इस प्रथम अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस पर बहुपक्षवाद के सिद्ध सेवा रिकॉर्ड पर फोकस

24 अप्रैल 2019

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने बुधवार को पहली बार अंतर्राष्‍ट्रीय बहुपक्षवाद दिवस आयोजन के अवसर पर कहा, ''अंतर्राष्‍ट्रीय बहुपक्षवाद एवं शांति राजनय दिवस के आयोजन से सबकी भलाई के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय सहायोग का महत्‍व उजागर होता है।'' 

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव ने कहा कि दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद स्‍थापित बहुपक्षीय तंत्रों ने लगभग 75 वर्ष में ''लोगों की जान बचाई है, आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति का दायरा फैलाया है, मानव अधिकारों की रक्षा की है और विश्‍व स्‍तर पर तीसरे महाटकराव को रोकने में मदद की है।'' 

अंतर्राष्‍ट्रीय कानून, जेंडर बराबरी तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उन्‍नति और घातक हथियारों एवं जानलेवा बीमारियों के प्रसार पर अंकुश जैसी उपलब्धियों का हवाला देते हुए उन्‍होंने कहा कि ''बहुपक्षवाद और राजनय ने हर जगह जनसेवा का रिकॉर्ड स्‍थापित किया है।'' 

संयुक्‍त राष्‍ट्र चार्टर और सतत् विकास के लिए 2030 एजेंडा में बहुपक्षवाद और अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग पर बल दिया गया है। यह दोनों ही संयुक्‍त राष्ट्र के तीन स्‍तंभों- शांति एवं सुरक्षा, विकास एवं मानव अधिकार- के प्रति समर्थन और संवर्धन की बुनियादी आवश्‍यकताएं हैं। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव ने इस बात पर निराशा व्‍यक्‍त की कि अनसुलझे संघर्षों, तेजी से बढ़ते जलवायु परिवर्तन, असमानताओं की चौड़ी होती खाई और अन्‍य खतरों से बहुपक्षवाद पर दबाव पड़ रहा है। उनका कहना था कि नई-नई टैक्‍नॉलॉजी से अवसर तो पैदा हो रहे हैं किन्‍तु उनके कारण ''रोजगार बाजार, सामाजिक तालमेल और अपने अधिकारों के उपयोग'' में व्‍यवधान आ सकता है। 

उन्‍होंने कहा, ''हम दुविधा में जी रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों के बीच पारस्‍परिक संबंध बढ़ रहा है पर उनसे निपटने के हमारे प्रयास अधिक से अधिक एकाकी हो रहे हैं।'' 

श्री गुटेरेश ने कहा कि सरकारों, राजनीतिक प्रतिष्‍ठानों और अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों के बीच अविश्‍वास की खाई बढ़ रही है। इसके साथ-साथ इस विभाजन को विकराल रूप देने वाली राष्‍ट्रवादी और लोकप्रिय आवाजें बहुत खतरनाक हैं। उनका कहना था कि आज की चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक कार्रवाई आवश्‍यक है। 

संयुक्‍त राष्‍ट्र के संस्‍थापकों के आग्रह को याद करते हुए उन्‍होंने संगठन के साधनों को नई ताकत देने की आवश्यकता बताई।

श्री गुटरेश ने कहा कि मिलकर काम करने के सिद्धांत सनातन हैं किन्‍तु विशेष उपाय अपनाते समय हमारे तेजी से बदलते विश्‍व की आवश्‍यकताओं को ध्‍यान में रखना जरूरी है।'' 

उन्‍होंने असरदार संयुक्‍त राष्‍ट्र तंत्र के साथ नियम संचालित व्‍यवस्‍था के प्रति निष्‍ठा मजबूत करने की आवश्‍यकता बताई। 

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव ने कहा, ''हमें परस्पर जुड़े हुए बहुपक्षवाद की आवश्‍यकता है जिसमें अंतर्राष्‍ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के बीच निकट सहयोग हो। इस बहुपक्षवाद की जड़ें कारोबारी समुदाय, प्रबुद्ध समाज, संसदों, शैक्षिक और लोकोपकारी समुदायों तथा अन्‍य संबद्ध पक्षों, विशेषकर युवाओं के साथ भागीदारी में जमी होनी चाहिए।'' 

