दोराहे पर खड़े हैती में 'मानवाधिकारों की रक्षा अहम'

3 अप्रैल 2019

हैती में संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा मिशन के पूरा होने के आसार के बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशलेट ने कहा है कि देश, विकास और शांतिरक्षा के दोराहे पर खड़ा है. सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अनुरोध किया कि अब तक हुई प्रगति को और मज़बूत बनाए जाने की ज़रूरत है, नहीं तो उसके पूरी तरह खोने का ख़तरा है.

 

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा कि मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनके संरक्षण में आम नागरिक समाज और मानवाधिकार हनन के पीड़ित आगे आए हैं. लेकिन अभी वे पूरी तरह ऐसे मामलों की निगरानी करने और मानवाधिकारों की वकालत की भूमिका निभाने के लिए तैयार नहीं हैं. 

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि  नागरिक संगठनों को डराया धमकाया जाता है जिसे रोका जाना चाहिए. साथ ही कैरिबियाई देश के भविष्य में हिस्सेदारी समझने वाले सभी पक्षों को मानवाधिकारों के संरक्षण की प्रणाली को मज़बूत बनाए जाने की दिशा में प्रयास करने चाहिए. 

2017 में राष्ट्रपति, राष्ट्रीय और स्थानीय चुनावों के बाद हैती ने संवैधानिक व्यवस्था की ओर बढ़ने की दिशा में कदम उठाए जिसे यूएन मानवाधिकार प्रमुख बाशलेट ने अहम उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देश शांतिरक्षा और विकास के दोराहे पर खड़ा है.

अब तक हुई प्रगति को पहचाना जाना चाहिए और उसे आगे ले जाना चाहिए या फिर सब कुछ खो जाने का ख़तरा है. 

यूएन मानवाधिकार प्रमुख ने कहा, "फ़रवरी महीने में हुए विरोध प्रदर्शन हाल के सालों में सबसे लंबे समय तक चलने वाले और हिंसक थे. इससे पूरा देश में कामकाज ठप्प हो गया था." संयुक्त राष्ट्र समर्थित राष्ट्रीय पुलिस को ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए तैयार करने के बावजूद मानवाधिकार हनन और बिना सुनवाई के लोगों को जान से मारने के मामले सामने आते रहे हैं. कुछ ही मामलों में जवाबदेही तय हो पाती है. 

"अपराधियों के हौसले बुलंद है और चुप रहने को मजबूर कर दिए पीड़ित दुखी हैं. न्यायिक व्यवस्था की कमज़ोरी के चलते जेलों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. 75 प्रतिशत से ज़्यादा क़ैदी ऐसी है जिन्हें सुनवाई शुरू होने से पहले ही हिरासत में 1,100 दिन रहने को मजबूर होना पड़ता है जो राष्ट्रीय क़ानून में तय सीमा से ज़्यादा है."

मानवाधिकार उच्चायुक्त ने परिषद को बताया कि न्यायिक मामलों में समर्थन के लिए मौजूदा मिशन (MINUJUSTH) का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उनका कार्यालय देश में काम करना जारी रखना चाहता है. सु रक्षा परिषद और सदस्य देशों के सहयोग से अकेले ही देश में उपस्थिति बनाए रखने के लिए तैयार है.

"हम अपना काम जारी रखना चाहते हैं और लोकतांत्रिक और आर्थिक विकास के लिए हैती के संकल्प को समर्थन देना चाहते हैं ताकि हैती की जनता के अधिकारों को सहारा दिया जा सके."

UN Photo/Eskinder Debebe
हैती में हालात पर जानकारी देते यूएन शांति अभियान प्रमुख ज्यां पियरे लाक्रोआ.

यूएन शांतिरक्षा अभियानों के प्रमुख ज्यां पियरे लाक्रोआ ने ध्यान दिलाया कि 7 से 15 फ़रवरी के बाद हिंसक प्रदर्शनों के बाद से अब तक कोई प्रदर्शन नहीं हुआ है. उन प्रदर्शनों में 41 लोगों की मौत हुई थी और 100 लोग घायल हुए. बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के भी मामले सामने आए थे.

उन्होंने बताया कि विरोधी गुट हैती के राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की लगातार मांग कर रहे हैं लेकिन इसे व्यापक समर्थन नहीं मिल पाया है. इसके बावजूद प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच आपसी रंज़िश और अपराधों की वजह से राजधानी पोर्त-ओ-प्रांस में सामान्य जीवन पर असर पड़ रहा है. साथ ही कुछ क्षेत्रों में हिंसा की छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं. 

शांतिरक्षा अभियानों के प्रमुख ने पिछले हफ़्ते चिली के दूत के काफ़िले पर हथियारों हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की. इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए थे. उन्होंने सुरक्षा परिषद को आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय पुलिस ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है और वे हैती में सुरक्षा ख़तरों से निपटने में सक्षम हैं. 

"2017-2021 के लिए हैती की राष्ट्रीय पुलिस के लिए बनाई गई पांच वर्षीय रणनीति सही ढंग से आगे बढ़ रही है." हैती के नेताओं ने इच्छा जताई है कि देश में शांतिरक्षा गतिविधियों को समाप्त कर देना चाहिए और इस संबंध में यूएन मिशन को इस साल अक्टूबर में पूरा हो जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनका विभाग हैती के नेताओं की इस इच्छा का समर्थन करता है.. 

“संयुक्त राष्ट्र और हैती के बीच साझेदारी को विकसित होना होगा. इसे मज़बूत बने रहना चाहिए और इसका मूल लोकतांत्रिक प्रगति को हासिल करने के संकल्प में होना चाहिए."