क्या है 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' और यह अहम क्यों है?

17 मार्च 2019

इस सप्ताह अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में 20-22 मार्च को दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर दूसरे उच्चस्तरीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सरकारी प्रतिनिधिमंडल, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों समेत एक हज़ार से ज़्यादा लोग एकत्र हो रहे हैं.

विकासशील देशों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए ब्यूनस आयर्स में ही हुए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के 40 साल पूरे होने पर इस सम्मेलन को 'ब्यूनस आयर्स प्लान ऑफ़ एक्शन+40' (BAPA+40 या बापा+40) का नाम भी दिया गया है. 

सम्मेलन में होने वाली चर्चा में मुख्य मुद्दा टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडे के लक्ष्यों को पाने में दक्षिण-दक्षिण सहयोग की भूमिका पर होगा. टिकाऊ विकास के 17 लक्ष्य, वैश्विक स्तर पर लोगों के जीवनस्तर को सुधारने और पृथ्वी पर जीवन को शांतिपूर्ण और ख़ुशहाल बनाने की कार्ययोजना है. 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे. दक्षिण-दक्षिण सहयोग की महत्ता में उनका दृढ़ विश्वास है, विशेषकर नए विचारों को और ठोस परियोजनाओं को मूर्त रूप देने में जिससे अन्वेषण (इनोवेशन) और विकास को बढ़ावा देने में मदद मिले.

इस अहम सम्मेलन से संबंधित उपयोगी जानकारी के लिए यूएन न्यूज़ ने एक उपयोगी गाइड तैयार की है जिसमें कई सवालों के जवाब हैं.

1. मूलभूत प्रश्न से शुरु करते हैं. दक्षिण-दक्षिण सहयोग क्या है? 

दक्षिण-दक्षिण सहयोग से अर्थ दुनिया के विकासशील देशों में तकनीकी सहयोग से है जिसके ज़रिए सदस्य देश, अंतरराष्ट्रीय संगठन, शिक्षाविद्, नागरिक समाज और निजी सेक्टर आपस में मिलकर काम करते हैं और ज्ञान, कौशल और सफल उपक्रमों को साझा करते हैं. यह सहयोग मुख्य रूप से कृषि विकास, मानवाधिकार, शहरीकरण, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों पर केंद्रित है. 

2. अर्जेंटीना में 40 साल पहले क्या हुआ?

1960 और 1970 के दशक में दुनिया की सामाजिक और आर्थिक स्थिति, शीत युद्ध की राजनीति में जकड़ी हुई थी. ऐसे माहौल में विकासशील देशों ने उस समय के आर्थिक और राजनीतिक ढांचे से हटकर नए विकल्पों के तहत अपने विकास का रास्ता स्वयं तलाशने के लिए नए सिरे से प्रयास किए. इन्हीं प्रयासों के अंतर्गत विकासशील देशों ने राजनीतिक संवाद के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीति में मोलभाव करने की अपनी ताक़त को बढ़ाने की शुरुआत की. 

18 सितंबर, 1978 को संयुक्त राष्ट्र के 138 सदस्य देशों ने अर्जेंटीना में 'ब्यूनस आयर्स प्लान ऑफ़ एक्शन' (BAPA) को पारित किया जो विकासशील देशों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के नज़रिए से किया गया था.  इस योजना के माध्यम से अल्प विकसित देशों - दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित अधिकांश देश - के आपस में मिल जुलकर काम करने का रास्ता भी तैयार हुआ. 

साथ ही इस प्रकार के सहयोग के लिए एक रूपरेखा भी तैयार हुआ जिसके अमलीकरण में सार्वभौमिक देशों के बीच संबंधों में आधारभूत सिद्धांतों का ख़्याल रखा गया: संप्रभुता के लिए सम्मान, आंतरिक मामलों में दख़लअंदाज़ी से परहेज़, और समानता के अधिकारों पर बल.

बापा के तहत नई और ठोस अनुशंसाएं भी जारी की गईं जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर-क्षेत्रीय स्तरों पर सहयोग के लिए  क़ानूनी रूपरेख़ा और वित्तीय प्रक्रियाओं को स्थापित करना था.

3. लेकिन उत्तर-दक्षिण सहयोग या त्रिकोणीय सहयोग कहां है?

"उत्तर" और "दक्षिण" के विभाजन से तात्पर्य सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विभिन्नताओं से है जो विकसित देशों (उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित देश) और विकासशील देशों (दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित देश) में मौजूद हैं. 

हालांकि उच्च आय वाले अधिकतर देश उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित हैं लेकिन यह मुख्य रूप से वास्तविक भौगोलिक स्थिति पर ही निर्भर नहीं करता.  किसी देश को उत्तर या दक्षिण, उसके स्थान की वजह से नहीं बल्कि कुछ निश्चित आर्थिक कारणों और वहां जीवन की गुणवत्ता के आधार पर कहा जाता है. 

उत्त-दक्षिण सहयोग सबसे पारंपरिक सहयोग रहा है और तब होता है जब एक विकसित देश आर्थिक रूप से कम विकसित देश को सहायता प्रदान करता है. जैसे प्राकृतिक या मानवीय आपदा के समय में वित्तीय मदद.

