हिंसा से ज़्यादा घातक है बच्चों के लिए गंदा पानी

22 मार्च 2019

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि हिंसा से त्रस्त कई देशों में बच्चों को साफ़ और सुरक्षित पानी का न मिल पाना, उनके लिए वहां जारी लड़ाई से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है. 'विश्व जल दिवस’ के अवसर पर जारी इस रिपोर्ट के अनुसार स्वच्छ पानी के अभाव में होने वाली मौतों का आंकड़ा हिंसा का शिकार होने वाले बच्चों से कहीं ज़्यादा है.

अफ़ग़ानिस्तान, बुर्किना फ़ासो, कैमरून, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य. चाड, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, लीबिया, इराक़, माली, सीरिया, यमन सहित अन्य देशों से मिले आंकड़ों का अध्ययन करती यह  रिपोर्ट बताती है कि जल आपूर्ति की व्यवस्था आपात परिस्थितियों में फंसे बच्चों पर  कैसे प्रभाव डालती है.

रिपोर्ट के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चों की गंदे और असुरक्षित पानी की वजह से होने वाली मौत की आशंका, उनके हिंसा का शिकार बनने की तुलना में औसतन बीस गुना ज़्यादा है.

यूनिसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने कहा, “लंबे समय से संघर्षग्रस्त इलाक़ों में रह रहे बच्चों के लिए हालात पहले से ही बहुत मुश्किल हैं – बहुत से बच्चों की सुरक्षित जल के स्रोत तक पहुंच नहीं है. सच्चाई यह है कि गोलियों की तुलना में साफ़ पानी न मिलने की वजह से ज़्यादा मौतें होती हैं.”

लेकिन स्वच्छ और सुरक्षित पानी तक पहुंच न हो पाना सिर्फ़ हिंसाग्रस्त देशों तक सीमित नहीं है. यह एक वैश्विक समस्या बनी हुई है.  

रिपोर्ट दर्शाती है कि हर साल 15 वर्ष से कम उम्र के 85,700 से ज़्यादा बच्चों की मौत असुरक्षित पानी, स्वच्छता न बरते जाने और साफ़-सफ़ाई के अभाव में होने वाली बीमारियों से होती है. हिंसा में मारे जाने वाले बच्चों की संख्या 30,900 है.

वहीं पांच साल से कम उम्र के बच्चों में इन वजहों से होने वाली बीमारियों से हर साल 72 हज़ार जानें जाती हैं जबकि लड़ाई का शिकार होने वाले बच्चों की संख्या लगभग साढ़े तीन हज़ार है.

चुनौती का विकराल रूप

साल 2010 में संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षित और स्वच्छ पीने योग्य पानी तक पहुंच को एक मानवाधिकार माना लेकिन दुनिया में बड़ी आबादी के लिए यह अब भी एक चुनौती है.

स्वच्छ और सुरक्षित पानी तक पहुंच से वंचित करोड़ों लोग.
UNAMID/Albert Gonzalez Farran
स्वच्छ और सुरक्षित पानी तक पहुंच से वंचित करोड़ों लोग.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 2 अरब से ज़्यादा लोगों के घरों में स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है और असुरक्षित जल के इस्तेमाल के लिए मजबूर 80 फ़ीसदी लोग ग्रामीण इलाक़ों में रहते हैं.

15 करोड़ से ज़्यादा लोग पेयजल के लिए तालाबों और छोटी धाराओं पर निर्भर हैं. 2030 तक 70 करोड़ से अधिक लोग गंभीर जल संकट के चलते विस्थापन का शिकार भी हो सकते हैं.

समाज में हाशिए पर रहने का शिकार लोग, विशेषकर महिलाओं, शरणार्थियों, विकलांगों और अन्य को सुरक्षित और स्वच्छ पीने के पानी तक पहुंचने में मुश्किल है और कई बार उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है.

स्वच्छ जल को पाना सार्वजनिक स्वास्थ्य का मज़बूत आधार है और टिकाऊ विकास के दृष्टिकोण से बेहद अहम है. टिकाऊ विकास का छठा लक्ष्य 2030 तक सबके लिए सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और जल के टिकाऊ प्रबंधन पर केंद्रित है.

इस वर्ष ‘विश्व जल दिवस’ की विषय-वस्तु “लीविंग नो वन बिहाइन्ड” या “कोई भी पीछे न छूटने पाए” है जो टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडे में किए गए वादों को ही आगे बढ़ाती है.

किसी को भी पीछे न छूटने देने का लक्ष्य हासिल करने के लिए स्वच्छ और सुरक्षित जल सेवा को सभी लोगों, विशेषकर समाज में हाशिए पर रहने को मजबूर, तक पहुंचाने की आवश्यकता है.

इसके लिए यह ज़रूरी है कि निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी आवाज़ों को भी सुना जाए. जल और स्वच्छता व्यवस्था सुधारने में स्थानीय समुदायों की भागीदारी को समर्थन अहम है.

क़ानूनी और नियामक प्रावधानों के ज़रिए सभी के लिए साफ़ पानी का अधिकार पहचाने जाने के बाद प्रभावी रूप से इस पर अमल भी होना चाहिए.

 

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