लीबिया में भारी गोलाबारी की 'भयावह रात'

17 अप्रैल 2019

लीबिया की राजधानी त्रिपोली और आस-पास के इलाक़ों में विरोधी गुटों के बीच झड़पें लगातार जारी हैं जिनसे रिहायशी इलाक़े भी अछूते नहीं हैं. मंगलवार को साढ़े चार हज़ार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा और संकट फिर शुरू होने के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोग  विस्थापन का शिकार हुए हैं. यूएन के विशेष प्रतिनिधि घसन सलामे ने इसे एक भयावह रात करार दिया है. 

विशेष प्रतिनिधि और लीबिया में संयुक्त राष्ट्र  मिशन (UNSMIL) के प्रमुख घसन सलामे ने ट्विटर पर अपने संदेश में कहा, "रिहायशी इलाक़ों में बेतरतीब गोलाबारी की एक भयावह रात. ग्रेटर त्रिपोली में रह रहे 30 लाख आम नागरिकों की ख़ातिर इन हमलों को रोका जाना चाहिए. अभी."

रॉकेट हमलों में भारी आबादी वाले इलाक़ों और मासूम लोगों को निशाना बनाए जाने की मिशन प्रमुख ने कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करार दिया है.

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक़ 16 अप्रैल की रात हुई गोलाबारी में चार महिलाओं समेत छह लोगों की मौत हुई है और 20 घायल हुए हैं लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी है. मंगलवार को साढ़े चार हज़ार लोगों के घर छोड़कर जाने के बाद विस्थापितों की कुल संख्या बढ़कर 25 हज़ार हो गई है. 

अब तक लड़ाई में 54 लोगों के हताहत होने की पुष्टि हो चुकी है जिनमें 14 मृतक और 40 घायल हैं.

विस्थापितों की बढ़ती संख्या

मानवीय मामलों में समन्वयन के लिए यूएन एजेंसी (UNOCHA) के अनुसार त्रिपोली और आस-पास के इलाक़ों में जारी लड़ाई से लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

जब से यह संकट नए सिरे से शुरू हुआ है तब से घरेलू विस्थापितों का आंकड़ा उच्चतम स्तर (25 हज़ार) पर पहुंच गया है. 

हिंसा के बीच जो लोग अब भी घरों में फंसे हैं उनके सामने घर छोड़ने या अनिश्चित हालात में बने रहने के सवाल है. कुछ इलाकों में खाद्य और अन्य ज़रूरी सामग्री की आपूर्ति सही ढंग से न हो पाने से हालात और गंभीर हो सकते हैं.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने नाज़ुक हालात में रह रहे प्रवासियों और शरणार्थियों को हिंसाग्रस्त इलाक़ों में स्थित  हिरासत केंद्रों से हटाकर सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है. हिंसा से प्रभावित लोगों तक मेडिकल और ज़रूरी राहत सामग्री पहुंचाने के लिए रास्ते सुरक्षित बनाए रखने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं.

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और अन्य मानवीय संगठन सामूहिक रूप से शरण में रह रहे 4.150 लोगों को भोजन उपलब्ध करा चुके हैं. बाल संरक्षण साझेदार संगठनों ने घरेलू विस्थापितों के लिए बने केंद्रों में 700 बच्चों को मनो-सामाजिक सहारा दिया है और मनबहलाव के साधन उपलब्ध कराए हैं.

अस्पतालों को मदद पहुंचाने के नज़रिए से आपात मेडिकल टीमों और मोबाइल टीमों को तैनात किया गया है और साफ-सफ़ाई और स्वच्छ जल की उपलब्धता का भी ध्यान रखा जा रहा है.

इस साल लीबिया में मानवीय राहत से जुड़े कार्य में मदद के लिए 20.2 करोड़ डॉलर की अपील की गई थी लेकिन अब तक उसकी सिर्फ़ 6 फ़ीसदी राशि ही मिल पाई है. नए हालात के बाद हिंसा प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और संसाधन जुटाने के लिए फिर से अपील जारी करने की तैयारी है.

 

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