त्रिकोणीय सहयोग में तीन पक्षों की भूमिका होती है. दो दक्षिण से और एक उत्तर से, और यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन भी हो सकता है. इसके तहत उत्तर में स्थित पक्ष, वित्तीय संसाधन प्रदान करता है ताकि दक्षिण के देश किसी ख़ास विषय पर तकनीकी सहयोग का आदान-प्रदान कर सकें. 

जैसे, जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से मिली मदद से कंबोडियाई विशेषज्ञों ने कोलंबिया की यात्रा की और बारूदी सुरंग के विषय में ज्ञान के आदान-प्रदान को संभव बनाया. अपने इतिहास के अलग-अलग पलों में कंबोडिया और कोलंबिया दोनों ही देश बारूदी सुरंगों के ख़तरों का सामना कर चुके हैं. 

कंबोडिया में बच्चे के स्वास्थ्य की जांच करता एक डॉक्टर.
UNOSSC
कंबोडिया में बच्चे के स्वास्थ्य की जांच करता एक डॉक्टर.

4. दक्षिण-दक्षिण सहयोग की अहमियत क्या है?

नवंबर 2018 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में  यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा, "तकनीक हस्तांतरण, आपात तैयारी और आजीविका के साधनों की बहाली के लिए, ज्ञान के आदान-प्रदान के अभिनव रूपों को अपनाकर कई ज़िदंगियों में बदलाव लाया जा रहा है."

"तथ्य अपनी बात ख़ुद कहते हैं. हाल के सालों में दक्षिण गोलार्द्ध के देशों ने वैश्विक विकास में आधे से अधिक योगदान दिया है; दक्षिण गोलार्द्ध के देशों में आपसी व्यापार उच्चतम स्तर पर हैऔर वैश्विक व्यापार का एक चौथाई से ज़्यादा है."

अल्प और मध्य आय वाले देशों में बाहर रह कर काम कर रहे प्रवासी कामगारों द्वारा भेजे जाने वाली धनराशि बढ़कर 466 अरब डॉलर हो गई जिससे लाखों परिवारों को ग़रीबी से बाहर निकालने में मदद मिल रही है. 

यूएन प्रमुख का मानना है कि महत्वाकांक्षी और दुनिया की कायापलट करने का लक्ष्य रखने वाले 2030 टिकाऊ विकास एजेंडे को तब तक सही मायनों में पूरा नहीं किया जा सकता जब तक नए विचारों, ऊर्जा और विकासशील देशों की सृजनात्कमता और चतुराई को जगह न दी जाए.

5. दक्षिण-दक्षिण सहयोग क्या हासिल कर सकता है?

राजनीतिक संवाद और वित्तीय सहयोग के साथ, दक्षिण-दक्षिण सहयोग ने बड़ी संख्या में ज्ञान और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया है.  इसके लिए कई कार्यक्रमों, परियोजनाओं और पहलों पर ध्यान दिया गया जिससे दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित देशों के सामने आने वाली मुश्किलों को सुलझाने का प्रयास किया गया है. 

पिछले साल नवंबर में, दक्षिण-दक्षिण सहयोग के लिए यूएन कार्यालय ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें ऐसे ही 100 से ज़्यादा सफल अनुभवों को साझा किया गया जो विकास प्रक्रिया में मददगार साबित हुए हैं. 

कुछ उदाहरण: पश्चिम अफ़्रीका में ईबोला के ख़िलाफ़ लड़ाई में क्यूबा से मिला समर्थन, और केन्या में स्वास्थ्य और पोषण को सुधारने के लिए विविध मक्का उत्पादों को तैयार करने में मैक्सिको का अनुभव. 

6. इस सप्ताह अर्जेंटीना में क्या होने जा रहा है?

दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर दूसरे उच्चस्तरीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (बापा+40) में सदस्य देश ब्यूनस आयर्स में मिलेंगे और चार दशकों की यात्रा की समीक्षा होगी. साथ ही 2030 एजेंडा को लागू करने के लिए एक नई रणनीति की भी घोषणा की जाएगी. 

बापा+40, 1978 से अब तक लिए गए सबक की समीक्षा करने का अवसर है. उसके अलाव सहयोग के नए क्षेत्रों और प्रक्रियाओं को पहचानने का भी. विशेषकर उन मुद्दों पर जिनमें दक्षिण-दक्षिण सहयोग और त्रिकोणीय सहयोग ज़्यादा प्रभावशाली साबित हो सकता है. 

तीन दिनों तक, दुनिया के कई देशों से आए नेता एक राजनीतिक घोषणा पर भी चर्चा करेंगे, जिसमें दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने और इसकी प्रगति के मूल्यांकन के लिए संस्थागत ढांचो को मज़बूत करने का ज़िक्र होगा. 

सम्मेलन के दौरान चर्चा के लिए कई सत्रों का आयोजन होगा और सफल अनुभवों को साझा करने के लिए प्रदर्शनी का भी आयोजन होगा. 

7. इस सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चा का हिस्सा मैं कैसे बन सकता हूं?

इस सम्मेलन का सीधा प्रसारण यूएन वेब टीवी पर उपलब्ध होगा. लेकिन अगर सीधा प्रसारण न देख पाएं तो बापा+40 से संबंधित सभी ऑन-डिमांड वीडियो को यहां देखा जा सकता है:

इसके अलावा सोशल मीडिया पर आप #BAPA40; #SouthSouthCooperation; और #SouthSouth हैशटैग का इस्तेमाल कर ट्वीट भी कर सकते हैं.

 

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