उन्‍होंने इस बात पर बल दिया कि सिर्फ बहुपक्षवाद का गुणगान करना पर्याप्‍त नहीं है। हमें उसके अतिरिक्‍त महत्‍व को सिद्ध करके दिखाना होगा। ''संदेह करने वालों को दरकिनार नहीं किया जा सकता। उसके बजाय हमें सिद्ध करके दिखाना होगा कि बहुपक्षवाद वैश्विक चिंताओं का समाधान कर सकता है और सबके उत्‍थान में सक्षम निष्‍पक्ष वैश्‍वीकरण दे सकता है।''       

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव के अनुसार, ''बहुपक्षवाद को मजबूत करने का अर्थ सतत् विकास लक्ष्‍य हासिल करने और भावी पीढ़ि‍यों के लिए अधिक सुरक्षित एवं अधिक न्‍यायपूर्ण विश्‍व की रचना के प्रति हमारे संकल्‍प को मजबूत करना है।'' 

महासचिव ने अंत में कहा, ''संयुक्‍त राष्‍ट्र की ओर से और हर जगह नेताओं तथा नगारिकों की ओर से संकल्‍प की आवश्‍यकता आज पहले से कहीं अधिक है।'' 

तुला का सही संतुलन

इस अवसर पर महासभा कक्ष में उच्‍च स्‍तरीय बैठक हुई जिसमें अध्‍यक्ष मारिया फर्नांडा एस्‍पीनोसा ने उद्घाटन वक्‍तव्‍य में बहुपक्षवाद के सामने मौजूद चुनौतियों का उल्‍लेख करते हुए महासचिव की भावनाओं को दोहराया। 

उन्‍होंने बल देकर कहा कि बहुपक्षवाद में विश्‍वास फिर जगाने के लिए हम, ''उन्‍हें बाहर नहीं रख सकते जिनके लिए हम काम करते हैं, जो हमारे साथ मिलकर समाधान प्रदान कर सकते हैं, संकल्‍प ले सकते हैं। संयुक्‍त राष्‍ट्र को जनता के करीब और जनता को संयुक्‍त राष्‍ट्र के करीब लाने का उद्देश्‍य तभी हासिल हो सकता है, जब हम इस भवन से बाहर मौजूद लोगों के साथ बेहतर संवाद करेंगे।''

उन्‍होंने बहुपक्षवाद और शांति राजनय की विरासत को याद करते हुए विश्‍व को सबके लिए अधिक सुरक्षित, स्‍वच्‍छ, निष्‍पक्ष और महान अवसरों से भरपूर स्‍थान बनाने में संयुक्‍त राष्‍ट्र के योगदान का उल्‍लेख किया। 

सुश्री एस्‍पीनोसा ने इस भ्रम को तोड़ने की आवश्‍यकता बताई कि बहुपक्षवाद से देशों की प्रभुसत्‍ता पर आंच आती है। उनका कहना था कि सच्‍चाई यह है कि इससे प्रभुसत्‍ता मजबूत होती है। 

उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया, ''शांति और सतत् विकास हासिल करने तथा उसे जारी रखने के लिए बहुपक्षवाद न सिर्फ एकमात्र सबसे कारगर उपाय है, बल्कि एकमात्र संभव राह है।'' उन्‍होंने कहा कि पिछले वर्ष हुई आम बहस से इस बात की पुष्टि हो गई कि, ''विश्‍व के अधिकांश नेता इस संकल्‍पना से सहमत हैं और हमने बहुत कुछ हासिल किया है, किन्‍तु अब भी लंबा रास्‍ता तय करना है।'' 

सुश्री एस्पीनोसा ने बहुपक्षवाद में विश्‍वास बढ़ाने के लिए अधिक सचेत और सशक्‍त संयुक्‍त राष्‍ट्र की दिशा में कार्रवाई का आग्रह किया। 

उन्‍होंने कहा, ''अब से हर वर्ष 24 अप्रैल का दिन मानवता के प्रति संयुक्‍त राष्‍ट्र के योगदान के मूल्‍यांकन का अवसर प्रदान करेगा।'' 

महासभा की अध्‍यक्ष ने दृढ़ता से कहा कि इसके लिए अधिक कारगर, पारदर्शी और सजग संयुक्‍त राष्‍ट्र के साथ-साथ अधिक क्षमतापूर्ण अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यवस्‍था का होना आवश्‍यक है।

 

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