जानलेवा स्वायत्त हथियारों पर ‘प्रतिबंध ज़रूरी’

25 मार्च 2019

जिनिवा में आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) विशेषज्ञों की बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने आग्रह किया है कि घातक स्वायत्त हथियार प्रणालियों की तकनीक के विकास को रोकने के लिए उन्हें तेज़ी से कदम बढ़ाने चाहिए. 

सरकारी विशेषज्ञों को अपने एक संदेश में यूएन प्रमुख ने कहा, “ऐसी मशीनें जिनमें इतनी ताक़त और समझ हो कि अपने आप ही वे लोगों की जान ले सकें, राजनीतिक रूप से अस्वीकार्य और नैतिक दृष्टि से घिनौनी हैं. उन पर अंतरराष्ट्रीय क़ानून में प्रतिबंध लगना चाहिए.” 

यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि मानव जीवन को छीन लेने वाले Lethal Autonomous Weapons Systems (LAWS) या “पूर्ण रूप से स्वायत्त घातक हथियार प्रणालियों” के पक्ष में कोई भी देश या सैन्य बल नहीं है. 

महासचिव गुटेरेश ने विशेषज्ञ पैनल के पिछले साल के उस बयान का स्वागत किया जिसमें हथियार प्रणालियों के इस्तेमाल पर मानवीय ज़िम्मेदारी को बनाए रखने की बात की गई थी और हथियार इस्तेमाल की जवाबदेही रोबोट के हवाले न किए जाने पर बल दिया गया था.

विशेषज्ञों के समूह द्वारा 2018 में की गई इस घोषणा को अहम करार दिया गया है. हालांकि यूएन महासचिव ने कहा कि इस विषय में कुछ सदस्य देश नया क़ानून चाहते हैं जबकि अन्य राजनीतिक उपाय और दिशानिर्देश के समर्थन में हैं.

“अब यह आपका काम है कि इन मतभेदों को दूर करें और आगे बढ़ने का सबसे प्रभावी रास्ता निकालें. दुनिया देख रही है, समय बीत रहा है और अन्य लोग इतने आशावान नहीं हैं. मुझे आशा है कि आप उन्हें ग़लत साबित करेंगे.”

इस साल विशेषज्ञ समूह की दो बैठक होनी हैं जबकि 2017 और 2018 में भी बैठक हो चुकी हैं. 

विशेषज्ञों के इस समूह का एजेंडा Lethal Autonomous Weapons Systems (LAWS) या “घातक स्वायत्त हथियार प्रणालियों” के इस्तेमाल से संबंधित तकनीकी मुद्दों पर आधारित है. जैसे ऐसी तकनीक किस प्रकार से अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों के सामने चुनौती पैदा करती हैं या ऐसी हथियार प्रणालियों की तकनीक के विकास, उनकी तैनाती में मानव भूमिका पर चर्चा.

सरकारी विशेषज्ञों के अलावा कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों, नागरिक समाज, शिक्षा और औद्योगिक जगत के प्रतिनिधि इसमें हिस्सा ले रहे हैं. 

आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में दिखाई दे रहे अवसरों और चुनौतियों पर महासचिव गुटेरेश पहले भी चिंता ज़ाहिर कर चुके हैं.

2017 में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सभी के लिए शांति और समृद्धि से परिपूर्ण एक गरिमामय जीवन की दिशा में प्रगति त्वरित करने की संभावना है. लेकिन यह गंभीर चुनौतियां और नैतिक मुश्किलें भी उत्पन्न करती है. साइबर सुरक्षा, मानवाधिकारों और निजता जैसे मुद्दों का ख़्याल रखा जाना चाहिए.”

 

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