फ़लस्तीनी शरणार्थी एजेंसी की उपलब्धियां 'हमारी साझा सफलता'

25 जून 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी है कि फ़लस्तीनी शरणार्थियों को राहत पहुंचाने में जुटी यूएन एजेंसी (UNRWA) को अपना काम लगातार जारी रखने के लिए मदद मिलती रहे. उन्होंने कहा कि एजेंसी के प्रयासों को सभी के लिए साझा दायित्व और साझा सफलता के तौर पर देखा जाना चाहिए.

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन राहत एवं कार्य एजेंसी लाखों बच्चों को स्कूली शिक्षा मुहैया कराती है और मानवाधिकार और सहिष्णुता जैसे यूएन मूल्यों को बढ़ावा देती है.

मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के इरादे से ‘प्लेजिंग कॉन्फ़्रेंस’ यानी प्रतिज्ञा सम्मेलन शुरू हुआ.  

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने पिछले सात दशकों में यूएन एजेंसी की उपलब्धियों का ज़िक्र किया. 700 स्कूलों को संचालित करने और पांच लाख से ज़्यादा फ़लस्तीनी शरणार्थियों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ यूएन एजेंसी किफ़ायती और गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाएं भी सुनिश्चित करती रही है.

इसके अलावा क़रीब दस लाख लोगों के लिए भोजन सामग्री सहायता भी मुहैया कराई जाती है.

वित्तीय संसाधनों की ज़रूरत

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष मारिया फ़र्नान्डा एस्पिनोसा ने कहा कि न्यूयॉर्क सम्मेलन में शामिल होकर प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि वे यूएन एजेंसी के मूल्य को समझते हैं और सहायता राशि में योगदान देकर उसके महत्वपूर्ण काम को जारी रखना चाहते हैं.

महासभा अध्यक्ष ने सचेत किया कि राहत कार्यक्रमों को जारी रखने के लिए यूएन एजेंसी को 1.2 अरब डॉलर की आवश्यकता है लेकिन अभी इस लक्ष्य को पूरा करने में 21 करोड़ डॉलर की कमी है. उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि यह सोचा जाना होगा कि अगर ज़रूरी धनराशि नहीं मिली तो फिर राहत ज़रूरतों को कैसे पूरा किया जाएगा और उसके पांच लाख बच्चों और 54 लाख शरणार्थियों के लिए क्या नतीजे होंगे.

यूएन राहत एवं कार्य एजेंसी के प्रमुख पिएरे क्रेएनब्यूल ने प्रतिनिधियों को ध्यान दिलाया कि एजेंसी एक ऐसे माहौल में काम करती है जहां सालों से हो रही हिंसा, नाकेबंदी और संघर्ष से लोग मनोवैज्ञानिक तौर पर सदमे का शिकार हैं. उन्होंने आगाह किया कि नए योगदानों के अभाव में धनराशि की ज़रूरत लगातार बढ़ती जाएगी.

एजेंसी की कार्यकुशलता का एक उदाहरण पेश करते हुए यूएन प्रमुख ने बताया कि असाधारण सुधार प्रक्रिया और ख़र्चों में कटौती के प्रयासों से राहत अभियानों को और कुशल बनाया गया है. इससे 50 करोड़ डॉलर बचाने में सफलता मिली है. अब अपना काम जारी रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की आवश्यकता है.

UN Photo/Manuel Elias
हनन अबू असबेह और हातेम हमदूना नामक दो छात्रों ने अपने अनुभवों को साझा किया.

स्कूलों से बंधती है भविष्य की आशा

संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के संबोधनों के बाद हनन अबू असबेह और हातेम हमदूना नामक दो छात्रों ने रोज़मर्रा के जीवन में पेश आने वाली मुश्किलों को साझा किया और बताया कि यूएन एजेंसी के स्कूल उनके जीवन में कितना मायने रखते हैं. ये छात्र पश्चिमी तट और ग़ाज़ा से हैं और दोनों को साढ़े पांच लाख छात्रों के नुमाइंदों के तौर पर चुना गया था.

हनन ने बताया कि उन्होंने अब तक दुख से भरे जीवन को जिया है और सड़कों पर धमाकों और गोलियों की आवाज़ को सुनते हुए वह बड़ी हुई हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष स्कूल सही समय पर खुलेंगे.

उन्होंने कहा कि कुछ बच्चों के लिए स्कूली वर्ष का समाप्त होना लंबी छुट्टियों का अवसर होता है जिसमें कक्षा में पढ़ाई की फ़िक्र नहीं होती लेकिन फ़लस्तीनी शरणार्थी बच्चों के लिए यह आनंद का अवसर नहीं है क्योंकि उनके लिए शिक्षा ही सबसे महत्वपूर्ण है.

हालांकि हातेम की उम्र सिर्फ़ 15 वर्ष है लेकिन वह अब तक तीन युद्धों को देख चुके हैं. उन्होंने प्रतिनिधियों को बताया कि युद्ध और तबाही के दृश्य उनकी आंखों के सामने घूमते रहते हैं और नींद में भी उनका पीछा नहीं छोड़ते.

ऐसे में यूएन एजेंसी की ओर से मिलने वाली शिक्षा ही बेहतर भविष्य की एक आशा है जिससे उन्हें अंधेरे समय में अपने अधिकारों के बारे में जानने का अवसर मिला.

 

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