श्रीलंका में आतंकी बम धमाकों की कड़ी निंदा

21 अप्रैल 2019

श्रीलंका में ईस्टर के त्योहार पर समारोहों के दौरान सिलसिलेवार बम धमाके हुए हैं जिनमें 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों घायल हुए हैं. इन बम धमाकों में गिरजाघरों और होटलों को निशाना बनाया गया. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आतंकी हमलों पर क्षोभ जताते हुए कहा है कि दोषियों को तत्काल सज़ा मिलनी चाहिए.

अब तक मिली न्यूज़ रिपोर्टों के अनुसार बट्टीकलोआ, नेगोम्बो और राजधानी कोलंबो में चर्चों को निशाना बनाया गया. इन तीन चर्चों के अलावा कोलंबो के शान्ग्री-ला, किन्गसबरी, सिनेमन ग्रान्ड और एक अन्य होटल में भी धमाके हुए हैं.

अभी तक किसी भी गुट ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है लेकिन आशंका जताई गई है कि ये हमले आत्मघाती हमलावरों ने किए. पुलिस ने हमलों के सिलसिले में सात लोगों को हिरासत में लिया है.

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने वक्तव्य में कहा कि दुनिया भर में ईसाई समुदाय के लिए यह एक पवित्र दिन है. इस दिन चर्चों और होटलों पर हुए हमलों पर उन्होंने गहरा क्षोभ प्रकट किया है और उपासना स्थलों की शुचिता की अहमियत पर भी बल दिया. 

यूएन प्रमुख के प्रवक्ता स्टेफ़ान डुजेरेक द्वारा जारी इस बयान में कहा गया है कि महासचिव गुटेरेश ने पीड़ितों के परिजनों, श्रीलंका सरकार और आम लोगो के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है. हमले के बाद श्रीलंकाई प्रशासन द्वारा नेतृत्व और आम जनता द्वारा एकता प्रदर्शित किए जाने की उन्होंने सराहना की. 

श्रीलंका के लिए इसे एक कठिन क्षण करार देते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ऐसे समय में पूर्ण रूप से श्रीलंका सरकार और जनता के साथ है.

श्रीलंका में संयुक्त राष्ट्र की रेज़ीडेंट कोऑर्डिनेटर हैना सिन्गर ने एक ट्वीट में “आम नागरिकों और उपासना कर रहे लोगों पर हुए इन भयावह हमलों की कड़ी निंदा की.“ पीड़ित परिवारों को सांत्वना देते हुए उन्होंने अपील की है कि इस घटना के बाद श्रीलंका के नागरिकों को एकता बनाए रखनी चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मारिया फ़र्नान्डा एस्पिनोसा ने भी ट्विटर पर अपने संदेश में गहरा दुख प्रकट किया है. इन हमलों को उन्होंने निरर्थक हिंसा का कृत्य करार दिया है. उन्होंने कहा कि इन जघन्य कृत्यों कि निंदा होनी चाहिए और मासूम लोगों को निशाना बनाया बंद किया जाना चाहिए जो सिर्फ़ शांति से अपने पंथ का अनुसरण करना चाहते हैं. 

श्रीलंका में 15 लाख ईसाई समुदाय के लोग रहते हैं जिनमें अधिकतर रोमन कैथोलिक हैं. श्रीलंका में सिंहली समुदाय के लोग देश की कुल आबादी का 70 फ़ीसदी हैं जिनमें अधिकांश बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं. इसके अलावा हिंदू और मुस्लिम अल्पसंख्यक भी हैं.

देश 26 सालों तक सरकारी सुरक्षा बलों और तमिल अलगाववादियों के बीच गृहयुद्ध का दंश झेल चुका है जो 2009 में समाप्त हुआ. 

रविवार को हुए हमलों के बाद देश में कर्फ़्यू लगा दिया गया है और सोशल मीडिया नेटवर्क को ब्लॉक कर दिए जाने की रिपोर्टें हैं. 

 

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