'नफ़रत को नोटिस मिल चुका है' - निपटने के लिए नई रणनीति

18 जून 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नफ़रत फैलाने वाले संदेशों और भाषणों यानी हेट स्पीच पर धावा बोलते हुए सदस्य देशों का आहवान किया है कि सभी को बहुत ज़्यादा मुस्तैदी से काम लेना होगा. मंगलवार को हेट स्पीच पर संयुक्त राष्ट्र की रणनीति और कार्य योजना शुरू करते हुए उन्होंने कहा, “हेट स्पीच को अपने पैर जमाने के लिए कुछ ज़मीन मिल गई है मगर इसे अब नोटिस भी मिल चुका है.”

“हम हेट स्पीच को हमेशा टक्कर देते रहेंगे.”

वैसे तो ये रणनीति और कार्य योजना देखने में नए हैं लेकिन इनकी बुनियाद सभी इंसानों के बुनियादी मानवाधिकारों का सम्मान करने और हर प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता में नीहित है.  

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एकत्रित प्रतिनिधियों को याद दिलाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र का चार्टर उस समय बनाया गया था जब दुनिया नरसंहार को बहुत बड़े और संगठित पैमाने पर देख चुकी थी. उस समय यहूदियों के ख़िलाफ़ बहुत बड़े पैमाने पर नफ़रत फैलाई गई थी जिसका परिणाम मानवता यहूदियों के नरसंहार (हॉलोकास्ट) के रूप में देख चुकी है. “अब लगभग 75 वर्षों बाद फिर से हम उन त्रासदियों से सीखे सबक को भुलाने के कगार पर हैं.”

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश का कहना था, “दुनिया भर में राष्ट्रवाद, नस्लवाद या अन्य किसी आधार पर होने वाले भेदभाव और असहिष्णुता, हिंसक बर्ताव, यहूदियों के विरुद्ध नफ़रत, मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत बढ़ती देखी जा रही है.” उनका कहना था कि कुछ स्थानों पर तो ईसाइयों पर भी संगठित रूप में हमले किए गए.

18 जून 2019 को नफ़रत के ख़िलाफ़ नई रणनीति व कार्य योजना शुरू करने के मौक़े पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश, by UN Photo/Manuel Elias

उससे भी ज़्यादा ख़तरनाक ये चलन है कि नफ़रत भरे और विध्वंसकारी विचारों को डिजिटल मंचों और तकनीकों के ज़रिए बहुत प्रमुखता मिल रही है. नफ़रत भरे और विध्वंसकारी विचारों वाले अतिवादी लोग ऑनलाइन मंचों पर बहुत सक्रिय हो रहे हैं, साथ ही, अन्य लोगों को भी इसके जाल में फँसा रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का कहना था, “उदारवादी लोकतांत्रिक और सर्वसत्तावादी या तानाशाही वाली व्यवस्थाओं दोनों में ही कुछ राजनैतिक नेता नफ़रत भरे विचार और भाषा मुख्य धारा में फैलाने में लगे हैं. साथ है इस तरह के राजनेता नफ़रत भरी भाषा और विचारों को सामान्य घटनाक्रम बनाने की कोशिश कर रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में खुली बहस को हतोत्साहित करके सामाजिक ताने-बाने को तहस-नहस करने में लगे हुए हैं.”  

उनका कहना था कि नफ़रत भरी भाषा और विचार ना सिर्फ़ मानवाधिकारों का सम्मान करने वाले सामान्य बर्ताव, मानकों और सिद्धांतों पर हमला करते हैं बल्कि सामाजिक समरसता वाले माहौल, बर्ताव और आदतों को भी नकारत हैं. नफ़रत से साझे मूल्यों और साझे बर्तावों के आधार पर ज़िन्दगी जीने का वातावरण बिघरता है और हिंसक बर्ताव जड़ पकड़ता है.

नफ़रत भरे विचार व भाषा शांति स्थापना, स्थिरता, टिकाऊ विकास लक्ष्यों और सभी के मानवाधिकार सुनिश्चित करने के प्रयासों के भारी धक्का पहुँचता है.

एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि नफ़रत भरी भाषा और विचार रवांडा, बोस्निया, कंबोडिया में हुए नरसंहारों के लिए उकसाने वाला माहौल बनाती है. साथ ही हाल के समय में श्रीलंका, न्यूज़ीलैंड और अमेरिका में विभिन्न समुदायों के धार्मिक स्थलों पर हुए हमलों के लिए भी भड़काती है.

नफ़रत को बढ़ने से रोकना होगा

नफ़रत भरी भाषा और विचारों का प्रभावशाली मुक़ाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की इस रणनीति व कार्य योजना में सरकारी मशीनरी और तमाम संस्थानों और संगठनों में लागू करने के इरादे से बनाई गई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव का कहना था कि नफ़रत भरी भाषा और विचारों (हेट स्पीच) की निशानदेही करने, उसे रोकने और उसका बहादुरी से मुक़ाबला करने के लक्ष्य रखे गए हैं.

“ये रणनीति और कार्य योजना हेट स्पीच के मूल कारणों पर धावा बोलने के लिए बनाई गई है जो रोकथाम वाले मेरे विज़न यानी दृष्टिकोण से मेल खाती है.”

