'तबाही के कगार पर' है इदलिब प्रांत

27 जून 2019

11 वैश्विक मानवीय संगठनों के प्रमुखों ने चेतावनी जारी की है कि सीरिया में विद्रोहियों के नियंत्रण वाला प्रांत इदलिब विनाशकारी हालात से जूझ रहा है और वहां तीस लाख आम नागरिकों की जान ख़तरे में है. इनमें दस लाख बच्चे शामिल हैं. इदलिब में सरकारी सुरक्षा बलों ने विद्रोहियों के विरुद्ध बड़ा अभियान छेड़ा है जिससे हिंसा तेज़ हो गई है.

इदलिब में जारी लड़ाई में फंसे आम लोगों की मदद के लिए एक विश्वव्यापी मुहिम शुरू की गई है जिसे ‘द वर्ल्ड इज़ वॉचिंग’ नाम दिया गया है.

इस अवसर पर वीडियो संदेश के ज़रिए मानवीय संगठनों के प्रमुखों ने कहा कि आम लोगों को लगातार हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और अब तक बहुत से लोग मारे भी जा चुके हैं.

इस मुहिम में हिस्सा लेने वाले संगठनों में यूनीसेफ़, यूएन वीमैन, वर्ल्ड विज़न, मर्सी कॉर्प्स, इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी, केयर इंटरनेशनल, वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम, कंसर्न वर्ल्डवाइड जैसे संगठन शामिल हैं. 

सीरिया में सुरक्षा बलों पर आरोप लगे हैं कि चरमपंथियों के साथ  जारी लड़ाई में स्कूल, अस्पताल और बाज़ार भी निशाना बन रहे हैं. ऐसे में उनका ध्यान दिलाया गया है कि युद्ध के भी नियम होते हैं जिनका पालन किया जाना चाहिए.

उन्होंने सचेत किया कि “इदलिब मानवीय दुस्वप्न के कगार पर खड़ा है और ऐसी स्थिति इस सदी में हमने नहीं देखी.”

संयुक्त राष्ट्र में राहत और मानवीय मामलों में समन्वयन के प्रमुख मार्क लोकॉक ने कहा कि सीरिया में हिंसा को रोका नहीं जा सका है और ना ही अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाई है.

इस राजनीतिक विफलता की क़ीमत एक बार फिर निर्दोष लोगों को अपनी जान से चुकानी पड़ रही है.

“जो परिवार हमलों से प्रभावित हैं, हमारी मुहिम उनके साथ एकजुटता दिखाने के लिए है और यह बताने के लिए कि हम नज़र रखे हुए हैं और इस बात के ग़वाह हैं कि क्या हो रहा है.”

‘सार्वभौमिक मूल्यों और सिद्धांतों को जीतना होगा’

मानवीय मामलों की वरिष्ठ सलाहकार नजत रूश्दी ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी सीरिया में सुरक्षा बलों की नए सिरे से कार्रवाई शुरू होने के बाद से अब तक 300 आम नागरिकों की मौत हो चुकी है जिनमें कई बच्चे और महिलाएं शामिल हैं.

गुरुवार को जिनीवा में सीरिया मुद्दे पर मानवीय टास्कफ़ोर्स की बैठक हुई जिसमें उन्होंने बताया कि पिछले हफ़्ते एक एम्बुलेंस हवाई हमलों की चपेट में आ गई जिससे तीन स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो गई.

यह घटना तब हुई जब वे एक महिला मरीज़ को बचाने के लिए एक स्थानीय अस्पताल लेकर जा रहे थे.

“आम लोगों की सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाए जाने की ज़रूरत है. जब इतनी बड़ी संख्या में मासूम जानें दांव पर लगी हों तो सार्वभौमिक सिद्धांतों और मूल्यों को जीतना ही होगा.”

जॉर्डन की सीमा के पास स्थित रुकबान कैंप में रहने को मजबूर 27 हज़ार विस्थापित लोगों को बुनियादी सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं और उन्हें तत्काल सहायता की ज़रूरत है.

“हम रुकबान तक मानवीय राहत पहुंचाने की अपील जारी रखे हैं ताकि लोगों को जीवनरक्षक सहायता मिल जाए और जो वहां से निकलना चाहते हैं उन्हें सहायता प्रदान की जा सके.”

अलेप्पो और पूर्वी घोटा में लड़ाई की वजह से पहले भी बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए थे और उन्होंने इदलिब में शरण ली थी जिसके बाद वहां की जनसंख्या दोगुनी हो गई थी.

पिछले दो महीनों में हिंसा में तेज़ी आई है जिसके बाद सवा तीन लाख से ज़्यादा लोगों को क्षेत्र में अन्य स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

अनेक लोगों के पास तो अब भागकर कहीं और जाने का विकल्प भी नहीं बचा है.

 

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