जलवायु संकट से निपटने के लिए 'महत्वाकांक्षी कार्रवाई की तत्काल ज़रूरत'

1 जुलाई 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि दुनिया एक गंभीर जलवायु इमरजेंसी का सामना कर रही है. संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी आबू धाबी में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जलवायु कार्रवाई के लिए तत्काल निडर और महत्वाकांक्षी कदम उठाए जाने होंगे. 

“जलवायु की वजह से होने वाले व्यवधान अब होने शुरू हो गए हैं और हम सबके सामने हो रहे हैं. विश्व में शीर्ष वैज्ञानिकों के अनुमानों से कहीं ज़्यादा तेज़ गति से ये परिवर्तन हो रहा है.”

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने फिर ध्यान दिलाया कि जलवायु परिवर्तन के विरूद्ध लड़ाई में दुनिया पिछड़ रही है और हर सप्ताह जलवायु से संबंधित तबाही का समाचार मिल रहा है. इनमें बाढ़, सूखा, गर्म हवाए, जंगल में आग और चक्रवाती तूफ़ान शामिल हैं.

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि जलवायु परिवर्तन की वजह से लोग अपने घर खो रहे हैं और मजबूरी में विस्थापन का शिकार हो रहे हैं. बैठक को सेबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा के साथ तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और ख़राब हो जाएगी.

पिछले हफ़्ते कुछ रिपोर्टों में पता चला था कि हिमालय में ग्लेशियरों का पिघलना ना सिर्फ़ जारी है बल्कि सदी की शुरुआत की तुलना में अब वे दोगुनी गति से पिघल रहे हैं. उन्होंने आगाह किया कि इससे मध्य, दक्षिण और पूर्वी एशिया में जल आपूर्ति का संकट खड़ा हो जाएगा“

"मुझे स्पष्ट लगता है कि हमारे पास खोने के लिए समय नहीं है. लेकिन दुखद है कि दुनिया को चला रहे नीति निर्धारक अब भी इस ख़तरे को भांप नहीं पाए हैं.” 

उन्होंने चिंता जताई कि कई देश पेरिस समझौते के अंतर्गत अपने वादों को पूरा नहीं कर रहे हैं.

इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रखने के लिए भूमि, ऊर्जा, उद्योग, इमारतों, परिवहन और शहरी प्रबंधन में तात्कालिक और दूरगामी बदलाव लाने की आवश्यकता बताई गई है. 

इन्हीं प्रयासों के तहत सितंबर में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में जलवायु शिखर वार्ता का आयोजन किया जा रहा है. आबू धाबी में हो रही बैठक उसी वार्ता का खाका तैयार करने का एक अवसर है. 

“हमारी शिखर वार्ता खुली, समावेशी और ईमानदार होनी चाहिए. और जिस कार्य को हम आगे ले जाना चाहते हैं वह प्रभावी, न्यायोचित और निष्पक्ष होना चाहिए – विशेषकर उनके लिए जो संकट के सीधे मोर्चे पर खड़े हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी.”

 

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