उनका कहना था, “इनमें हिंसक प्रवृत्ति और विचारों का मुक़ाबला करने, लोगों को अलग-थलग करने, भेदभाव और ग़रीबी जैसी समस्याओं से निपटने के प्रयास करना भी शामिल है. साथ ही कमज़ोर पड़ रहे सरकारी संस्थानों को फिर से मज़बूत करना भी.”

इनमें से कुछ लक्ष्य तो 2030 के टिकाऊ विकास एजेंडा में पहले से ही शामिल किए जा चुके हैं, नई रणनीत और कार्य योजना में एक क़दम और आगे बढ़कर नफ़रत भरे विचारों और भाषा से फ़ायदा उठाने वालों को पहचान कर, उनका मुक़ाबला एक जुट होकर करने की भी ज़ोरदार हिमायत की गई है.

दूसरी बात ये है कि ये रणनीति में नफ़रत भरे भाषणों व विचारों का समाजों पर होने वाले प्रभाव का मुक़ाबला करने में सक्षम बनाने का लक्ष्य भी शामिल है.

एंतोनेयो गुटेरेश ने विस्तार से बताते हुए कहा कि नफ़रत भरे विचारों और भाषा का मुक़ाबला करने के प्रयासों के तहत विरोधी मतों और विचारों वाले व्यक्तियों और गुटों को एक मंच पर लाकर उनके साथ परंपरागत और डिजिटल मंचों पर काम करना होगा. साथ ही तमाम मीडिया मंचों पर अपने विचार रखने के लिए दिशा-निर्देश लागू करने होंगे.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का कहना था कि एक तरफ़ तो डिजिटल टैक्नोलॉजी ने नफ़रत भरी भाषा और विचारों को मंच प्रदान किया है लेकिन ये भी सच है कि यही डिजिटल टैक्नोलॉजी नफ़रत भरे विचारों, भाषा और गतिविधियों पर नज़र रखने में मददगार साबित हो सकती है. साथ ही, नफ़रत का मुक़ाबला करने के लिए एकजुट प्रयासों के लिए शांतिप्रिय लोगों को इकट्ठा करने में मददगार साबित हो सकती है. इसी तरह के प्रस्ताव डिजिटल सहयोग के लिए उच्च स्तरीय पैनल (High-Level Panel on Digital Cooperation) ने हाल ही में जारी अपनी रिपोर्ट में पेश किए हैं.  

नफ़रत भरी भाषा व विचारों का मुक़ाबला करने के प्रयासों में ये भी नहीं भूलना चाहिए कि कहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता यानी अपने विचार व्यक्त करने की आज़ादी को ना दबा दिया जाए. इसके बदले ऐसे विचारों को रोकना होगा जिनसे ख़तरनाक हालात पैदा होने का डर हो, विशेष रूप से किसी भी तरह के भेदभाव को बढ़ावा मिले, और हिंसा या लड़ाई-झगड़ों का माहौल बने.

महासचिव ने सभी का आहवान करते हुए कहा कि हेट स्पीच को भी उसी तरह से एक सामाजिक और मानवीय बुराई समझें जैसे किसी अन्य असामाजिक गतिविधि को समझा और उससे निपटा जाता है. नफ़रत भरी भाषा और विचारों की बिना शर्त निंदा करें, उसे बढ़ावा ना मिलने दें और उसका मुक़ाबला तथ्यों के आधार पर करें, साथ ही नफ़रत भरे विचार रखने वालों को अपना बर्ताव बदलने के लिए प्रोत्साहित करें.

नफ़रत का मुक़ाबला करने के लिए मंच

नरसंहार रोकथाम के लिए विशेष दूत एडमा डिएंग ने कहा है, “कि नफ़रत भरी भाषा और विचार अब ऐसा संकट बन चुके हैं जिनसे कोई देश बचा नहीं है.” एडमा डिएंग भी संयुक्त राष्ट्र की रणनीति और कार्य योजना शुरू किए जाने के अवसर पर मौजूद थे.

उनका कहना था कि मानवाधिकारों के तमाम अंतरराष्ट्रीय मानकों और सिद्धांतों की संरक्षा, सुरक्षा और उन्हें लागू करने के संयुक्त राष्ट्र के लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धताओं की ही तरह ये नई रणनीति और कार्य योजना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों का आहवान नहीं करती है.

इसके उलट ये रणनीति और कार्य योजना नफ़रत भरी भाषा और विचारों के शुरू होने से लेकर उनके समाजों पर असर तक के दौर से निपटने के लिए एक सदभावनापूर्ण रवैया अपनाती है.

एडमा डिएंग का कहना था, “हेट स्पीच का विकल्प या जबाव पेश करने के लिए सकारात्मक और वैकल्पिक नज़रिया पेश करती है.”

उन्होंने भरोसा व्यक्त करते हुए कहा कि ये रणनीति और कार्य योजना लागू करने से बेशक नफ़रत का मुक़ाबला हर स्तर पर करने में ठोस कामयाबी जल्दी ही मिलेगी.

 

 

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