यमन में माताओं और शिशुओं के लिए स्वास्थ्य सेवाएं ढहने के कगार पर

ग़रीबी के चलते अब घर पर ही बच्चों को जन्म दे रही हैं महिलाएं.
UNICEF/Fuad
ग़रीबी के चलते अब घर पर ही बच्चों को जन्म दे रही हैं महिलाएं.

यमन में माताओं और शिशुओं के लिए स्वास्थ्य सेवाएं ढहने के कगार पर

स्वास्थ्य

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) का कहना है कि यमन में चार साल से जारी हिंसा के चलते माताओं और शिशुओं के लिए स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त होने के कगार पर हैं. एक रिपोर्ट में यूनीसेफ़ ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में प्रसव के दौरान और बच्चों के लालन-पोषण में आने वाली मुश्किलों को रेखांकित किया है.

यूनीसेफ़ के मुताबिक़ गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं की वजह से हर दो घंटे में एक महिला और छह नवजात शिशुओं की मौत होती है. सालों से हो रही भीषण हिंसा के कारण देश में ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है और सिर्फ़ 30 फ़ीसदी मामलों में ही बच्चों का जन्म सामान्य रूप से स्वास्थ्य केंद्रों पर हो रहा है.

'यमन: पेरेंटिंग इन ए वॉर ज़ोन' रिपोर्ट में इन भयावह आंकड़ों के सामने आने के बाद यूनीसेफ़ प्रमुख ने चिंता जताते हुए कहा है कि यमन में नई जिंदगी को जन्म देना पूरे परिवार के लिए एक त्रासदी में तब्दील हो सकता है.

सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच हिंसा की आग में झुलसने से पहले ही यमन मध्य पूर्व के सबसे ग़रीब देशों में था. लेकिन 2015 में लड़ाई शुरू होने के बाद मातृ मृत्यु दर तेज़ी से बढ़ी है और हर दिन होने वाली ऐसी मौतों का आंकड़ा पांच से बढ़कर 12 पर पहुंच गया है.

यूएन एजेंसी प्रमुख हेनरीएटा फ़ोर ने कहा कि दशकों से धीमा विकास होने और सालों से चली आ रही लड़ाई की वजह से ज़रूरी सेवाएं ढहने के कगार पर पहुंच गई हैं.

यमन में करीब आधे स्वास्थ्य केंद्र ही पूरी तरह से काम कर रहे हैं.
UNICEF/Fuad
यमन में करीब आधे स्वास्थ्य केंद्र ही पूरी तरह से काम कर रहे हैं.

 

देश में माताओं और शिशुओं को ख़ास तौर पर जोखिम बना हुआ है. हर 37 में से एक नवजात शिशु की जन्म के बाद पहले महीने में ही मौत हो रही है और हर 260 में से एक महिला की गर्भावस्था और बच्चों को जन्म देते समय मौत हो जाती है.

यूएन एजेंसी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ़ आधे ही पूरी तरह से काम कर रहे हैं और वहां भी दवाईयों, औज़ारों और कर्मचारियों की कमी है जिससे ज़िंदगियां ख़तरे में हैं. गर्भावस्था और प्रसव के दौरान पेश आ रही चुनौतियों के अलावा हैज़ा और भुखमरी की चुनौती भी सिर उठाती रही है.

सना, ताइज़ और अदन में स्वास्थ्य सेवाओं पर एक अध्ययन के दौरान महिलाओं से बात की गई जिसमें सामने आया कि ज़्यादातर महिलाएं अब घर पर ही बच्चों को जन्म दे रही हैं.

संघर्ष और हिंसा के चलते परिवार दिनोंदिन ग़रीब हो रहे हैं और इस वजह से स्वास्थ्य केंद्रों का रुख़ तभी किया जाता है जब प्रसव के दौरान कोई जटिलता सामने आए.

यूएन एजेंसी ने हिंसा में शामिल सभी पक्षों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ग़रीबों, वंचितओं और आंतरिक रूप से विस्थापितो के लिए संसाधन जुटाने का आग्रह किया है. साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए देश में स्वास्थ्य प्रणाली को बचाने की अपील की गई है.