'इडाई' प्रभावित बच्चों को जल्द से जल्द राहत और सुरक्षा की ज़रूरत

24 मार्च 2019

चक्रवाती तूफ़ान ‘इडाई’ से सबसे ज़्यादा प्रभावित मोज़ाम्बिक के बेयरा शहर में राहत एजेंसियों को धीरे धीरे तबाही की व्यापकता का अंदाज़ा लग रह है. शनिवार को संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख ने कहा है कि देश भर में 10 लाख से ज़्यादा पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए और अंतरराष्ट्रीय मदद की आवश्यकता है.

बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही हैज़ा जैसी बीमारियों के फैलने का ख़तरा पैदा हो रहा है. 

यूनिसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने बेयरा का दौरा करने के बाद बताया कि “मोज़ाम्बिक के तूफ़ान प्रभावित इलाक़ों में बच्चों तक मदद पहुंचाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय निकला जा रहा है.”   

शुरुआती सरकारी अनुमानों के मुताबिक़ तूफ़ान से 18 लाख लोग प्रभावित हुए हैं जिनमें 9 लाख बच्चे हैं. लेकिन अब भी कई क्षेत्रों तक नहीं पहुंचा जा सका है और इसीलिए यूनिसेफ़ और अन्य साझेदार संगठनों ने आशंका जताई है कि प्रभावितों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है.

यूनिसेफ़ प्रमुख ने कहा कि स्थिति बेहतर होने से पहले अभी और ख़राब होगी. तबाही का पूरा पता लगाने में राहत एजेंसियों को अभी समय लगेगा. कुछ रिपोर्टों के अनुसार कई गांव डूबे हुए हैं, इमारतें गिर गई हैं और स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों को भी नुक़सान पहुंचा है.

“तलाशी और बचाव अभियान अभी चल रहा है. यह बेहद अहम है कि पानी से फैलने वाले रोगों पर नियंत्रण पाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं क्योंकि यह हालात और विकट बना सकता है.”

यूनिसेफ़ ने चेतावनी जारी की है कि बाढ़ और शरणगाहों में ख़राब परिस्थितियों की वजह से मलेरिया और हैज़ा जैसी बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ है. राहत केंद्रों पर ज़रूरतमंदों की भीड़ है, साफ़-सफ़ाई का इंतज़ाम नहीं है, पानी जमा हुआ है और जल स्रोत में भी संक्रमण फैलने का ख़तरा है.

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के संबंध में भी चिंता ज़ाहिर की गई है. “जो महिलाएं और बच्चे अब भी राहत टीमों का इंतज़ार कर रहे हैं या अस्थायी शिविरों में हैं उनके हिंसा या शोषण का शिकार बनने का जोखिम बना हुआ है.” उन बच्चों की सुरक्षा पर विशेष तौर पर चिंता ज़ाहिर की गई है जिन्होंने तूफ़ान में अपने माता-पिता को खो दिया है.

तूफ़ान प्रभावित तीन देशों – मोज़ाम्बिक, मलावी और ज़िम्बाब्वे – में यूनिसेफ़ टीमें बच्चों का ख़्याल रख रही हैं लेकिन उन्हें और संसाधनों की आवश्यकता है. राहत अभियान के पहले चरण में 3 करोड़ डॉलर की ज़रूरत है और इस राशि के लिए निजी और सावर्जनिक क्षेत्र के दानदाताओं से मदद की दरकार है. 
 

 

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