काम के तनाव, ओवरटाइम और बीमारियों से हर साल 28 लाख मौतें

लेबनान में तंबाकू की पत्तियों को साफ़ करती सीरियाई महिलाएं.
ILO/Deloche P
लेबनान में तंबाकू की पत्तियों को साफ़ करती सीरियाई महिलाएं.

काम के तनाव, ओवरटाइम और बीमारियों से हर साल 28 लाख मौतें

आर्थिक विकास

कार्यस्थलों पर असुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माहौल, ज़्यादा तनाव, काम करने के लंबे घंटों और बीमारियों की वजह से हर साल 28 लाख कामगारों की मौत होती है. हर साल 37.4 करोड़ लोग नौकरी से जुड़ी वजहों के चलते या तो बीमार पड़ते हैं या फिर ज़ख़्मी होते हैं. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट में ये तथ्य उभरकर सामने आए हैं.

 

कार्यस्थलों पर असुरक्षित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माहौल से हर दिन 7,500 कर्मचारियों की मौत होती है.

अपनी नई रिपोर्ट के ज़रिए श्रम संगठन ने संदेश दिया है कि वेतनशुदा कर्मचारी जो काम करते हैं उससे उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा या जीवन को कोई ख़तरा नहीं होना चाहिए. यूएन एजेंसी ने आजीविका से जुड़े ऐसे कई जोखिमों की पहचान की है जिससे चिंताएं बढ़ रही हैं.

इनमें काम करने के आधुनिक तौर-तरीक़े, दुनिया की बढ़ती जनसंख्या, डिजिटल तकनीकों के चलते हर समय जुड़े रहने और जलवायु परिवर्तन से उपजते ख़तरे हैं. इन वजहों से वैश्विक अर्थ्यवस्था को 4 फ़ीसदी का नुक़सान होता है और आम तौर पर पुरुषों की तुलना में महिलाएं पर इनका ज़्यादा असर पड़ता है.

श्रम संगठन की मनल अज़्ज़ी ने यूएन न्यूज़ को बताया, “काम की दुनिया बदल चुकी है. हम अलग ढंग से काम कर रहे हैं, हम लंबे घंटों तक काम कर रहे हैं, हम तकनीक का ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. रिपोर्ट कहती है कि 36 फ़ीसदी कामगार काम पर लंबे घंटे बिता रहे हैं, यानी हर हफ़्ते 48 घंटों से ज़्यादा.”

उन्होंने माना कि लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे और ज़्यादा काम करेंगे और ऐसे में उनके पास आराम करने का समय नहीं बचता. महिलाएं विशेष तौर पर ख़तरा झेलती हैं क्योंकि बच्चों या माता-पिता की देखभाल भी वही करती हैं और उनके पास व्यायाम का समय नहीं होता.

“आप न सिर्फ़ ऑफ़िस में काम करते हैं बल्कि घर आने पर भी आप काम कर रहे होते हैं. अधिकतर इसमें बैठे रहना पड़ता है जिससे दिल से जुड़ी बीमारियां हो जाती हैं.”

काम से जुड़ी वजहों से होने वाली मौतों में सबसे ऊपर बीमारियों का स्थान आता है जो कुल संख्या में 86 फ़ीसदी मौतों के लिए ज़िम्मेदार हैं. श्रम संगठन के अनुसार, हर दिन 6,500 लोग काम से जुड़ी वजहों के चलते हुई बीमारियों से मरते हैं. जबकि कार्यस्थलों पर हुई दुर्घटनाओं से हर दिन एक हज़ार लोगों की मौत होती है.

मौजूदा रुझानों पर एक नज़र.
ILO
मौजूदा रुझानों पर एक नज़र.

 

मौतों का सबसे बड़ा कारण हृदयघात, रक्तचाप, दिल का दौरा जैसी बीमारियां (31 प्रतिशत) हैं. उसके बाद कैंसर (26 फ़ीसदी) और श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियां (17 फ़ीसदी) का स्थान आता है.

“आर्थिक क़ीमत के साथ-साथ हमें बीमारी और दुर्घटना से जुड़ी मानवीय पीड़ा को भी पहचानना चाहिए जिसे मापा नहीं जा सकता. ये इसलिए भी त्रासदीपूर्ण है क्योंकि इन कारणों को आमतौर पर टाला जा सकता है.”

यह रिपोर्ट ऐसे समय में जारी हुई है जब श्रम संगठन अपनी स्थापना की 100वीं वर्षगांठ मना रहा है. साथ ही 28 अप्रैल को सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस भी है. कार्यस्थलों पर सेहत के नज़रिए से बेहतर माहौल को बढ़ावा देने, जीवन की रक्षा करने और ख़तरों की रोकथाम करने के ज़रूरत को इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है.

 “काम के भविष्य पर आईएलओ द्वारा गठित वैश्विक आयोग ने अनुशंसा की है कि कार्यस्थलों पर सेहत और सुरक्षा को मूलभूत सिद्धांत और अधिकार समझा जाना चाहिए. इस बिंदु पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है.”

1919 से, श्रम संगठन ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा और बचाव को बढ़ावा देते हुए 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों को अपनाया है. इनमें रेडिएशन, कैंसर की वजह बनने वाले केमीकल, एस्बेसटस से बचाव सहित कृषि, निर्माण कार्यों, और खनन में काम करते समय सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देना है.