लीबिया में तेज़ होती हिंसा के बीच हज़ारों का पलायन

8 अप्रैल 2019

लीबिया की राजधानी त्रिपोली और आस-पास के इलाक़ों में लड़ाई भड़कने से 3,400 से ज़्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से हिंसा रोकने और लड़ाई में फंसे आम नागरिकों तक मदद पहुंचाने का रास्ता खुला रखने की अपील की है. 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि लीबिया में कायम स्थिति से वह चिंतित हैं और स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं. हाल ही में यूएन प्रमुख लीबिया के दौरे पर थे जहां उन्होंने कहा था कि लीबिया में अस्थिरता का कोई सैन्य विकल्प नहीं है.

यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टेफ़ान डुजेरिक ने कहा, "भारी हथियारों के साथ झड़पें हुई हैं जिससे रिहाइशी इलाक़े भी प्रभावित हुए हैं. हम मानवीय आधार पर कुछ समय के लिए हिंसा रोक देने का अनुरोध करते हैं ताकि आपात सेवाएं मुहैया कराई जा सकें और आम नागरिक हिंसा प्रभावित इलाक़ों को छोड़ सकें."

अभी तक मिली रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार से अब तक कमांडर ख़लीफ़ा हफ़्तार की वफ़ादार लीबियन नेशनल आर्मी और अंतरिम सरकार के सुरक्षा बलों में लड़ाई में 32 लोगों की मौत हो चुकी है और 50 घायल हुए हैं 

यूएन प्रवक्ता ने कहा कि लीबिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNSMIL) देश के सभी नागरिकों की भलाई के लिए काम करना जारी रखेगा. 

महासचिव गुटेरेश पहले ही कह चुके हैं कि लीबिया में राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए और सभी संस्थाओं में एकरूपता लाने के लिए यूएन हमेशा मदद के लिए तैयार है.

हवाई हमले की निंदा

सोमवार को लीबिया में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि और यूएन मिशन प्रमुख घसएन सलामे ने लीबिया में अंतरिम सरकार के प्रमुख फ़ैयज सेराज से मुलाक़ात की और लीबिया को मदद जारी रखने के रास्तों पर विचार विमर्श किया.

मिशन प्रमुख ने लीबियन नेशनल आर्मी द्वारा त्रिपोली के मेइतिगा एयरपोर्ट पर किए गए हवाई हमले की निंदा की है. राजधानी त्रिपोली में यही एकमात्र हवाई अड्डा है जो अब तक आम नागरिकों के लिए खुला है. इस हमले को यूएन मिशन प्रमुख ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों का गंभीर हनन करार दिया है.

विशेष प्रतिनिधि सलामे ने हवाई कार्रवाई को तत्काल रोकने और लड़ाई को गृहयुद्ध में तब्दील न होने देने का आग्रह किया है.

मानवीय मामलों की समन्वयक मारिया रिबेरो ने सभी पक्षों को ध्यान दिलाया है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों, मानवाधिकार क़ानूनों के तहत तय हुए दायित्वों को निभाया जाना चाहिए.

सभी आम नागरिकों, स्कूलों, अस्पतालों, और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. इसके साथ ही हिंसा प्रभावित इलाक़ों में बिना किसी अवरोध के मदद पहुंचाने के रास्ते खुले रखना अहम होगा.

हिंसा प्रभावित परिवारों और घायलों तक आपात सेवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं और बिजली आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ा है. हिंसा तेज़ होने के बाद से ही प्रवासियों और शरणार्थियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं – उन्हें बिना प्रक्रिया के ही हिरासत में लिया जा रहा है.

 

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