चक्रवात 'केनेथ' से प्रभावित इलाक़ों तक राहत पहुंचाने में जुटी यूएन एजेंसियां 

30 अप्रैल 2019

उत्तरी मोजाम्बीक में आने वाले दिनों में भारी बारिश की आशंका है. इसके मद्देनजर चक्रवात 'केनेथ' से प्रभावित अधिकतर सुदूर क्षेत्रों तक पहुंच ‘मुश्किल बनी रहेगी’. मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र ने यह चेतावनी दी है. 

मानवीय मामलों के संयुक्त राष्ट्र समन्वय कार्यालय ने सूचना दी है कि तटीय शहर पेम्बा के आस-पास सुबह बारिश रुक गई और मानवीय सहायताकर्मी हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि हवाई उड़ानों के जरिए चक्रवात से गंभीर रूप से प्रभावित माटेमो द्वीप को मेडिकल आपूर्तियों सहित अन्य राहत सामग्री पहुंचाई जा सके.  
   
जिनिवा में यूएन एजेंसी के प्रवक्ता जेन्स लार्क ने पत्रकारों को बताया, ‘राहत कार्यों को स्टार्ट-स्टॉप ऑपरेशन में तब्दील करते हुए राहत कर्मी नुकसान और जरूरतों का आकलन करेंगे, चूंकि आने वाले दिनों में और अधिक बारिश की आशंका जताई जा रही है.’

मोजाम्बीक सरकार ने यह सूचना दी है कि छह हफ्तों में दक्षिण अफ्रीका में आए दूसरे बड़े चक्रवात केनेथ में कम से कम 38 लोगों ने अपनी जान गंवाई है जोकि चक्रवात इडाई के बाद आया था. ओचा के अनुसार, चक्रवात केनेथ ने 35,000 मकानों और 200 स्कूली कक्षाओं को आंशिक या पूरी तरह से नष्ट कर दिया है और कम से कम 14 स्वास्थ्य केंद्र इससे प्रभावित हुए हैं.  

लार्क ने कहा, गांवों के बह जाने के बाद लगभग 21,000 लोगों ने आवासीय केंद्रों में पनाह ली है. उनके अनुसार, कुछ कर्मचारियों ने एरियल सर्वे किया है और ‘कुछ गांवों को देखकर ऐसा लगता है जैसे उन पर बुलडोजर चला दिया गया हो.’ ओचा प्रमुख ने शुरुआती प्रतिक्रिया के तौर पर मोजाम्बीक के लिए 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर और अत्यधिक प्रभावित कोमोरोस द्वीपसमूह के लिए 30 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि जारी की।  

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के प्रवक्ता चार्ली वाइजिले का कहना है, ‘सर्वाधिक सुदूर क्षेत्रों में पहुंच मुश्किल बनी हुई है’. यह सूचना मिल रही है कि कुछ क्षेत्र ‘पूरी तरह से अलग-थलग हो गए हैं और उन्हें राहत की जरूरत है.’ हालांकि केनेथ से प्रभावित उत्तरी क्षेत्रों में दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले आबादी कम है, लेकिन नुकसान और बाढ़ का कहर बहुत ‘व्यापक’ है.

इस सप्ताहंत से पेम्बा में यूएनएचसीआर के कई दल मौजूद हैं. उनके एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, शहर के कई हिस्से पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में हैं. ‘सर्वाधिक अभावग्रस्त क्षेत्रों में घर ढह गए हैं और बाढ़ की तबाही के कारण सड़कों पर चारों तरफ मिट्टी और मलबे का ढेर है...समुदाय सड़कों की सफाई और तूफान की वजह से जमा हुई रेत और कीचड़ को हटाने के लिए एकजुट हो रहे हैं. विषाद स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है.’     

विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रवक्ता हार्वे वेरहूजल का कहना है, सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में ‘लोगों ने सब कुछ गंवा दिया है.’ उन्होंने कहा, आपूर्तियां समय पर पहुंच गईं जिसके कारण संस्था अब तक 11,500 लोगों की मदद कर पाई है. यह सहायता शनिवार सुबह से देनी शुरू की गई थी.

‘चक्रवात का प्रकोप बढ़ चुका है, चूंकि उसके कारण कृषि, जीविकोपार्जन के साधन और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की स्थिति भी प्रभावित हुई है.’ सरकार के शुरुआती आकलन से प्रदर्शित होता है कि कटाई के मौसम में 31,300 हेक्टेयर फसलों का नुकसान हुआ है जोकि अत्यधिक दुखद है. इसीलिए अल्पावधि, मध्यावधि और दीर्घावधि में खाद्य पदार्थों की उपलब्धता चिंताजनक स्थिति पैदा करती है.

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष से संस्था कुछ प्रभावित जिलों में खाद्य वितरण कर रही है और पोषण सहयोग प्रदान कर रही है. डब्ल्यूएफपी मोजाम्बीक में जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए पहले से काम कर रहा है... अब यह कार्य और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है और इस प्राकृतिक आपदा के बाद अतिरिक्त धनराशि की जरूरत होगी ताकि यह सुनिश्चित हो कि मोजाम्बीक को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद दी जा सके. 

 

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