यमन में हिंसा का दंश झेल रहे हैं बच्चे

15 मई 2019

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख हेनरिएटा फ़ोर ने कहा है कि यमन में विकट परिस्थितियों में फंसे डेढ़ करोड़ से ज़्यादा बच्चे जीवन बचाने की गुहार लगा रहे हैं. सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य देशों को संबोधित करते हुए उन्होंने चार साल से चली आ रही लड़ाई को समाप्त करने के लिए ठोस प्रयासों की अपील की है.

यमन में जारी हिंसा में अब तक 7,300 बच्चों की या तो मौत हुई है या फिर वे घायल हुए हैं. यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि “इन संख्याओं की पुष्टि हो चुकी है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि वास्तविक संख्या इससे ज़्यादा है.”

यूनिसेफ़ प्रमुख ने अपने संबोधन के दौरान बच्चों पर मंडराते संकट का ज़िक्र करते हुए बताया कि सना में स्कूल बमबारी की चपेट में आ रहे हैं, एक ऐसे ही हमले में पिछले महीने 14 बच्चों की मौत हो गई. “किसी भी संघर्ष में पहले बच्चे ही पीड़ित होते हैं, और सबसे बुरे ढंग से.”

यमन में सरकारी सुरक्षा बल देश पर नियंत्रण हासिल करने के लिए हूती लड़ाकों से ल़ड़ाई कर रहा है जिसका ख़ामियाज़ा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है.

साढ़े तीन लाख से ज़्यादा बच्चे अत्यधिक कुपोषण से पीड़ित हैं. पांच साल से कम उम्र के आधे यमनी बच्चों – 25 लाख – का सही विकास नहीं हुआ है. बीस लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं: “संक्षेप में, जिस प्रणाली की हर बच्चे और परिवार को आवश्यकता है वह विफल हो रही है.”

“हम एक बेहद संवेदनशनील मुक़ाम पर पहुंच गए हैं. अगर युद्ध कुछ और समय जारी रहता है तो देश एक ऐसे बिंदु पर पहुंच जाएगा जहां से वापसी संभव नहीं है...हम कब तक यमन को गुमनामी में जाते हुए देख सकते हैं?”

यूनिसेफ़ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि राहत टीमें हर समय काम में जुटी है और पिछले साल लगभग साढ़े तीन लाख बुरी तरह कुपोषण का शिकार बच्चों का इलाज किया गया. पचास लाख लोगों तक पीने का साफ़ पानी पहुंचाया जा रहा है और साझेदार संगठनों के साथ मिलकर 90 लाख ज़रूरतमंदों को नकद सहायता भी दी गई है.

“लेकिन इस काम से यमन में तबाही के सिर्फ़ लक्षणों का ही इलाज हो रहा है. यमन और वहां बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए हमें आपका साथ और मदद चाहिए ताकि इस युद्ध को रोका जा सके. अभी.”

UN Photo/Manuel Elias
यमन में स्थिति से सुरक्षा परिषद को अवगत कराते विशेष दूत मार्क लोकॉक.

राजनीतिक समाधान तलाशने की दिशा में संयुक्त राष्ट्र विशेष दूत की ओर से जो प्रयास हो रहे हैं उनके लिए दोगुना समर्थन दिए जाने की अपील भी की गई है.

बैठक की शुरुआत में परिषद को संबोधित करते हुए विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने हुदायदाह समझौते को समर्थन के लिए यूएन मिशन प्रमुख को बधाई दी. हाल के दिनों में यूएन मिशन को स्टॉकहोम शांति समझौते के अनुरूप प्रगति हासिल करने में सफलता मिली है.

इसके बाद हुती विद्रोहियों ने सहमति के अनुरूप हुदायदाह में लाग सागर के तीन मुख्य बंदरगाहों से लड़ाकों को हटा लिया है. इन्हीं बंदरगाहों से होकर यमन में अधिकांश मानवीय राहत और अन्य सामग्री को पहुंचाया जाता है.

“हमने यह कभी नहीं सोचा कि इस सहमति को अमल में लाना आसान होगा. लेकिन पक्षों और गठबंधन के निरंतर संकल्प, सुरक्षा परिषद के त्वरित और निर्णायक समर्थन और यूएन मिशन के नेतृत्व में हमने देखा है कि हुदायदाह समझौते के अमलीकरण की दिशा में पहला ठोस कदम लिया गया है. ”

उन्होंने कहा कि पूर्ण राजनीतिक वार्ता के शुरू होने के बाद ही यमन में व्यापक समाधान को लाया जा सकता है. “इस बातचीत के लिए संयम, अच्छा भाव और कुछ रियायत की ज़रूरत होगी.”

संयुक्त राष्ट्र आपात राहत समन्वयक मार्क लोकॉक ने सदस्य देशों को बताया कि एक करोड़ से ज़्यादा लोग अब भी भोजन सामग्री पर निर्भर हैं और अकाल का ख़तरा मंडरा रहा है. हैज़े से इस साल अब तक तीन लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हो चुके हैं जबकि 2018 में 3.7 लाख लोग ही पीड़ित थे.

लड़ाई के चलते राहत अभियानों पर असर पड़ा है और मानवीय राहत के काम में जुटे लोगों को छोटी सड़कों, चढ़ाई वाले रास्तों और कई बार असुरक्षित इलाक़ों से होकर जाना पड़ रहा है जहां कई चेकप्वाइंट का सामना करना पड़ता है. राहत कार्य में आई बाधा से 9 लाख आम लोग प्रभावित हुए हैं.

राहत सामग्री पहुंचाने के काम में आ रही मुश्किलों, लगातार हो रही लड़ाई और अन्य चुनौतियों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र राहत अभियान ने ज़रूरतंमदों की सहायता का काम जारी रखा है.

इस साल मार्च में विश्व खाद्य कार्यक्रम ने एक करोड़ से ज़्यादा लोगों तक भोजन सामग्री पहुंचाई जो पहले किसी भी महीने से कहीं बड़ी संख्या है. अप्रैल में हैज़ा टीकाकरण अभियान के तहत सना में 11 लाख बच्चों को टीके लगाए गए.

राहत समन्वयक लोकॉक ने कहा कि पहला लक्ष्य लोगों को जीवित रखना है और उससे आगे बढ़कर निरंतर प्रयासों के ज़रिए अन्य मामलों में भी सकारात्मक नतीजे देखने को मिल रहे हैं. एक साल पहले 107 ज़िलों पर अकाल का ख़तरा मंडरा रहा था लेकिन आज खाद्य और पोषण की स्थिति आधे से अधिक ज़िलों में सुधर गई है. 20 फ़ीसदी ज़िलों में तो ख़तरा बिलकुल ख़त्म हो गया है.

लेकिन जिनिवा सम्मेलन में मदद के वायदों के अनुरूप धनराशि उपलब्ध कराने की अपील की गई है. “मैं अगले सप्ताह सऊदी और अमीरात के अधिकारियों से मिलने के लिए रियाद जा रहा हूं ताकि जिनिवा में एक अरब डॉलर की जो संयुक्त रूप से प्रतिज्ञा ली गई थी उसके लिए इंतज़ाम पूरे किए जा सकें.”

 

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