लीबिया: हिरासत में रखे गए शरणार्थियों और प्रवासियों को रिहा करने की अपील

12 जुलाई 2019

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी और यूएन प्रवासन एजेंसी के प्रमुखों ने लीबिया में हिरासत में रखे गए साढ़े पांच हज़ार से ज़्यादा शरणार्थियों और प्रवासियों को रिहा करने की अपील की है. यूएन अधिकारियों ने एक साझा बयान में हिरासत केंद्रों से लोगों को व्यवस्थित ढंग से रिहा करने की और उनके मानवाधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है.

लीबिया की राजधानी त्रिपोली के तजोरा हिरासत केंद्रों के तीन जुलाई को युद्ध गतिविधियों की चपेट में आने और वहां एक मिसाइल गिरने से 50 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 130 से ज़्यादा घायल हुए थे.

हिंसा में शामिल दोनों पक्षों को इस हिरासत केंद्र के बारे में जानकारी थी लेकिन फिर भी उसके निशाना बनने की संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश और अन्य एजेंसियों ने निंदा की थी.

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के महानिदेशक एंतोनियो वितोरिनो और यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैंडी ने शुक्रवार को एक बयान जारी करके कहा कि लीबिया में प्रवासियों और शरणार्थियों के मानवाधिकारों का संरक्षण अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा चलाए जा रहे सहायता अभियान के मूल में होना चाहिए.

बताया गया है कि यूरोपीय संघ और अफ़्रीकी संघ से को अपील भी जारी की गई है कि ताकि फिर से ऐसी त्रासदी ना हो.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का कहना है कि अगर लीबिया में शरणार्थियों और प्रवासियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती तो फिर अन्य देशों में भेजा जाना चाहिए.

साथ ही उन्होंने लीबिया से अनुरोध किया है कि समुद्र के रास्ते से आने वाले शरणार्थियों और प्रवासियों को बचाए जाने के बाद हिरासत में लिए जाने की प्रक्रिया बंद होनी चाहिए. इसके बजाय उन्हें खुले स्थानों पर समुदायों के साथ रहने देने की अपील की गई है.

तजोरा हिरासत केंद्र से 400 लोगों को नए केंद्र पर भेजा गया है जिसके बाद वहां भीड़ बढ़ गई है.

संयुक्त राष्ट्र नाज़ुक परिस्थितियों में रह रहे शरणार्थियों को लीबिया से बाहर निकालने के प्रयासों में जुटा है.

लीबिया में फ़िलहाल 50 हज़ार से ज़्यादा पंजीकृत शरणार्थी और शरण के लिए आवेदन करने वाले और क़रीब आठ लाख प्रवासी रह रहे हैं.

इनमें से बड़ी संख्या में लोग बदहाल स्थिति में रह रहे हैं और उनके मानवाधिकारों का हनन हो रहा है.

यूएन अधिकारियों ने बताया कि भूमध्यसागर में समुद्री मार्ग से यात्रा के दौरान बचाए गए यात्रियों को लीबिया नहीं ले जाया जाना चाहिए क्योंकि उसके एक सुरक्षित बंदरगाह नहीं माना जा सकता.

इसके बजाय यूरोपीय देशों के जहाज़ों से तलाश एवं बचाव अभियान फिर से शुरू करने की अपील की गई है जिनकी बदौलत पहले हज़ारों लोगों की ज़िंदगियाँ बचाने में सफलता मिली थी.

बयान के अनुसार व्यवसायिक जहाज़ों का इस्तेमाल समुद्र में बचाए गए यात्रियों को लीबिया वापस लाने के लिए नहीं होना चाहिए.

साथ ही उन ग़ैरसरकारी संगठनों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जो इसी ढंग से अभियान चला कर समुद्री रास्ते में लोगों की जानें बचा रहे हैं.

यूएन एजेंसियों के प्रमुखों ने कहा है कि लीबियाई प्रशासन को तभी समर्थन दिया जाना चाहिए जब मनमाने ढंग से शरणार्थियों और प्रवासियों को हिरासत में लिया जाना बंद हो और उनके मानवाधिकारों की रक्षा की जाए.

इस गारंटी के अभाव में लीबिया को समर्थन रोकने का सुझाव दिया गया है.

 

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