श्रीलंका में बम धमाकों के बाद शरणार्थियों में भय का माहौल

31 मई 2019

‘ईस्टर सन्डे’ पर सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद श्रीलंका में रह रहे शरणार्थियों और शरण की तलाश कर रहे लोगों की सुरक्षा के प्रति चिंताए बनी हुई हैं. बदले की भावना से प्रेरित हमलों के डर से करीब एक हज़ार लोगों ने मस्जिदों और पुलिस स्टेशनों में शरण ली हुई है.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के मुताबिक़ इनमें अधिकतर लोग पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से हैं जिन्होंने पिछले एक महीने से भी ज़्यादा समय से कोलंबो के पास नेगोम्बो और पसयाला में सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रखी है.

श्रीलंका में अधिकांश शरणार्थी राहत शिविरों के बजाए किराए के मकानों में रहते हैं. 21 अप्रैल को होटलों और चर्चों को निशाना बनाकर किए गए बम हमलों में 250 लोगों के मारे जाने और 400 से ज़्यादा के घायल होने के बाद शरणार्थियों की मुश्किलें शुरू हो गईं.

कई स्थानों पर गुस्साई भीड़ ने मुस्लिम शरणार्थियों पर हमलों में शामिल होने के आरोप लगाए और उन्हें घर छोड़कर जाने को मजबूर कर दिया. कुछ मामलों में मकान मालिकों और स्थानीय लोगों ने शरणार्थियों की मदद का प्रयास किया लेकिन दबाव के चलते उन्हें पीछे हटना पड़ा.

इस आपात स्थिति से निपटने के लिए यूएन शरणार्थी एजेंसी ने श्रीलंका में कर्मचारियों की संख्या को बढ़ाया है. यूएन एजेंसी स्थानीय प्रशासन और साझेदार संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है और शरणार्थियों को भोजन, दवाई और पानी के अलावा अन्य बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने में मदद कर रही हैं.

 

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