'करदाताओं के धन का इस्तेमाल तबाही के लिए न हो'

28 मई 2019

ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में पर्यावरण संगठन ‘आर-20 कोएलिशन’ द्वारा आयोजित शिखर वार्ता को संबोधित करते हुए यूएन महासचिव अंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि आज ज़रूरत लोगों के बजाए प्रदूषण पर टैक्स लगाने की है. साथ ही उन्होंने जलवायु कार्रवाई के तहत जीवाश्म ईंधनों पर दी जाने वाली सब्सिडी को भी रोके जाने का आग्रह किया है. 

आर-20 कोएलिशन – रीज़न्स ऑफ़ क्लाइमेट एक्शन’ की स्थापना अमेरिका में कैलिफ़ोर्निया प्रांत के पूर्व गवर्नर ऑर्नोल्ड श्वार्ज़ेनेगर ने की है और यह संगठन जलवायु कार्रवाई और टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर केंद्रित है.

शिखर वार्ता को संबोधित करते हुए यूएन प्रमुख ने कहा कि जीवाश्म ईंधनों पर सब्सिडी के ज़रिए लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की सोच ही ग़लत है. उनके मुताबिक़ इससे टैक्स देने वाले लोगों का पैसा चक्रवाती तूफ़ानों में और तेज़ी लाने, सूखा फैलाने, ग्लेशियर पिघलाने, मूंगा चट्टानों को क्षति पहुंचाने में ख़र्च होता है जिससे दुनिया ही तबाह हो रही है.

उन्होंने शहरों में बुनियादी ढांचे को तैयार करते समय कार्बन के इस्तेमाल को न करने, कोयला आधारित संयंत्रों के निर्माण को रोकने और टिकाऊ उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने की अपील करते हुए हरित अर्थव्यवस्था की ज़रूरत पर बल दिया.

सितंबर में न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर वार्ता से पहले महासचिव गुटेरेश ने फ़्रांस के राष्ट्रपति, जमैका के प्रधानमंत्री और क़तर के अमीर को जलवायु कार्रवाई के लिए 100 अरब डॉलर एकत्र करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की ज़िम्मेदारी दी है.

इस धनराशि का लक्ष्य यूएन सदस्य देशों ने 2015 में पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान तय किया था जिसके ज़रिए कार्बन उत्सर्जन घटाने और विकासशील देशों में जलवायु अनुकूलन प्रयासों को बढ़ावा दिया जाएगा.

जिन कदमों से प्रदूषण को प्रोत्साहन मिलता है उन्हें बढ़ावा दिया जाना रोकना होगा, हरित प्रयासों और कम मात्रा में कार्बन का इस्तेमाल करने वाले समाधानों को बढ़ाना होगा. इस संबंध में निजी सेक्टरों और निवेशक समुदायों को महत्वाकांक्षी जलवायु एजेंडा को समर्थन देना होगा. यूएन प्रमुख ने याद दिलाया कि जलवायु कार्रवाई लोगों के हित में है और व्यवसायों के लिए भी यह लाभकारी हो सकती है.

UNIS Vienna/Nikoleta Haffar
शिखर वार्ता को संबोधित करती यूवा कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग.

हाल ही में लघु द्वीपीय देश तुवालु से लौटे यूएन महासचिव ने अपने अनुभव को साझा करते हुए याद दिलाया कि समुद्र के बढ़ते जल स्तर के चलते ऐसे देशों पर अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने दुख जताया कि शायद ही कोई ऐसा दिन होगा जब बाढ़, सूखे, जंगल में आग और तूफ़ानों की ख़बरें न मिलती हों.

लेकिन संकट के गहराते बादलों में उन्होंने हरित अर्थव्यवस्था से मिल रही उम्मीद की उस उजली किरण का भी ज़िक्र किया जिसके ज़रिए स्वच्छ हवा और पानी, प्रदूषण में कटौती, रसायन से मुक्त खेती और जैवविविधता के घटने को रोकना संभव हो सकेगा.

दीर्घकालीन उद्देश्यों के लिए शुरू की गई ‘आर-20 ऑस्ट्रियन वर्ल्ड समिट’ एक ऐसी पहल है जिसके ज़रिए क्षेत्रों, देशों और शहरों को टिकाऊ विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद दी जाती है. साथ ही पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में जिन उद्देश्यों का उल्लेख है उनके अनुरूप जलवायु परिवर्तन को रोके जाने का प्रयास है. आर-20 शिखर वार्ता के आयोजकों का लक्ष्य इस बैठक को जलवायु कार्रवाई और समाधानों के नज़रिए से यूरोप में एक अहम स्थान दिलाना है.

शिखर वार्ता में स्वीडन की कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग ने भी हिस्सा लिया जिन्होंने पिछले साल नवंबर में 15 साल की उम्र में जलवायु आंदोलन के रूप में स्कूलों में हड़ताल की पहल की थी.

ग्रेटा थुनबर्ग ने कहा कि लाखों बच्चों की बातों को सुना तो जा रहा है लेकिन वे नेता, कंपनियों के सीईओ या मशहूर हस्तियां  नहीं हैं. “लोग आपको सुनते हैं और आपसे प्रभावित होते हैं. आप पर भारी ज़िम्मेदारी है, एक ऐसी ज़िम्मेदारी जिसका निर्वहन करने में आप में से अधिकतर विफल रहे हैं.”

युवा कार्यकर्ता ने ध्यान दिलाया कि जलवायु परिवर्तन भले ही हरित विकास के अवसरों को पैदा कर रही हो, यह असल में एक आपात स्थिति है – एक ऐसी विकराल संकट जिसका अब तक मानवता ने सामना नहीं किया है.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड