सीरिया के इदलिब प्रांत में टकराव बढ़ने के 'विनाशकारी नतीजे' होंगे

17 मई 2019

संयुक्त राष्ट्र में राजनीतिक और मानवीय मामलों के प्रमुखों ने सुरक्षा परिषद से सीरिया के इदलिब प्रांत के आसपास जारी हिंसा को तत्काल रोके जाने की अपील की है. उन्होंने आगाह किया कि टकराव बढ़ने के विनाशकारी परिणाम होंगे इसलिए सीरियाई जनता के लिए राजनीतिक समाधान तलाशे जाने के प्रयास होने चाहिए.

राजनीतिक और शांतिनिर्माण मामलों की यूएन प्रमुख रोज़मैरी डिकार्लो ने सदस्य देशों को बताया कि “हम पहले भी यहां आ चुके हैं: अलेप्पो, पूर्वी घोटा और राक़ा में” जहां सीरियाई सुरक्षा बलों की ज़बरदस्त कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में आम लोग  हताहत हुए.

“अगर टकराव जारी रहता है और कार्रवाई आगे बढ़ती है तो मानवीय दृष्टि से इसके विनाशकारी परिणाम होंगे और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को ख़तरा पैदा होगा.”

इदलिब और आसपास के इलाक़ों में जारी हिंसा में अब तक 100 लोगों की मौत हुई है और डेढ़ लाख से ज़्यादा लोगो को विस्थापित होने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

इदलिब के एक बड़े हिस्से पर आतंकी संगठन हयात तहरीर अल-शम का नियंत्रण है. यूएन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय मानता है कि इलाक़े में आतंकी गुट की मौजूदगी पर कदम उठाए जाने चाहिए. लेकिन तीस लाख आम लोग वहां रह रहे हैं और आतंकवाद से लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

उन्होंने सुझाव दिया कि संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के फलस्वरूप जो राजनीतिक रास्ता निकला था उसे फिर से शुरू किए जाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि अगर सुरक्षा परिषद साथ मिलकर रूस और तुर्की के संघर्षविराम के संकल्प को समर्थन दे सके तो फिर पुराने प्रस्तावों के तहत राष्ट्रव्यापी संघर्षविराम कायम करने की सहमति बनाई जा सकती है.

“आइए पहला कदम उठाने के लिए हम एकजुट हों – ग्रेटर इदलिब में हिंसा और टकराव को टालने के लिए और राजनीतिक समाधान निकालने की दिशा में काम करने के लिए जिससे सीरियाई जनता की आकांक्षाए पूरी की जा सकें.”

संयुक्त राष्ट्र आपात राहत प्रमुख मार्क लोकॉक ने बताया कि यूएन महासचिव की चेतावनियों के बावजूद सीरियाई सरकार ने इदलिब में सैन्य कार्रवाई को तेज़ करने का निर्णय लिया है जिससे ख़तरनाक नतीजों की आशंका सही साबित होती दिख रही है.

उन्होंने सदस्य देशों को ध्यान दिलाया कि बंदूकधारियों और हिंसा में शामिल लोगों की संख्या से कहीं ज़्यादा मासूम लोग वहां हैं और 80 हज़ार से ज़्यादा लोग वहां फंसे हैं और खुले स्थान पर पेड़ों के नीचे शरण लेने को मजबूर हैं.

घरेलू विस्थापितों के तीन कैंपों पर अब तक हमले हो चुके हैं जिसमें कई लोगों की मौत हुई है. 17 स्कूल ध्वस्त हैं और चार लाख से ज़्यादा छात्र परीक्षाएं देने से वंचित हैं. यूएन आपात राहत प्रमुख ने कहा कि अगर बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई होती है तो फिर हालात विकराल रूप धारण कर लेंगे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पुष्टि की है कि पिछले तीन हफ़्तों में 18 केंद्रों पर 20 हमले हो चुके हैं.  

 

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