तालिबानी हमलों से 'स्थायी शांति' के लिए प्रयासों को झटका

16 अप्रैल 2019

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान चरमपंथियों की उस घोषणा की निंदा की है जिसमें वसंत के मौसम में हमले फिर शुरू करने की धमकी दी गई है. सुरक्षा परिषद के मुताबिक़ ये हमले अफ़ग़ानिस्तान की जनता के लिए अनावश्यक पीड़ा और तबाही लेकर आएंगे. अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा के बीच शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास भी हो रहे हैं.

सुरक्षा परिषद ने कहा कि अफ़ग़ान नागरिकों की इच्छा स्थायी शांति को हासिल करना है और ऐसे में हमले तेज़ करने से स्थायी शांति कायम करने का लक्ष्य पूरा नहीं होगा.
न्यूज़ रिपोर्टों के अनुसार शांति की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही हैं लेकिन उसके बावजूद देश में लड़ाई तेज़ होने की आशंका है. इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने  वार्ता में शामिल होने वाले तालिबान के वरिष्ठ नेताओं के यात्रा करने पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया है.

सुरक्षा परिषद ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से कहा, “अफ़ग़ानिस्तान में समावेशी संवाद और राजनीतिक समाधान तलाशने पर बातचीत शुरू करने के इस अवसर का लाभ उठाया जाना चाहिए.”

सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने दोहराया कि अफ़ग़ान प्रतिनिधियों के नेतृत्व में समावेशी शांति प्रक्रिया दीर्घकालीन समृद्धि और स्थिरता के लिए अहम है. उन प्रयासों के लिए अफ़ग़ान सरकार को पूर्ण समर्थन प्रदान करने की बात कही गई है.

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अफ़ग़ानिस्तान में 2009-2018 में मारे गए आम नागरिकों की संख्या.

“सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने फिर कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) और यूएन महासचिव के विशेष प्रतिनिधि अफ़ग़ान नेतृत्व और स्वामित्व में शांति प्रक्रिया को पूरा समर्थन देने के लिए तैयार हैं, बशर्ते कि अफ़ग़ान सरकार की ओर से इस संबंध में कोई अनुरोध किया जाए.”

इस साल फ़रवरी में यूएन मिशन ने व्यथित कर देने वाले आंकड़े जारी किए थे जो दर्शाते हैं कि पिछले साल हिंसा में 3,804 लोगों की मौत हुई. यह पिछले दस सालों में सबसे बड़ी संख्या है. इसके अलावा 7,189 लोग घायल हुए और यह संख्या 2017 की तुलना में पांच फ़ीसदी अधिक है.

कुछ हफ़्तों पहले सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए यूएन के विशेष प्रतिनिधि तादामिची यामामोतो ने बताया कि ये आंकड़े युद्ध की मानवीय क़ीमत को पूरी तरह बयान नहीं करते. उन्होंने कहा अफ़ग़ानिस्तान की आधे से अधिक जनता ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है और 1.35 करोड़ लोगों को दिन में सिर्फ़ एक ही बार खाना मिलता है.

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के तयशुदा कार्यक्रम में फिर बदलाव किया गया है और अब इसे सितंबर में कराए जाने की योजना है.

 

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