भारी बारिश के चलते 'इडाई' प्रभावित इलाक़ों में हालात विकट

21 मार्च 2019

मोज़ाम्बिक, मलावी और ज़िम्बाब्वे में चक्रवाती तूफ़ान 'इडाई' से तबाही के बाद कई प्रभावित इलाक़ों में अब भी भारी बारिश हो रही है जिससे स्थिति और बिगड़ने की आशंका गहरा रही है. तूफ़ान के बाद जलस्तर बढ़ने से घरों की छतों और पेड़ों की शरण लिए लोगों तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य जारी है.

दक्षिणी अफ़्रीका में चक्रवाती तूफ़ान 'इडाई' प्रभावित इलाक़ों में हालात अब भी मुश्किल बने हुए हैं. विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी जारी की है कि तूफ़ान की चपेट में आने के छह दिन बाद स्थिति अभी और बिगड़ सकती है क्योंकि बारिश अब भी हो रही है. मोज़ाम्बिक में अब तक 242 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. ज़िम्बाब्वे में 139 लोगों की मौत हुई है और 189 अभी लापता हैं.

मोज़ाम्बिक में सरकार द्वारा आपातकाल की घोषणा किए जाने के बाद यूएन एजेंसी ने 17 लाख लोगों को अगले तीन महीनों तक राहत पहुंचाने के लिए 12 करोड़ डॉलर की अपील की है.

सोफ़ाला और मनिका प्रांत सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं - मुख्य सड़क मार्गों और पुलों को ज़बरदस्त नुक़सान हुआ है और उनसे होकर गुज़रना अब संभव नहीं है. बिजली आपूर्ति ठप्प है और अगले कई हफ़्तों तक उसके बहाल होने की संभावना भी नहीं है. हज़ारों लोगों के घर बर्बाद हो गए हैं. लापता लोगों को ढूंढने के लिए ड्रोन विमानों का सहारा लिया जा रहा है. 

कई गांव तबाह

मोज़ाम्बिक के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के अनुसार कई इलाकों में एक लाख से ज़्यादा लोग अब भी अलग-थलग हैं और उन तक राहत सामग्री पहुंचाना संभव नहीं हो पाया है. हालात अभी और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि लगातार बारिश हो रही है और ऐसे में प्रभावितों की संख्या समय के साथ बढ़ सकती है. 

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने सोफ़ाला, मनिका, टेट और ज़ामबेज़िया मेंअब तक 20 हज़ार लोगों तक खाने की सामग्री पहुंचाई है और अगले चार हफ़्तों में छह लाख लोगों तक राहत पहुंचाने का लक्ष्य है. लेकिन मोज़ाम्बिक की बुज़ी घाटी में हवाई सर्वेक्षण दर्शाता है कि पूरे गांव तबाह हो गए हैं और इस स्थिति में राहत ज़रूरतों के शुरुआती अनुमान बढ़ने की संभावना है. 

सड़कों और पुलों को भारी नुक़सान.
WFP/Andrew Chimedza
सड़कों और पुलों को भारी नुक़सान.

 

यूएन एजेंसी के प्रवक्ता अर्वे वेयरहुसेल ने कहा, "यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में छह लाख से कहीं ज़्यादा लोगों को मदद की आवश्यकता होगी. इसका असर सहायता राशि पर भी पड़ेगा. अगर हम छह लाख लोगों की अगले तीन महीनों तक मदद करते हैं तो इसके लिए 4.2 करोड़ डॉलर चाहिए, लेकिन अगर 17 लाख लोगों को तीन महीनों तक राहत दी जानी है तो फिर 12.1 करोड़ डॉलर की आवश्यकता होगी."

ज़िम्बाब्वे का चिमानीमानी ज़िला सर्वाधिक प्रभावित

ज़िम्बाब्वे में 2 लाख लोगों को अगले तीन महीनों तक भोजन एवं राहत सामग्री की तत्काल ज़रूरत का अनुमान जताया गया है. 

सबसे ख़राब हालात चिमानी मानी ज़िले में हैं जो तूफ़ान से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. यहां 90 फ़ीसदी संपत्तियों को भारी नुक़सान हुआ है. यह ज़िला पूर्वी ज़िम्बाब्वे में स्थित हैं जहां अब भी भारी बारिश हो रही है जिससे और जान-माल की हानि की आशंका है.

तात्कालिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, यूएन एजेंसी ने 50 लाख डॉलर का अनुरोध किया है ताकि भोजन और राहत सामग्री के वितरण का इंतज़ाम किया जा सके. 

मलावी में तूफ़ान का सीमित असर रहा है लेकिन 9 लाख से ज़्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.  लोगों ने घरों को लौटना शुरू कर दिया है. अगले दो महीनों में यूएन एजेंसी 6.5 लाख लोगों तक मदद पहुंचाना चाहती है और इसके लिए 1.3 करोड़ डॉलर की ज़रूरत होगी.

विकट हालात में राहत सामग्री को पहुंचाया जाना और उसका वितरण भी एक बड़ी चुनौती है. राहत सामग्री को लेकर आने वाला एक विमान बेहद मुश्किल परिस्थितियों में ही मोज़ाम्बिक के बेयरा में उतर पाया. 

"वह शायद पहला कार्गो विमान था जो यहां उतरा. उस विमान में आई सामग्री का अभी पूरी तरह वितरण नहीं हो पाया है. सबसे बड़ी समस्या लोगों तक पहुंचने की है. वे अभी छतों पर ही हैं और ऐसे में सड़क मार्ग से उन तक पहुंचना संभव नहीं है."

तूफ़ान से बेयरा शहर का 90 फ़ीसदी हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है और बंदरगाह पर कोई बुनियादी ढांचा नहीं बचा है. ऐसे में हाथों से उठाकर राहत सामग्री के एक-एक डिब्बे को उतारा जा रहा है.

 

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