ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल से बढ़ती समस्याएं

26 जून 2019

मादक दवाओं के इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रतिकूल असर अनुमान से कहीं ज़्यादा गंभीर और व्यापक है. मादक पदार्थों और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र राष्ट्र कार्यालय (UNODC) की नई रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है. रिपोर्ट दर्शाती है कि विश्व में मादक दवाओं और पदार्थों के इस्तेमाल से होने वाली समस्याओं से साढ़े तीन करोड़ लोग पीड़ित हैं लेकिन हर सात में से एक पीड़ित का ही उपचार हो पाता है.

साल 2017 के लिए अनुमान में बढ़ोत्तरी बेहतर शोध और सटीक आंकड़ों की उपलब्धता से संभव हो सकी है.

आंकड़े जुटाने के लिए भारत और नाईजीरिया में मादक पदार्थों के इस्तेमाल के दायरे को समझने के लिए नए सर्वेक्षण कराए गए.

दोनों देश विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या वाले दस देशों में शामिल हैं.

ओपिओयड (Opioid) से तात्पर्य अफ़ीम और उसके अन्य रूपों जैसे हेरोइन और उससे बनने वाली दर्दनिवारक दवाओं जैसे फ़ेन्टानिल और ट्रैमाडोल से है.

रिपोर्ट के अनुसार ओपिओयड का सेवन करने वाले लोगों की संख्या पांच करोड़ से ज़्यादा है जो पिछले अनुमानों की तुलना में 56 फ़ीसदी अधिक है.

वर्ष 2017 में ड्रग्स के इस्तेमाल से पांच लाख 85 हज़ार लोगों की मौत हुई जिनमें दो-तिहाई मौतों की वजह ओपिओयड का सेवन थी.

2017 में एक करोड़ से ज़्यादा लोगों ने ड्रग्स के इंजेक्शन लगाए जिनमें से 14 लाख लोग एचआईवी और 56 लाख लोग हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित हैं.

यूएन एजेंसी के कार्यकारी निदेशक यूरी फ़ेदोतोफ़ ने बताया कि ”इस साल की वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट के निष्कर्षों ने नशीली दवाओं से पैदा होने वाली चुनौतियों की वैश्विक तस्वीर को और जटिल बना दिया है.”

उन्होंने संतुलित और एकीकृत स्वास्थ्य और आपराधिक न्याय प्रणालियों को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया है.

स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2017 में जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार 15-64 आयु वर्ग के 27 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने ड्रग्स का इस्तेमाल किया.

ONU News/Alexandre Soares
2017 में ड्रग्स के इस्तेमाल से पांच लाख 85 हज़ार लोगों की मौत हुूई.

वैसे तो यह अनुमान साल 2016 के आंकड़ों के समान ही है लेकिन दीर्घकालीन विश्लेषण बताता है कि ड्रग्स का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या 2009 की तुलना में अब 30 प्रतिशत अधिक है.

आंकड़े दर्शाते हैं कि एशिया, अफ़्रीका, योरोप और उत्तर अमेरिका में अफ़ीम और उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और एशिया में 2009 के मुक़ाबले भांग का इस्तेमाल बढ़ रहा है.

कोकेन का ग़ैरक़ानूनी ढंग से उत्पादन साल 2017 में 1,976 टन पहुंच गया जो उच्चतम स्तर है. उससे पिछले साल की तुलना में इसमें क़रीब 25 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई है.

वैश्विक स्तर पर 2017 में ज़ब्त की गई कोकेन की मात्रा में 13 प्रतिशत की वृद्धि आंकी गई और यह बढ़कर 1,275 टन हो गई है जो अब तक की सबसे बड़ी मात्रा है.

2017 में उत्तरी अमेरिका में सिंथेटिक ओपिओयड का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल करने का संकट भी नए स्तर पर पहुंच गया. 2017 में अमेरिका में ओपिओयड की ओवरडोज़ से 47 हज़ार मौतें हुई हैं जो उससे पिछले साल की तुलना में 13 फ़ीसदी अधिक है.

कैनेडा में ओपिओयड के सेवन की वजह से चार हज़ार मौतें हुई जो 2016 की तुलना में 33 फ़ीसदी अधिक हैं.

फेंटानिल (Fentanyl) और उस तरह की अन्य दर्दनिवारक दवाएं उत्तरी अमेरिका में सिंथेटिक ओपिओयड संकट की मुख्य वजह बनी हुई हैं.

वहीं पश्चिम, मध्य और उत्तर अफ़्रीका में भी सरकारें एक और सिंथेटिक ओपिओएड ट्रैमाडोल (Tramadol) का सामना कर रहे हैं.

वैश्विक स्तर पर ट्रैमाडोल की बरामदगी साल 2010 में दस किलो से भी कम थी लेकिन 2013 में यह मात्रा बढ़कर नौ टन और 2017 में 125 टन पहुंच गई.

विश्व स्तर पर सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली ड्रग अब भी भांग है. एक अनुमान के अनुसार 2017 में 18 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने इसका इस्तेमाल किया.

रोकथाम और उपचार सेवाओं को उपलब्ध कराने में दुनिया के कई देशों में कमी देखी गई है.

नशीली दवाओं के इस्तेमाल से पीड़ित हर सात में से महज़ एक व्यक्ति को इलाज मिल पाता है.

इस वर्ष की रिपोर्ट में जेलों में ड्रग्स के इस्तेमाल और उसके प्रतिकूल स्वास्थ्य परिणामों का गहराई से विश्लेषण किया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार एचआईवी, हेपेटाइटिस-सी और सक्रिय तपेदिक जैसे संक्रामक रोगों की व्यापकता और उससे संबंधित जोखिम जेल में रह रहे लोगों के लिए ज़्यादा हैं. विशेषकर उन के लिए जो ड्रग्स के इंजेक्शन लगाते हैं.

रिपोर्ट बताती है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों के अनुरूप प्रभावी उपचार उस स्तर पर उपलब्ध या सुलभ नहीं हैं जितने कि उन्हें होने की आवश्यकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय सरकारों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह अंतर दूर करने के लिए प्रयास करने होंगे.

 

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