उकसावेपूर्ण कार्रवाई से मध्य पूर्व की स्थिरता को ख़तरा

26 मार्च 2019

इसराइल और फ़लस्तीन में बढ़ते तनाव के बीच, मध्य पूर्व में संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक ने सुरक्षा परिषद को मौजूदा स्थिति की जानकारी देते हुए क्षेत्र में कायम स्थिति पर चिंता जताई है. आतंकवादी हमलों, आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने और प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ बदले की भावना से कार्रवाई के चलते पहले से ही संवेदनशील क्षेत्र में फिर से गंभीर संकट पैदा हो सकता है.

विशेष समन्वयक निकोलाय म्लादेनोव ने कहा, "लगातार हो रही हिंसा और उसमें फ़लस्तीनियों और इसराइलियों की जान जाने से मुझे बहुत दुख हुआ है. पश्चिमी तट और ग़ाज़ा में हाल की घटनाएं दिखाती हैं कि क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्रों में तनाव बढ़ रहा है और हिंसक संघर्ष और भड़क सकता है. मुझे चिंता है कि हम फिर एक बार ख़तरनाक और व्यापक पैमाने पर हिंसा की ओर बढ़ रहे हैं जिसके विनाशकारी नतीजे हो सकते हैं."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2334 के लागू होने के विषय में हर तीसरे महीने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है और उसी सिलसिले में दी गई यह 9वीं रिपोर्ट थी. इस रिपोर्ट में 15 दिसंबर से 15 मार्च तक की अवधि के बारे में जानकारी दी गई है. हाल के दिनों में ग़ाज़ा और इसराइली सीमा पर हिंसा में तेज़ी आई है जिसके चलते हालात और बिगड़ने की चेतावनी जारी की गई है.

पिछले दस दिनों में ग़ाज़ा पट्टी से 104 रॉकेट और मोर्टार दागे गए हैं जिनमें से कुछ को इसराइल की रक्षा कवच प्रणाली 'आयरन डोम' प्रणाली ने ध्वस्त कर दिया जबकि अन्य रॉकेट हमलों से सेड्रोट शहर में एक घर को नुक़सान पहुंचा है. एक रॉकेट मध्य इसराइल में एक घर पर जाकर गिरा जिससे सात लोग घायल हो गए जिनमें तीन बच्चे हैं. कुछ रॉकेट निर्जन स्थानों पर जाकर गिरे हैं.

"आतंकवाद को किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता." उन्होंने सभी से अनुरोध किया कि हमास की ओर से इसराइल पर होने वाले लगातार अंधाधुंध रॉकेट हमलों की निंदा की जानी चाहिए. म्लादेनोव ने इसे"उकसावेपूर्ण कार्रवाई" करार दिया है जिससे स्थिति और बिगड़ने का जोखिम रहेगा.

म्लादेनोव ने बताया कि जवाबी कार्रवाई में पिछले 48 घंटों में इसराइली सुरक्षा बलों ने ग़ाज़ा के कई इलाक़ों में 42 हवाई हमले किए हैं. स्थानीय सूत्रों के अनुसार इन हमलों में सात फ़लस्तीनी घायल हुए हैं और कई इमारतों को नुक़सान पहुंचा है जिनमें चरमपंथी संगठन हमास के कार्यालय भी शामिल हैं.

"पिछले दो दिनों ने हमें दर्शाया है कि हम युद्ध के कितने नज़दीक आ गए हैं."

"मैं अपनी टीम के साथ मिलकर मिस्त्र और सभी पक्षों के साथ यह सुनिश्चित करने में जुटा हूं कि स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं जानी चाहिए. जैसे मैंने पहले भी कई बार सुरक्षा परिषद में कहा है, लेकिन मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि ग़ाज़ा में व्यापक पैमाने पर सैन्य संघर्ष में किसी की भी दिलचस्पी नहीं है. एक नया हिंसक संघर्ष फ़लस्तीनियों के लिए विध्वंसकारी होगा और इसराइल के लिए भी इसके दुष्परिणाम होंगे जो ग़ाज़ा के बेहद नज़दीक रहते हैं. साथ ही क्षेत्र में भी इसका असर पड़ने की संभावना है."

UN Photo/Eskinder Debebe
मध्य पूर्व में स्थिति पर सुरक्षा परिषद की बैठक.

विशेष समन्वयक ने सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों से अनुरोध किया है कि सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की जानी चाहिए.

सुरक्षा परिषद प्रस्ताव संख्या 2234 के अनुरूप, इसराइल ने पूर्व येरूशलम सहित क़ब्जे वाले फ़लस्तीनी इलाक़ों में तत्काल और पूर्ण रूप से निर्माण कार्य रोकने के लिए कदम नहीं उठाए हैं. "मैं दोहराना चाहता हूं कि क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्रों में बस्तियां बसाया जाना क़ानूनी नहीं है और यह अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का खुला उल्लंघन है...यह तत्काल प्रभाव से पूर्ण रूप से रुकना चाहिए." इसके अलावा, फ़लस्तीनियों के स्वामित्व वाली संपत्तियों को ढहाए जाने और उन पर क़ब्ज़ा होने पर भी उन्होंने चिंता जताई.

ग़ाज़ा में बदहाल आर्थिक स्थिति के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों की पिटाई होने की भी रिपोर्टेों का भी उन्होंने ज़िक्र किया. "आम तौर पर विरोध प्रदर्शन अहिंसक थे लेकिन हमास के सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करते हुए कई महिलाओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की पिटाई की. कई घरों पर छापा भी मारा गया. स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार एक हज़ार से ज़्यादा लोगों की पिटाई की गई जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. 

दो-राष्ट्र समाधान पर प्रगति न होने के मुद्दे पर भी उन्होंने चिंता ज़ाहिर की. "संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों, अंतरराष्ट्रीय पैमानों और पूर्व समझौतों के अनुरूप दो-राष्ट्र के समाधान पर प्रगति न हो पाने से मुझे चिंता है." म्लादेनोव ने कहा कि इसका कोई और विकल्प नहीं है.  उन्होंने कहा कि जब तक स्थायी शांति और हल नहीं तलाशा जाता तब तक फ़लस्तीनियों और इसराइलियों की अगली पीढ़ी की नियति भी जीवन ऐसे ही बिताना होगी.

 

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