मूल निवासियों की 'धरोहर के केंद्र में है पारंपरिक ज्ञान'

22 अप्रैल 2019

पारंपरिक ज्ञान दुनिया भर में मूल निवासी समुदायों की पहचान, संस्कृति और धरोहर के केंद्र में है. मूल निवासियों के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की स्थायी फ़ॉरम की प्रमुख एन नुओरगम ने कहा कि इनकी हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए.

फ़िनलैंड की सामी संसद की सदस्य और सामी परिषद की मानवाधिकार यूनिट की प्रमुख एन नुओरगम ने इस फ़ॉरम को एक ऐसा अवसर बताया जिससे मूल निवासी समुदायों में सदियों से चली आ रही प्रथाओं और नवाचारों (इनोवेशन) पर जानकारी को साझा किया जाए.

दुनिया की कुल जनसंख्या का छह फ़ीसदी हिस्सा मूल निवासियों से बना है और वे करीब 90 देशों में रहते हैं. मूल निवासी 5,000 भिन्न-भिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और दुनिया की कुल 6,700 भाषाओं में अधिकांश भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन ये समुदाय कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं – दुनिया में ग़रीबों की कुल संख्या का 15 फ़ीसदी मूल निवासी हैं.

2019 को मूल भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. स्थायी फ़ॉरम की प्रमुख एन नुओरगम ने कहा कि, “हमें अपनी भाषाओं पर जश्न मनाना है लेकिन उनके संरक्षण के लिए ठोस कदम भी उठाने हैं, और उनकी रक्षा करनी है जो विलुप्त होने के कगार पर हैं.”

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कई देशों में मूल निवासियों के बच्चे अपनी मूल भाषाओं में नहीं पढ़ पाते हैं. मूल निवासियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की घोषणा के 14वें अनुच्छेद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मूल निवासियों का यह अधिकार है कि वे अपनी भाषा में शिक्षा ग्रहण कर सकें.

“लेकिन इसके लिए सदस्य देशों और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली से वित्तीय और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता होगी.”

UN News/Elizabeth Scaffidi
फ़ॉरम का 18वां सत्र 22 अप्रैल से 3 मई तक चलेगा.

 

कई शोध बताते हैं कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में सिखाने से सर्वश्रेष्ठ नतीजे सामने आते हैं. नुओरगम ने सभी को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जैसे हमारे बच्चे ज़मीनों, क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े हैं वैसे ही वे  मूल समुदायों और संस्कृति से जुड़े रहें. इससे पारंपरिक ज्ञान को सहेज कर रखना संभव हो सकेगा.

जैव विविधता संधि की कार्यकारी सचिव क्रिस्टियाना पास्का पाल्मा ने जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान में अपनी दिलचस्पी का श्रेय अपने रोमानियाई दादा-दादी को दिया जिन्होंने कृषि के पारंपरिक तरीक़ों को अगली पीढ़ियों तक आगे बढ़ाया.

उन्होंने कहा कि किसी न किसी रूप में हमारे पूर्वज जल और ज़मीन पर निर्भर रहे हैं. और उनके पारंपरिक ज्ञान के सहारे ही हम हज़ारों सालों से फल फूल रहे हैं.

मूल निवासियों के मुद्दे पर होने वाली वार्षिक फ़ॉरम का यह सत्र 22 अप्रैल से 3 मई तक चलेगा. दूसरे हफ़्ते में क्षेत्रीय संवाद का आयोजन किया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) ने इस फ़ॉरम की शुरुआत साल 2000 में की थी और यह फ़ॉरम, मूल निवासियों से जुड़े मुद्दों पर सलाह और अनुशंसा तैयार करती है. इस फ़ॉरम में 16 स्वतंत्र विशेषज्ञ हैं जिनमें 8 का नामांकन संयुक्त राष्ट्र सदस्य करते हैं जबकि अन्य को मूल निवासियों के संगठन करते हैं.

 

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