निकट पूर्व और उत्तर अफ़्रीका में पांच करोड़ लोग भूख से पीड़ित

8 मई 2019

भूख और हिंसा के बीच संबंध को रेखांकित करती एक नई संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के अनुसार निकट पूर्व और उत्तर अफ़्रीका के देशों में भुखमरी लगातार बढ़ रही है. ऐसा हिंसा प्रभावित और लंबे समय से संकटग्रस्त देशों में हो रहा है जिसका आने वाले कई सालों तक खाद्य सुरक्षा पर असर बने रहने की आशंका है.

भुखमरी का शिकार दो तिहाई से ज़्यादा लोग संघर्षग्रस्त देशों में रहते हैं. टिकाऊ विकास लक्ष्यों को पाने और 2030 एजेंडा को पूरा करने के प्रयासों में ये बड़ा अवरोध है बन कर उभरा है.

निकट पूर्व और उत्तर अफ़्रीका (Near East and North Africa) क्षेत्र में अल्जीरिया, बहरीन, मिस्र, इराक़, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, लीबिया, यमन, मॉरिटेनिया, मोरक्को, ओमान, क़तर, सऊदी अरब, सूडान, सीरिया, ट्यूनीशिया और संयुक्त अरब अमीरात देश आते हैं.

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (UNFAO) के सहायक महानिदेशक अब्देससलाम उल्द अहमद ने बताया कि “हिंसक संघर्षों और घरेलू अस्थिरता से प्रभावित देशों और उनके पड़ोसी देशों में खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए दीर्घकालीन ख़तरे पैदा हो रहे हैं.”

निकट पूर्व और उत्तर अफ़्रीका में खाद्य और पोषण सुरक्षा पर नज़र डालती यह रिपोर्ट दर्शाती है कि साल 2011 से 5.2 करोड़ लोग इस क्षेत्र में अल्पपोषण की समस्या से पीड़ित हैं और उन्हें ज़रूरत भर खाना नहीं मिल पाता.

“हिंसक संघर्षों के चलते कुछ देशों में भोजन और मवेशियों के उत्पादन पर असर पड़ा है जिसके परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र में खाद्य सामग्री की उपलब्धता प्रभावित हुई है.”

“बढ़ती भुखमरी के साथ साथ जनसंख्या में ज़बरदस्त वृद्धि हो रही है, प्राकृतिक संसाधनों में कमी आ रही है, जलवायु परिवर्तन का ख़तरा बढ़ रहा है, बेरोज़गारी की दर में वृद्धि हो रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा और सेवाएं कमज़ोर पड़ रही हैं.”

मोटापा भी बड़ी समस्या

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस क्षेत्र में भुखमरी की समस्या से इतर मोटापा भी एक बड़ा संकट बन कर उभर रहा है. मोटापे से पीड़ित लोगों की दर यहां सबसे ज़्यादा है जिससे स्वास्थ्य, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों और अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है.

इस चुनौती से निपटने के लिए आवश्यक है कि जनजागरूकता बढ़ाई जाए और स्वस्थ और सेहतमंद आहार तक पहुंच को सुनिश्चित किया जाए.

निकट पूर्व और उत्तर अफ़्रीका में 5.2 करोड़ लोग भूख का शिकार हैं. उनमें 3.39 करोड़ लोग संघर्षग्रस्त देशों में रहते हैं, पांच साल की उम्र वाले 21.1 फ़ीसदी बच्चे बौनेपन का शिकार हैं या उम्र के हिसाब उनकी लंबाई कम है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ इस क्षेत्र में बेरोज़गारी, विशेषकर युवाओं और महिलाओं में, एक बड़ी क्षेत्रीय चुनौती है. ग्रामीण क्षेत्रों में कुल आबादी का 40 फ़ीसदी हिस्सा रहता है लेकिन कृषि से औसत आय अन्य सेक्टरों की तुलना में बेहद कम है. ऐसे में शहरी इलाक़ों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में ग़रीबी लगभग दोगुनी है.

खाद्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए समाधान मौजूद हैं. इसके लिए किसानों की बाज़ार तक पहुंच को बढ़ाना होगा और कृषि में निवेश करना होगा. तकनीक के हस्तांतरण को संभव बनाने के साथ ही नीतियों में ज़रूरी बदलाव करने होंगे ताकि जीवन यापन के लिए कृषि से आगे बढ़कर व्यावसायिक और विविध उत्पादन प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके.

उल्द अहमद ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में ऐसे उत्पादों को उगाने की संभावना छिपी हैं जिनके लिए कम पानी और अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है. “ज़रूरत इस बात है कि क्षेत्र के किसानों को यहां उन उत्पादों के लिए प्रोत्साहित किया जाए जिन्हें यहां तुलनात्मक रूप से बेहतर ढंग से उगाया जा सकता है.”

 

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