अस्पताल की अंधेरी दुनिया में सूरज की रौशनी

13 जून 2019

अब्राहम लियर ने दक्षिणी सूडान के जोंगलेई राज्य में स्थित एक मात्र सक्रिय स्वास्त्य केंद्र - बोर अस्पताल में काफ़ी लंबे समय से काम किया है और उन्होंने वहाँ बहुत सी घुप्प अंधेरी रातें देखी हैं, मगर अब रौशनी की किरणों ने अस्पताल की अंधेरी रातों को जगमगा दिया है.

ये उजाला संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षकों में एक भारतीय बटालियन के प्रयासों की बदौलत संभव हो सका है. 

अंधेरी रातों में अस्पताल में मरीज़ों की देखभाल करना और सामान्य कामकाज करना बहुत मुश्किल था.

अब्राहम लियर कहते हैं, “मरीज़ों के कमरों और अन्य इलाक़ों के बीच अंधेरे में आवागमन बहुत ख़तरनाक था. ख़ासतौर से आपात स्थितियों में तो ऐसा वातावरण होता था जैसे कि अंधेरे में सुइयों को तलाश करना हो.”

अब्राहम लियर बोर अस्पताल के बाहर खड़े होकर जब ये अनुभव बयान करते हैं तो ये भी ध्यान में रखने की बात है कि बोर इलाक़े में ये सरकारी अस्पताल एक मात्र स्वास्थ्य केंद्र है जहाँ लोगों को चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध है.

बोर इलाक़ा दक्षिणी सूडान के जोंगलेई राज्य में है.

इसलिए जब जोंगलेई की स्वास्थ्य मंत्री ने इस अस्पताल में जब रौशनी के बल्बों का बटन दबाकर उजाला बिखेरा तो अब्राहम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी अपनी प्रसन्नता और उत्साह को छुपा नहीं सके.

अस्पताल में उजाला फैलने से गदगद अब्राहम ने अपनी प्रसन्नता कुछ इन शब्दों में बयान की, “अभी तक जिस अंधेरे ने हमारे काम में रोड़े अटकाए, आज वहाँ रौशनी ने अपनी जगह बना ली.”

ये परिवर्तन दक्षिणी सूडान में संयुक्त राष्ट्र के मिशन सक्रिय भारतीय बटालियन के प्रयासों की बदौलत संभव हो सका है. इस बटालियन ने 16 ऐसे विशाल सौर ऊर्जा पैनल स्थापित किए हैं जिनसे अस्पताल को रौशनी मिलना संभव हो सका है.

अभी तक अस्पताल के भीतर और बाहर जो घुप्प अंधेरा रहता था और जिसने स्वास्थ्यकर्मियों का काम बहुत मुश्किल बना रखा था, अब तमाम कर्मचारियों को उससे छुटकारा मिल गया है.

जोंगलेई राज्य की स्वास्थ्य मंत्री अमूर पैक का कहना था, “अब बोर अस्पताल के भीतर और बाहर उजाला होगा जिसमें स्वास्थ्यकर्मी अपना काम आसानी और ज़्यादा कुशलता के साथ कर सकेंगे जो मरीज़ों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है. स्वभाविक रूप से मरीज़ों को भी ज़्यादा फ़ायदा होगा.”

स्वास्थ्य मंत्री का कहना था कि जब रात में कोई आपात स्थिति पैदा होती थी या किसी मरीज़ को आपात चिकित्सा की ज़रूरत होती थी तो ऐसे में अब ये रौशनी के लैंप जीवनदायी उपकरण के रूप में काम करेंगे.

साथ ही उन्होंने ध्यान दिलाया कि 2013 में हुए युद्ध के दौरान अस्पताल में विभिन्न स्थानों पर लगे रौशनी लैंप व अन्य उपकरण तोड़-फोड़ दिए गए थे जिससे वहाँ उजाले की सख़्त ज़रूरत थी.

इस सौर ऊर्जा परियोजना में जो लैंप लगाए गए हैं, उनके लिए धन भारतीय बटालियन के निजी योगदान की बदौलत संभव हो सका है.

ये रौशनी लैंप मुख्य रूप से आपात स्थिति वार्ड, अन्य सघन चिकित्सा वार्डों, जच्चा-बच्चा की देखभाल वाले बार्डों और चिकिस्ता सामग्री वाले इलाक़ों में लगाए गए हैं.

ध्यान दिला दें कि दक्षिणी सूडान में नेशनल ग्रिड पूरे देश के 1 फ़ीसदी से भी कम हिस्से को बिजली उपलब्ध करा पाता है.

अब्राहम लियर का प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहना था, “मैं ये देखकर बहुत ख़ुश हूँ कि आज अस्पताल के बाहरी इलाक़े में भी रौशनी फैली हुई है. इससे हमारा काम ज़्यादा सुरक्षित और लाभकारी होता है. इस रौशनी की वजह से अब अस्पताल के आसपास आपराधिक गतिविधियाँ चलाने वाले असामाजिक तत्वों को रोकने में भी मदद मिलेगी.”

पास ही में ख़ड़ी एक महिला ने भी संतुष्टि के अंदाज़ में कहा कि अब उन गर्भवती महिलाओं को भी आसानी से अस्पताल लाया जा सकता है जिन्हें रात में ही चिकित्सा देखभाल की ज़रूरत पड़ती है. साथ ही अब महिलाओं को किसी हमले या लूटपाट का डर नहीं रहेगा.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड