ग़ाज़ा की नाकाबंदी से राहत सामग्री पर निर्भरता दस गुना बढ़ी

13 मई 2019

दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के लिए पवित्र रमज़ान के महीने के दौरान ग़ाज़ा में आधे से ज़्यादा संख्या ऐसे लोगों की है जो भोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर हैं. फ़लीस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) का कहना है कि नाकाबंदी के बाद से भोजन सामग्री पर निर्भरता में लगभग दस गुना बढ़ोत्तरी देखने को मिली है.

राहत एवं कार्य एजेंसी के अनुसार जून महीने तक उसे छह करोड़ डॉलर की अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होगी ताकि दस लाख फ़लस्तीनी शरणार्थियों को ग़ाज़ा में भोजन पहुंचाने का काम जारी रखा जा सके. इनमें बड़ी संख्या में ऐसे शरणार्थी शामिल हैं जो प्रतिदिन महज़ 1.6 डॉलर पर गुज़ारा करने को मजबूर हैं और भोजन के लिए मदद पर निर्भर हैं.

यूएन एजेंसी की फ़ंडिंग पूरी तरह स्वैच्छिक योगदानों और वित्तीय सहायता के ज़रिए होती है लेकिन बढ़ती ज़रूरतों के मुताबिक़ उसमें बढ़ोत्तरी नहीं हुई है.

साल 2000 में ग़ाज़ा में रह रहे 80 हज़ार फ़लस्तीनी शरणार्थियों को सामाजिक मदद मिल रही थी लेकिन अब यह संख्या बढ़कर दस लाख से ज़्यादा हो चुकी है. बड़ी संख्या में लोगों को तत्काल भोजन सामग्री संबंधी राहत की आवश्यकता भी है.

ग़ाज़ा में यूएन एजेंसी में निदेशक माथियास श्माल ने बताया कि “दस गुना वृद्धि नाकाबंदी की वजह से हुई है जिससे ग़ाज़ा बंद हो गया, स्थानीय अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा, एक के बाद एक हिंसक संघर्ष हुए जिससे रिहायशी इलाक़ों और सार्वजनिक ढांचा बर्बाद हुआ. और फ़लस्तीन में 2007 में शुरू हुए अंदरूनी राजनीतिक संकट की वजह से भी जो ग़ाज़ा में हमास के सत्ता में आने के बाद से शुरू हुआ.”

पंजीकृत शरणार्थियों की संख्या लगातार बढ़ने से यूएन एजेंसी को सेवाओं की बढ़ती मांग का भी सामना करना पड़ रहा है.

2017 में एक यूएन रिपोर्ट ने अंदेशा जताया था कि 2020 तक ग़ाज़ा रहने लायक नहीं रहेगा.

चुनौतीपूर्ण है भविष्य का रास्ता

ग़ाज़ा में फ़िलहान 53 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग बेरोज़गार हैं और दस लाख यूएन एजेंसी से राहत सामग्री पर और बाहर के देशों में रह रहे परिजनों से मिलने वाले पैसों पर निर्भर हैं. आशंका जताई गई है कि ग़ाज़ा में व्यवस्था ध्वस्त होने से बस इन्हीं वजहों से बची हुई है.

“मेरे यहां डेढ़ साल के दौरान पहली बार मुझे से तीन लोगों ने बताया कि नशीली दवाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है, आत्महत्या की कोशिशों और वेश्यावृत्ति के मामले भी बढ़ रहे हैं और यह जगह सामाजिक, सामाजिक-अर्थव्यवस्था के नज़रिए से तबाह हो रही है और इसे देखा जा सकता है. ऐसी पृष्ठभूमि में स्थिति का और तेज़ी से बिगड़ना किसी भी समय हो सकता है.”

ग़ाज़ा में रह रहे 19 लाख लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा अधिकारों और सम्मान की रक्षा करने के काम में जुटी यूएन एजेंसी एक अहम जीवन रेखा है. दस लाख से अधिक लोगों को भोजन संबंधी सहायता उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूरण है.

वित्तीय संसाधनों में कमी के बावजूद राहत कार्य को जारी रख कर यूएन एजेंसी एक बेहद जटिल वातावरण में स्थिरता बनाए रखने का प्रयास कर रही है. एजेंसी ने सभी सदस्य देशों को सामूहिक ढंग से कार्यक्रम के बजट में योगदान देने के अलावा आपात स्थिति के लिए वित्तीय मदद प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया है.

यूएन एजेंसी का दायित्व जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट पर फ़लस्तीनी शरणार्थियों की मदद करना है ताकि मानवीय विकास की संभावनाओं को हासिल करने में उन्हें सहारा दिया जा सके.

 

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