो रहा है जिसकी वजह से शरणार्थी शिविर के प्रभावित इलाक़ों में चलना-फिरना मुश्किल हो गया है. इस कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन ने खाद्य सामग्री की आपात आपूर्ति के लिए सामान शिविर के आसपास ही रखा है जिससे कहीं भी खाद्य सामग्री की ज़रूरत होने पर वहाँ पहुँचाई जा सके.

विश्व खाद्य कार्यक्रम के पास शिविर में मौजूद लगभग नौ लाख की आबादी की दो सप्ताह तक की खाद्य ज़रूरतें पूरी करने के लिए समुचित मात्रा में सामान मौजूद है.

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी का कहना है कि फिलहाल उसकी प्राथमिकता बारिश की वजह से होने वाले भूस्खलन को रोकना और पानी के निकासी व्यवस्था को और ज़्यादा बिगड़ने से बचाना है.

खाद्य एजेंसी के प्रवक्ता का कहना था कि इंजीनियरिंग विभाग के लोग और आपदा का ख़तरा कम करने वाली इकाइयों के लोग लगभग तीन हज़ार रोहिंज्या शरणार्थियों के साथ मिलकर प्रयासों में जुटे हैं. लेकिन चूँकि भारी बारिश की वजह से और भी ज़्यादा ज़मीन धँसने की आशंका व्यक्त की गई है तो विश्व खाद्य एजेंसी की आपदा टीमें विभिन्न इलाक़ों में मुस्तैद हैं ताकि किसी भी समय ज़रूरत पड़ने पर वे तुरंत बचाव कार्यों के लिए रवाना हो सकें, इसमें रात के दौरान भी मुस्तैदी शामिल है.

बारिश से हुए नुक़सान को देखते हुए ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है कि अगर विश्व खाद्य कार्यक्रम एजेंसी ने पहले से ही ठोस इंताज़ाम नहीं किए होते तो ये तबाही और भी ज़्यादा होती. एजेंसी ने मॉनसून की तैयारी के लिए पहले से ही बहुत से एहतियाती उपाय किए थे जिनमें तूफ़ान व बाढ़ के ख़तरों से निपटना, शिविर में हालात बेहतर बनाना और तूफ़ान व बाढ़ की हालत में उसके असर को कम करने के उपाय शामिल थे. साथ ही मानवीय सहायता बढ़ाने के उपाय भी किए गए थे.

प्रवक्ता के अनुसार तूफ़ान आपदा के ख़तरों को कम करने के उपायों में पुलों की मरम्मत और नए पुल बनाना, ढलान वाले क्षेत्रों को मज़बूत करना, पानी निकासी के रास्तों को साफ़ रखना, शिविर इलाक़ों में और ज़्यादा पेड़ लगाना वग़ैरा शामिल था.

साल 2017 में म्याँमार में हुई हिंसा से बचने के लिए बांग्लादेश पहुँचे लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों की स्थिति अब भी बहुत नाज़ुक है. बहुत से लोगों के पास अब भी खाने-पीने का सामान समुचित मात्रा में उपलब्ध नहीं है और यदि मानवीय सहायता और नहीं बढ़ाई गई तो हालात ज़्यादा बिगड़ने के आसार हैं.

इस समय शरणार्थियों की लगभग 80 फ़ीसदी आबादी विश्व खाद्य कार्यक्रम एजेंसी खाद्य सहायता पर निर्भर है. इनमें से लगभग आधी संख्या को खाद्य वितरण प्रणाली के ज़रिए खाद्य सामग्री मुहैया कराई जाती है. बाक़ी लगभग आधे लोगों को ई-वाउचर्स के ज़रिए ये सामग्री मिलती है. एजेंसी को लगभग नौ लाख की आबादी की खाद्य ज़रूरतें पूरी करने के लिए लगभग दो करोड़ 40 लाख डॉलर की रक़म ख़र्च करनी पड़ती है.

एजेंसी के प्रवक्ता का कहना था, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लगातार समर्थन के बिना इन शरणार्थियों के लिए हालात और भी ज़्यादा दयनीय व ख़तरनाक बन जाएंगे.”

 

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