जलवायु परिवर्तन पर युवा पीढ़ी कमर कस चुकी है

23 जून 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने में पुरानी पीढ़ियाँ तो नाकाम हो गई मगर युवा पीढ़ी इस चुनौती का सामना करने और इससे होने वाली तबाही की रफ़्तार धीमी करने के लिए कमर कस रही है.

एंतोनियो गुटेरेश ने रविवार को पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में युवाओं और युवा मंचों के लिए ज़िम्मेदारी मंत्रियों के एक विश्व सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए ये बात कही. लिस्बोआ +21 नामक इस सम्मेलन को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन हासिल था. 

युवाओं के लिए नीतियों और कार्यक्रमों पर बनाए गए लिस्बन घोषणा-पत्र के 21 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ये सम्मेलन आयोजित किया गया था.

इसमें विभिन्न देशों की सरकारों द्वारा युवाओं संबंधी योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में हुई प्रगति के बारे में बात करते हैं. साथ ही राजनीति व निर्णय निर्माण प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए किए गए उपायों पर भी बात होती है.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस अवसर 2015 में हुए पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में शामिल की गई चुनौती का ज़िक्र किया कि पृथ्वी पर तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस तक ही सीमित रखा जाए.

इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि युवाओं की बात सुनना और उन्हें किसी टेबल पर सीट दे देना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि युवाओं की माँग है कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया में जगह दी जाए.  

राजनेताओं से बेहतर तो स्कूली बच्चो की समझ

महासचिव का कहना था कि स्वीडन की ग्रेटा थनबर्ग जैसे युवा नेताओं की गतिविधियों की बदौलत दुनिया भर में स्कूली कक्षाओं में छात्र प्रेरित महसूस करने लगे हैं. ये दर्शाता है कि स्कूली बच्चे जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बारे में दुनिया भर के राजनैतिक नेताओं से बेहतर समझ रखते हैं.

वो भलीभाँति समझने लगे हैं कि मौक़ा हाथ से निकलता जा रहा है, वो इस चुनौती का सामना करने के लिए पक्का इरादा दिखा रहे हैं, और उनके इरादे के असर पहले ही नज़र आ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का कहना था कि कुछ देशों की सरकारें ध्यान दे रही हैं और कंपनियों ने भी ये समझना शुरू कर दिया है कि कार्बन उत्सर्जन के क्षेत्र में उनका बड़ा हिस्सा उनकी छवि के लिए बुरा है और उनके लाभ के लिए भी अच्छा नहीं है.

उनका कहना था कि ये तो शुरूआत है कि लिस्बन समारोह में शामिल हुए प्रतिनिधियों जैसे युवाओं के पक्के इरादे और ऊर्जा ने ठोस कार्रवाई को एक प्राथमिकता बना दिया है – हम सब मिलकर चुनौती का सामना करने के लिए एकजुट हो जाएँ.

महासचिव का कहना था, “हमें युवाओं के लिए अनुकूल वातावारण तैयार करना होगा, जहाँ उन्हें सिर्फ़ सहारे की ज़रूरत वाली चीज़ भर ना समझकर, समान अधिकारों, समान आवाज़ और बराबर असर वाले सक्षम नागरिक समझा जाए. उन्हें समाजों में पूर्ण नागरिकों का दर्जा मिले और उन्हें परिवर्तन के ताक़तवर एजेंट समझा जाए.”  

उन्होंने युवाओं के लिए चलाए जा रहे कार्य योजना कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इससे दुनिया भर में युवाओं के लिए नीतियाँ और कार्यक्रम बनाने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है. लिस्बन के समारोह का मुख्य विषय भी यही था.

ख़ासतौर से महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता क़ायम करने वाली नीतियाँ महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आधी आबादी की सक्रिय भागीदारी और उनके नेतृत्व के बिना न्यायपूर्ण और टिकाऊ समुदायों और समाजों का निर्माण नहीं किया जा सकता. 

महासचिव एंतोनिटो गुटेरेश का कहना था कि इस सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों में से अनेक ना सिर्फ़ सितंबर में न्यूयॉर्क में होने वाले महत्वपूर्ण जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भी शिरकत करने आएंगे, बल्कि इस चुनौती का सामना करने के लिए ठोस कार्रवाई जल्दी ही करने के एजेंडा पर ज़ोर देंगे.

युवाओं की संभावनाओं और क्षमताओं की क़द्र करें

इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया. साथ ही युवाओं के लिए महासचिव की विशेष दूत जयाथमा विक्रमनायके ने पूरी संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था की तरफ़ से अपने विचार रखे.

सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वो इतिहास में युवाओं की सबसे बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं क्योंकि 10 से 24 वर्ष के युवाओं की आबादी लगभग एक अरब 80 करोड़ है.

इनमें से लगभग 90 फ़ीसदी विकासशील देशों में रहते हैं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते.

इसलिए युवाओं को उनकी संपूर्ण क्षमताओं को भरपूर तरीक़े से इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने होंगे. 

युवाओं के लिए विशेष दूत ने सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, “युवाओं की क्षमताओं, योग्यताओं और संभावनाओं के लिए उनकी ख़ास क़द्र होनी चाहिए, नाकि युवाओं को एक समस्या के रूप में देखा जाए.” 

“अच्छे इरादे और नीयत से बनाई गई युवा नीतियों को अगर सही तरीक़े से ओर समुचित धन लगाकर लागू किया जाए तो युवाओं में असमानता को कम करने और युवाओं व वृहद समुदाय के बीच दूरिया कम करने में ठोस सफलता मिल सकती है.”

जयथमा विक्रमनायके का कहना था कि 2018 में शुरू की गई संयुक्त राष्ट्र की 2030 युवा रणनीति युवाओं की संभावनाओं के लिए ठोस मंच प्रदान करने के लिए एक ईमानदार क़दम है जिससे युवाओं के अधिकारों को वजूद मिलता है. इसके ज़रिए 2030 के टिकाऊ विकास एजेंडा में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का भी मौक़ा मिलता है. 

उन्होंने सम्मेलन में आए मंत्रियों और नीति निर्माताओं का आहवान किया कि युवा पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने के लिए संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था के साथ मिलकर काम करें. 

 

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