गोलन पहाड़ियों पर अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों की अवहेलना 'विफल' होगी

28 मार्च 2019

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिकांश सदस्य देशों ने गोलन पहाड़ियों के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय क़ानून को बरक़रार रखने की अहमियत पर बल दिया है. हाल ही में अमेरिका ने एकतरफ़ा घोषणा करते हुए गोलन पहाड़ियों पर इसराइल की संप्रभुता को मान्यता देने वाली एक आधिकारिक घोषणा की है.

सीरिया के साथ लगने वाली उत्तरी सीमा पर इसराइल ने इन पहाड़ियों को 1967 के युद्ध के दौरान अपने नियंत्रण में ले लिया और 1981 में वहां उस पर पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लिया. हालांकि इस कार्रवाई को सुरक्षा परिषद ने ग़ैरक़ानूनी करार दिया. 

सुरक्षा परिषद में फ्रांस की उपदूत एन गुएगेन ने बुधवार शाम को न्यूयॉर्क में सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान बताया कि यूरोपीय संघ पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसके सदस्य देशों ने इसराइल की संप्रभुता को मान्यता नहीं दी है. अगर सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की अवहेलना के प्रयास किए जाते हैं तो वे विफल ही साबित होंगे.

लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधि  रोडनी हंटर ने सुरक्षा परिषद को भरोसा दिलाया कि गोलन हाइट्स पर अमेरिकी फैसले से वहां संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा बल (UNDOF) की सुरक्षा या तैनाती पर कोई असर नहीं होगा जो सीरिया और इसराइल में युद्धविराम की निगरानी करता है.

उन्होंने कहा, "यूएन शांतिरक्षा बल स्थिरता को बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभाना जारी रखे हुए है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अलगाव के एक इलाक़े को बफ़र ज़ोन बनाना सुनिश्चित करना जिसमें कोई सैन्य उपस्थिति या गतिविधि नहीं है." अमेरिकी दूत ने कहा कि अलगाव वाले ज़ोन में प्रवेश करने के लिए सीरिया की ओर से होने वाले प्रयासों को सुरक्षा परिषद द्वारा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र में शांतिरक्षा मामलों के प्रमुख ज़्यां पियरे लाक्रोआ ने बताया कि कई बार उल्लंघन के बावजूद यूएन मिशन की निगरानी में युद्धविराम कायम है. "यह अहम है कि गोलन पर स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों पक्ष हर समय डिसइन्गेजमेंट ऑफ़ फोर्सेस समझौते का आदर करें."

"दोनों पक्षों  का यह समझ लेना अति महत्वपूर्ण है कि उन्हें यूएन शांतिरक्षकों के साथ संपर्क बनाए रखने की ज़रूरत है. हम सुरक्षा परिषद के सदस्यों पर विश्वास करते हैं कि वे दोनों पक्षों और क्षेत्र में स्थित देशों को तनाव बढ़ने में छिपे जोखिमों और सीरिया और इसराइल में लंबे समय से चले आ रहे युद्धविराम को बचाए रखने के प्रति आगाह करेंगे.

संयुक्त राष्ट्र में राजनीतिक और शांतिनिर्माण मामलों की प्रमुख रोज़मैरी डिकार्लो ने यूएन महासचिव के रुख़ को दोहराते हुए कहा कि अमेरिकी निर्णय के प्रकाश में गोलन पहाड़ियों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.

"हम आशा करते हैं कि हाल के दिनों के घटनाक्रम का इस्तेमाल ऐसी किसी कार्रवाई के लिए नहीं किया जाएगा जिससे गोलन और अन्य इलाक़ों में स्थिरता पर कोई असर पड़े. हम ज़मीन पर गतिविधियों पर गहरी नज़र रखेंगे और सुरक्षा परिषद को इसकी सूचना देते रहेंगे." 

 

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