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लीबिया के भविष्य के प्रति 'आशावान' हैं यूएन प्रमुख

ट्यूनिस में बैठक के बाद पत्रकार वार्ता को संबोधित करते यूएन महासचिव.
UN Photo/Ahmed Gaaloul
ट्यूनिस में बैठक के बाद पत्रकार वार्ता को संबोधित करते यूएन महासचिव.

लीबिया के भविष्य के प्रति 'आशावान' हैं यूएन प्रमुख

शान्ति और सुरक्षा

लीबिया में आठ साल से चले आ रहे संघर्ष के समाधान की संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने आशा जताई है. ट्यूनीशिया की राजधानी ट्यूनिस में अरब लीग, यूरोपीय संघ और अफ़्रीकी संघ के नेताओं के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने यह बात कही. 

यूरोपीय संघ, अरब लीग, संयुक्त राष्ट्र और अफ़्रीकी संघ के समूह को ‘लीबिया क्वार्टेट’ कहा जाता है जिनके नेताओं के साथ बैठक के बाद महासचिव गुटेरेश ने कहा, “लीबिया के संबंध में अगर कोई शब्द मेरी भावनाओं को सही रूप में प्रकट कर सकता है तो वह आशा है. लीबिया के लिए यह क्षण आशा भरा है.”

“मेरे पास उम्मीद है क्योंकि मेरा विश्वास है कि अब लीबियाई नेतृत्व में राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है जिसमें लीबिया की समस्याओं का समाधान ढूंढा जाए.”

भविष्य में सफलता के मार्ग पर चलने के लिए उन्होंने तीन प्रमुख कदमों का ज़िक्र किया: दो सप्ताह के भीतर लीबियाई नेशनल कांफ्रेंस हो; शांति और मेलमिलाप सम्मेलन अफ़्रीकी संघ के मुख्यालय आदिस अबाबा में हो; देश में राजनीति सामान्य बनाने के लिए सही समय में चुनाव हों. 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने माना की इस रास्ते में मुश्किलें हैं लेकिन हाल के दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें आशावान बने रहने का अवसर प्रदान किया है. आबूधाबी में लीबिया के प्रधानमंत्री फ़ैयज़ सेराज और प्रतिद्वंद्वी सैन्य नेता, खलीफ़ा हफ़्तार के साथ बैठक हुई है. हफ्तार लीबिया की राष्ट्रीय सेना के प्रमुख हैं. 

इथियोपिया और एरिट्रिया, दक्षिण सूडान, मध्य अफ़्रीका गणराज्य और अन्य देशों में हुए शांति समझौतों का उदाहरण देते हुए उन्होंने ध्यान दिलाया कि आशा की बयार बह रही है. 

“लोगों ने अपने नेताओं को जताना शुरू कर दिया है कि वे शांति चाहते हैं. इसे हम परिभाषित नहीं कर सकते क्योंकि हम लीबियाई नहीं है इसलिए लीबियाई जनता को समाधान को ख़ुद तलाशना होगा लेकिन हम पहली बार संकेत देख रहे हैं कि मतेभेदों को पहली बार दूर किया जा सकता है.”

2011 में लीबियाई तानाशाह मुआम्मर गद्दाफ़ी को सत्ता से हटाने के बाद से ही लीबिया में कई हथियारबंद गुटों में संघर्ष चलता रहा है जिससे अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा पर गहरा असर पड़ा है.