कैरिबियाई देशों पर मंडराते जलवायु संकट का 'सामना मिलकर करेंगे'

3 जुलाई 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कैरिबियाई द्वीपीय देशों को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है उनका सामना मिलकर किए जाने की आवश्यकता है. सेंट लूसिया में कैरिबियाई समुदाय (CARICOM) के वार्षिक सम्मेलन में जलवायु संकट पर चिंता जताते हुए उन्होंने विश्व नेताओं से ठोस जलवायु कार्रवाई का खाका तैयार करने की अपील की.

सेंट लूसिया में कैरिबियाई देशों के नेता टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में आ रही मुश्किलों पर चर्चा के लिए एकत्र हुए हैं.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि सेंट लूसिया की सुंदरता और कैरिबियाई द्वीपों की अप्रतिम आवाजों और जीवन जीने के तरीक़े पर ख़तरा मंडरा रहा है.

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, टिकाऊ विकास की राह में पेश आ रही बाधाएं, नागरिक सुरक्षा और सहनशीलता क़ायम करने की ज़रूरत और विकास के लिए वित्तीय संसाधनों को जुटाना जैसे मुद्दे लघु द्वीपीय विकासशील देशों के सामने चुनौतियों पैदा कर रहे हैं.

कुछ ही हफ़्ते पहले महासचिव गुटेरेश ने पैसेफ़िक देशों की यात्रा की थी और जलवायु संकट से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों को नज़दीक से देखा था. अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि विकास के लिए होने वाले निवेश जलवायु परिवर्तन के नज़रिए से ही किए जा रहे हैं.

साल 2017 में कैरिबियाई देशों में आए चक्रवाती तूफ़ान इरमा और मारिया से हुई तबाही का भी उन्होंने उल्लेख किया और कहा कि सालों से विकास के मोर्चे पर हुई प्रगति बरबूडा और डोमिनिका में दो ही दिनों में ध्वस्त हो गई.

उन्होंने आगाह किया कि जलवायु संबंधी प्राकृतिक आपदाएं की बारंबारता और तीव्रता बढ़ रही है जिससे स्थानीय लोगों के लिए ख़तरे बढ़ रहे हैं.

उन्होंने स्पष्ट किया कि कैरिबियाई देशों का अनुभव दर्शाता है कि कार्बन उत्सर्जन में वैश्विक स्तर पर कमी लाना ज़रूरी है और यह सुनिश्चित करना भी कि वैश्विक तापमान में औसत वृद्धि 1.5 डिग्री से ज़्यादा न हो.

उन्होंने कहा कि वह सभी नेताओं, सरकारों और निजी क्षेत्रों से अपील कर रहे हैं कि सितंबर में होने वाली जलवायु शिखर वार्ता या फिर दिसंबर 2020 तक वे अपनी योजनाओं का खाका तैयार कर लें. इसके केंद्र में 2030 तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 45 फ़ीसदी की कटौती और 2050 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी हासिल करना होगा.

साथ ही उन्होंने कम उत्सर्जन वाले और सुदृढ़ विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वाकांक्षा बढ़ाने पर ज़ोर दिया ताकि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटा जा सके.

जलवायु परिवर्तन से आ रहे व्यवधान के विरुद्ध कार्रवाई में उन्होंने कैरिबियाई देशों को महत्वपूर्ण साझेदार बताया.

उन्होंने दुख ज़ाहिर किया कि समुद्र में हर साल 80 लाख टन प्लास्टिक कचरा जा रहा है और कैरिबियाई देश ख़ासतौ पर इस प्रदूषण के प्रभाव सीधे देख रहे हैं.

प्लास्टिक प्रदूषण से तटरेखाओं का क्षरण होने, चरम जलवायु वाली घटनाएं बार-बार होने, समुद्री जलस्तर बढ़ने और जैवविविधता खोने से कैरिबियाई देशों पर दबाव बढ़ रहा है.

समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों के सामने पैदा हो रही इन मुश्किलों को दूर करने के लिए उन्होंने प्रतिदिन कार्रवाई करने पर ज़ोर दिया है.

 

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