आंखों की संक्रामक बीमारी ट्रेकोमा पर क़ाबू पाने में बड़ी सफलता

27 जून 2019

विश्व स्तर पर दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण ट्रेकोमा संक्रमण का जोखिम झेल रहे लोगों की संख्या में 17 वर्षों में 91 फ़ीसदी की गिरावट हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 2002 में 1.5 अरब लोग ट्रेकोमा संक्रमण के ख़तरे का सामना कर रहे थे लेकिन 2019 में यह संख्या घटकर 14 करोड़ पर आ गई है. 

2020 तक ट्रेकोमा के वैश्विक उन्मूलन के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन अलायंस (GET2020) की 22वीं बैठक के दौरान नए आंकड़े पेश किए गए हैं. आंकड़े दर्शाते हैं कि 'ट्रेकोमाट्स ट्रिकिएसिस' ( ट्रेकोमा संक्रमण में दृष्टिहीनता का चरण)  से पीड़ित लोगों की संख्या 2002 में 76 लाख से घटकर 2019 में 25 लाख रह गई है.

ट्रेकोमा आंखों का एक रोग है जो ‘क्लामिड्या ट्रेकोमैटिस’ नामक बैक्टीरियम से संक्रमण की वजह से होती है. 

संक्रमित व्यक्ति की आंखों और नाक से संक्रमणकारी स्राव होने और उसके संपर्क में आने से यह बीमारी होती है.

इस बैक्टीरियम से संक्रमित लोगों की आंखों और नाक के संपर्क में आने वाली मक्खियां भी इसे फैलाती हैं. बच्चे ख़ासतौर पर इस संक्रमण के वाहक होते हैं.

ट्रेकोमा के मामले अब भी 44 देशों में देखने को मिलते हैं और विश्व भर में 19 लाख लोग इसके कारण दृष्टिहीनता या दृष्टिबाधिता (visual impairment) से पीड़ित हैं.

ट्रेकोमा संक्रमण के मामलों के बारे में जानकारी जुटाने और उन पर नियंत्रण पाने के लिए ‘सेफ़ रणनीति’ (SAFE strategy) का सहारा लिया जा रहा है: ट्रिकिएसिस के लिए सर्जरी, संक्रमण दूर करने के लिए एंटीबायोटिक्स, और संक्रमण फैलने से रोकने के लिए चेहर की स्वच्छता और पर्यावरण की बेहतरी. 

'इंटरनेशनल कोएलिशन फ़ॉर ट्रेकोमा कंट्रोल' के प्रमुख स्कॉट मैकफ़ेरसन ने बताया कि “ट्रेकोमा उन्मूलन का तत्काल लाभ ये है कि दृष्टिहीनता का जोखिम झेल रहे लोगों की आंखों की रौशनी बच जाती है. लेकिन ट्रेकोमा पर क़ाबू पाने के प्रयासों में अभिनव साझेदारियों की ज़रूरत महसूस हुई है, जिससे व्यापक स्वास्थ्य  सेवाओं में मज़बूती लाकर सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले वंचित पीछे न छूटने पाएं.”

'सेफ़ रणनीति' का सहारा

साल 2018 में दुनिया के 782 ज़िलों में एंटीबायोटिक दवाईयों के ज़रिए ट्रेकोमा से ग्रस्त क़रीब नौ करोड़ लोगों का इलाज किया गया.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2011 से अब तक आठ देशों को इस सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या का उन्मूलन करने में सफलता मिली है.

कई ऐसे देश हैं जहां ट्रेकोमा के मामले नियमित रूप से देखने को मिलते थे लेकिन अब वे इस बीमारी पर पूरी तरह क़ाबू पा चुके हैं. यह दर्शाता है कि अलग-अगल पर्यावरणों में भी सेफ़ (SAFE) रणनीति प्रभावी साबित हुई है.

स्वास्थ्य संगठन में वैश्विक उन्मूलन कार्यक्रम की बागडोर संभालने वाले डॉ एंथनी सोलोमन ने बताया कि इस संबंध में शानदार प्रगति हुई है लेकिन हम आत्मसंतुष्ट होने का जोखिम मोल नहीं ले सकते.

“अगले कुछ सालों में हम ट्रेकोमा को इतिहास की किताबों तक सीमित कर सकेंगे, लेकिन उसके लिए हमें अपने प्रयासों को दोगुना करना होगा. आख़िरी कुछ देशों में यह हासिल कर पाना शायद सबसे मुश्किल होगा.”

ट्रेकोमा संक्रमण के मामलों में बड़ी गिरावट आने की मुख्य वजहें मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति, नियंत्रण के लिए उठाए जाने वाले क़दमों को व्यापक बनाने और उच्च गुणवत्ता वाले डैटा को जुटा पाने में मिली सफलता बताई गई हैं.

इस संबंध में चलाए गए वैश्विक कार्यक्रम को ‘ग्लोबल ट्रेकोमा मैपिंग प्रोजेक्ट (2012-2016)’ से भी सहायता मिली है जो संक्रामक बीमारियों के बारे में जानकारी एकत्र करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा प्रयास है.

2016 से इसे ‘ट्रॉपिकल डैटा’ से भी समर्थन मिला जिसके ज़रिए स्वास्थ्य मंत्रालयों ने अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए 1,500 से ज़्यादा सर्वेक्षण किए जिससे बीमारी की व्यापकता का पता लगाया जा सके.

1996 में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने अलायंस में शामिल अन्य साझेदार संगठनों के साथ मिलकर 'गेट2020' (GET2020) शुरू किया था.

इसके तहत अपनाई गई रणनीति से राष्ट्रीय क्षमताओं को विकसित किए जाने, संसाधन जुटाने और ट्रेकोमा संक्रमण की निगरानी करने पर ज़ोर दिया जाता है.

 

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