भारत में वन्यजीव अपराधों की संख्या बढ़ी

22 मई 2019

वन्यजीवों की अवैध तस्करी से दुनिया भर में जीवों की कई प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही हैं. जानवरों को पालतू बनाने की प्रवृत्ति और उनके चिकित्सकीय गुणों के कारण भारत में भी वन्यजीवों की तस्करी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और आसानी से पैसा कमाने के लालच में युवा भी इस काम में शामिल हो रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण वन्यजीव अभियान की समन्वयक लीसा रोल्स का कहना है कि जानकारी के अभाव, लालच, कम जोखिम और अधिक पैसे कमाने के मौके के चलते वन्यजीव अपराधों को बढ़ावा मिल रहा है. इस मामले में भारत एक बड़ा हॉटस्पॉट बन कर उभर रहा है.

इस साल फरवरी में तमिलनाडु के चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम अधिकारियों ने देखा कि बैंकॉक से आने वाले एक यात्री के सामान से कुछ आवाज़ें आ रही हैं. उसके बैग में एक टोकरी थी जिसमें तेंदुए का छोटा बच्चा था.

चेन्नई के कस्टम अधिकारी सालों से देश में तस्करी करके लाए जाने वाले स्टार कछुओं, सी कुकुम्बर्स और पेंगोलिन की चमड़ी को ज़ब्त कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि विदेशी वन्य प्रजातियों की तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं. लेकिन इन जानवरों को भारत में तस्करी करके कहां ले जाया जा रहा है, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है.

वन्य जीवों की अवैध तस्करी के कारण विश्व में अनेक प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर हैं. भारत में यह व्यापार तेज़ी से फल-फूल रहा है जो दुर्लभ प्रजातियों की बढ़ती मांग से प्रेरित है.

इसका कारण जानवरों को पालतू बनाने की प्रवृत्ति है, साथ ही उनका चिकित्सकीय उपयोग भी. इसका मुख्य बाज़ार चीन और दक्षिण पूर्वी एशिया है लेकिन जीवित वन्य जीवों या उनके शरीर के अंगों की तस्करी खाड़ी देशों, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में भी की जाती है. भारत के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार के ज़रिए तस्करी की जाती है.

बाघ और तेंदुए की खाल, उनकी हड्डियां और शरीर के अन्य अंग, गैंडे के सींग, हाथी दांत, कछुए, समुद्री घोड़े, सांप का विष, नेवले के बाल, सांप की खाल, सी कुकुम्बर, चीरू का ऊन, कस्तूरी मृग की कस्तूरी, भालू का पित्त, औषधीय पौधे, लाल चंदन की लकड़ी और पिंजरे में रखे जाने वाले पक्षी जैसे पैराकीट, मैना और मुनिया की तस्करी हो रही है.

अधिकतर लोगों को जानकारी नहीं है कि ये अमूल्य प्रजातियां भारत में मौजूद हैं। लेकिन ऐसी प्रजातियां तेजी से लुप्त हो रही हैं. भारत में सिर्फ़ 25 चीरू ही अब बचे हैं.

सबसे अधिक तस्करी पेंगोलिन, समुद्री घोड़ों और कछुओं की जाती है:

  • 2018 में ट्रैफिक इंडिया ने एक अध्ययन जारी किया जिसमें कहा गया था कि 2009 से 2017 तक भारत से कम से कम 5,772 पैंगोलिन को अवैध व्यापार के लिए पकड़ा गया
  • पेटागोनियन समुद्री घोड़ा (हिप्पोकैम्पस पेटागोनिकस) उन तीन समुद्री घोड़ों में से एक है जिसे उसके औषधीय गुणों के कारण तस्करी का शिकार बनाया जाता है
  • भारतीय स्टार कछुए की तस्करी विश्व स्तर पर अब सबसे अधिक की जाती है. पालतू पशु के तौर पर इसकी सबसे अधिक मांग है

भारत में वन्यजीव व्यापार को विनियमित और प्रतिबंधित करने के लिए मज़बूत क़ानूनी और नीतिगत संरचना है लेकिन जल्द कमाई के लालच ने बेरोज़गार युवाओं को कुरियर की तरह काम करने के लिए आकर्षित किया है. इसके चलते वे इस अवैध व्यापार में शामिल हो रहे हैं.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड