वेनेज़्वेला में मानवीय स्थिति बदतर, 70 लाख लोगों को मदद की दरकार

10 अप्रैल 2019

वेनेज़्वेला मुद्दे पर परस्पर विरोधी प्रस्तावों के पारित न हो पाने के करीब एक महीने बाद वहां कायम स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फिर चर्चा हुई है. बुधवार की बैठक में वेनेज़्वेला को एक बड़ी वास्तविक मानवीय समस्या बताया गया है जहां 70 लाख लोगों को सहायता की ज़रूरत है और हर दिन पांच हज़ार लोग देश छोड़कर जाने को मजबूर हैं. 

वेनेज़्वेला में तनाव इस साल जनवरी मे बढ़ा जब देश की नेशनल असेंबली के प्रमुख ख़्वान ग्वाइदो ने मौजूदा राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की वैधानिकता को चुनौती दी. मदुरो 2013 से सत्ता में है और कुछ ही महीने पहले उन्होंने दूसरी बार पदभार संभाला है लेकिन खाने पीने की वस्तुओं की किल्लत और बढ़ती महंगाई ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेन्स ने सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति मदुरो की मान्यता को वापस ले लिया जाना चाहिए और उन्हें चुनौती देने वाले ख़्वान ग्वाइदो को पहचान मिलनी चाहिए.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका वेनेज़्वेला की जनता के साथ खड़ा है जो मदुरो के शासन में बर्बादी का शिकार हो गई है. उन्होंने कहा कि संकट को सुलझाने के लिए उनका हर विकल्प खुला है और वेनेज़्वेला के राष्ट्रपति का समय पूरा हो चुका है.

पेन्स के मुताबिक़ अमेरिका, सुरक्षा परिषद के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है जिसके ज़रिए ख़्वान ग्वाइदो को मान्यता देने की तैयारी है.

वेनेज़्वेला के विदेश मंत्री योर्गे एरिएजा ने उनका देश अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और संपत्तियों को ज़ब्त कर लिए जाने से मुश्किलों का सामना कर रहा है . "अगर यह सच होता कि वेनेज़्वेला की सरकार अपने ही लोगों को मार रही है तो फिर कुछ देश लोगों की पीड़ा बढ़ाने के लिए कोशिश क्यों कर रहे हैं?" उन्होंने आरोप लगाया कि मानवीय ज़रूरतों के बहाने अमेरिका विदेशी सैन्य हस्तक्षेप का प्रयास कर रहा है. 

वहीं रूस के दूत वासीली नेबेन्ज़िया ने कहा कि अमेरिका वेनेज़्वेला में अपने 'प्यादे' को स्थापित करना चाह रहा है और उसके ये  प्रयास अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन हैं.  

मानवीय मामलों और आपात राहत मामलों के अवर महासचिव मार्क लॉकॉक ने बताया कि, "वेनेज़्वेला में एक वास्तविक मानवीय समस्या है जिसमें अपनी भूमिका निभाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सक्षम व तैयार है."

"हमारे अनुमान के मुताबिक़ 70 लाख लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है जो जनसंख्या का करीब 25 फ़ीसदी है. पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़, गर्भवती महिलाएं, पांच साल से कम उम्र के बच्चे, मूल निवासी और विकलांग विशेष तौर पर प्रभावित हुए हैं. "

UN Photo/Eskinder Debebe
वेनेज़्वेला के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में चर्चा (फ़ाइल).

अवर महासचिव ने बताया कि इस साल फ़रवरी महीने के बाद से स्थिति और ख़राब हुई है. "व्यापक पैमाने पर पूरे देश में बार-बार बिजली आपूर्ति ठप्प हो रही है. ग्रिड से बिजली आपूर्ति न होने की वजह से अस्पतालों में ज़रूरी ऑपरेशन कर पाना संभव नहीं है और आपात देखरेख और डायलिसिस इलाज सेवाओं पर भी असर पड़ा है. जल और निकासी व्यवस्था भी बाधित हुई है. अर्थव्यवस्था ढलान पर है और लोगों की क्रय क्षमता में गिरावट आई है जिससे लोगों के लिए  भोजन ख़रीद कर खाना भी मुश्किल हो गया है."

संयुक्त राष्ट्र की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि ज़रूरत का स्तर ऊंचा है और लगातार बढ़ रहा है. 

वेनेज़्वेला में महंगाई आसमान छू चुकी है और पौष्टिक आहार तक लोगों की पहुंच नहीं रह गई है. वेनेज़्वेला 75 फ़ीसदी खाने-पीने की वस्तुओं का आयात करता रहा है लेकिन इस संकट की वजह से किफ़ायती खाने की उपलब्धता में भी गिरावट आई है.

आंकड़े बताते हैं कि 2018 में 37 लाख लोग अल्प पोषण का शिकार थे. 28 लाख को स्वास्थ्य संबंधी सहायता का आवश्यकता है. 2017 में मलेरिया के चार लाख मामले सामने आए जो 2016 से 70 फ़ीसदी अधिक हैं. 17 फ़ीसदी लोग ग़रीबी में रह रहे हैं और  उनके पास साफ़ पानी की सुविधा नहीं है और उन्हें 15 दिन में एक ही बार पानी मिलता है. 

मानवीय राहत पहुंचाने के प्रयासों के तहत संयुक्त राष्ट्र ने 90 लाख डॉलर की राशि जारी की है और देश में कर्मचारियों की संख्या भी 210 से बढ़ाकर 400 कर दी है. अवर महासचिव ने बताया कि यूएन के प्रयास मानवता, तटस्थता, निष्पक्षता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों के अनुरूप हैं. 

सुरक्षा परिषद से समर्थन की अपील करते हुए उन्होंने कहा सैद्धांतिक और मानवीय आधार पर राहत कार्रवाई का सम्मान होना चाहिए. राजनीतिक और मानवीय उद्देश्यों को अलग कर के देखने की आवश्यकता है. मानवीय सहायता ज़रूरत के आधार पर ही दी जानी चाहिए और उसके लिए अतिरिक्त फंडिंग मिलनी चाहिए . 

37 लाख वेनेज़्वेला के नागरिक बाहर के देशों में रह रहे हैं - इनमें 80 फ़ीसदी ऐसे हैं जिन्होंने 2015 के बाद देश छोड़ा है. अगर यही स्थिति बनी रही तो इस साल के अंत तक वेनेज़्वेला से बाहर रहने वालों की संख्या बढ़ कर 50 लाख तक पहुंच जाएगी. 

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड