'अवसरों से भरा क्षेत्र' है मध्य पूर्व

6 अप्रैल 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि मध्य पूर्व में टिकाऊ विकास और निवेश के लिए प्रचुर अवसर उपलब्ध हैं. जॉर्डन में मध्य पूर्व और उत्तर अफ़्रीका पर विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान यूएन प्रमुख ने संघर्ष और अस्थिरता से जूझते क्षेत्र की मदद के लिए हरसंभव कूटनीतिक प्रयासों के लिए प्रतिबद्धता जताई.

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने के एक उदाहरण के रूप में इसराइल और फ़लस्तीन के बीच विवाद का निपटारा दो-राष्ट्र समाधान के रूप में होना चाहिए. इससे दोनों देशों की सुरक्षित सीमाएं होंगी और राजधानी येरुशलम होगी.

हाल के दिनों में महासचिव गुटेरेश ने मिस्र और लीबिया सहित मध्य पूर्व के कई देशों की यात्रा की है. उन्होंने कहा कि कुछ विषयों में सकारात्मक प्रगति हो रही है. ट्यूनीशिया में पहली बार स्वतंत्र ढंग से नगर पालिका चुनाव हुए और वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है.

मिस्र में अल-अज़हर मस्जिद का दौरा करने के बाद उन्होंनें शाही इमाम से सहिष्णुता और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देने, नफ़रत भरे भाषणों पर लगाम लगाने और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के रास्तों पर विमर्श किया.

संभावनाओं भरा क्षेत्र

यूएन प्रमुख ने जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय और रानी रानिया अल अब्दुल्लाह का बैठक आयोजित करने और शांति की दिशा में प्रयास करने के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने जॉर्डन को क्षेत्रीय स्थिरता का एक बुनियादी स्तंभ बताया और कहा कि इस देश में निजी क्षेत्र के लिए बड़े अवसर उपलब्ध हैं.

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मध्य पूर्व और उत्तर अफ़्रीका को महज़ संघर्षग्रस्त क्षेत्र के रूप में नहीं बल्कि अवसरों भरे क्षेत्र के नज़रिए से देखा जाना चाहिए. घरेलू स्तर पर सही नीतियां अपनाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समर्थन से यहां उल्लेखनीय गतिशीलता और क्षमताओं को प्रदर्शित किया जा सकता है.

यूएन प्रमुख के अनुसार इस क्षेत्र में कई देश ऐसे हैं जहां नागरिकों ने सामाजिक सुरक्षा, सुशासन और मानवाधिकार जैसी एकीकृत राजनीतिक मांगों को सामने रखा है. साथ ही हिंसक चरमपंथ, लैंगिक भेदभाव, घरेलू हिंसा और यौन शोषण सहित अन्य समस्याओं से निपटने के लिए प्रयास किए गए हैं.

महिला सशक्तिकरण की आर्थिक दृष्टि से अहमियत समझाते हुए महासिचव गुटेरेश ने कहा कि पूर्ण एवं वास्तविक लैंगिक समानता से क्षेत्र पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2.7 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोत्तरी हो सकती है.

शरणार्थी बच्चों के लिए 'स्कूल बंद न हों'

विश्व आर्थिक मंच की बैठक के बाद यूएन प्रमुख ने बाक़ा शिविर का दौरा किया. 1967 में अरब-इसराइली युद्ध के बाद पश्चिमी तट और ग़ाज़ा पट्टी से जो फ़लस्तीनी शरणार्थी और विस्थापित आए थे उन्हें छह आपात शिविरों में बसाया गया था. बाक़ा में शिविर उनमें से एक है जहां 1 लाख 20 हज़ार पंजीकृत फ़लस्तीनी शरणार्थी रहते हैं.

महासचिव गुटेरेश ने फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम कर रहे यूएन एजेंसी (UNRWA) के स्टाफ़ से भी मुलाक़ात की और एजेंसी को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाने की अहमियत पर ज़ोर दिया.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने यूएन एजेंसी द्वारा संचालित एक स्कूल का दौरा भी किया और कहा कि ऐसे स्कूलों को बंद नहीं किया जाना चाहिए. “700 स्कूलों में 530,000 फ़लस्तीनी शरणार्थी बच्चे मानवाधिकारों, लोकतंत्र, सहिष्णुता के बारे में सीख रहे हैं. ये उनके अनुकरणीय नागरिक बनने की परिस्थितियों का निर्माण कर रहे हैं. इससे मेरा दिल गदगद है.”

यूएन प्रमुख ने माना कि फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम कर रही यूएन एजेंसी को वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. अगर स्वास्थ्य और शिक्षा के कार्यक्रमों को धन के अभाव में बंद किया जाता है तो इसके विनाशकारी परिणाम होंगे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि 2019 के लिए यूएन एजेंसी को पहले की तरह वित्तीय मदद जारी रहनी चाहिए और फिर अगले साल के लिए भी उसे सुनिश्चित किया जाना होगा.

 

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