2018 में यूएन को यौन शोषण की 259 शिकायतें मिली

18 मार्च 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश द्वारा महासभा को सौंपी गई एक नई रिपोर्ट के अनुसार यूएन ने पिछले साल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से संबंधित कुल 259 मामले दर्ज किए. पिछले दो सालों के मुक़ाबले ऐसे मामलों में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है लेकिन इस विषय में जागरूकता भी बढ़ रही है.

सभी आरोपों का पूरी तरह से सत्यापन नहीं हो पाया है और कई मामलों की जांच या तो चल रही है या फिर प्राथमिक समीक्षा हो रही है.    

1 जनवरी से लेकर 31 दिसंबर 2018 तक, संयुक्त राष्ट्र को यौन शोषण और उत्पीड़न से संबंधित 148 ऐसी शिकायतें मिलीं जो सीधे तौर पर यूएन कर्मचारियों से संबंधित थे. 111 शिकायतें उन साझेदार संगठनों से थीं जो यूएन कार्यक्रमों को लागू कर रहे हैं. 

रिपोर्ट दर्शाती है कि यूएन और यूएन से संबंधित कर्मचारियों में जागरूकता बढ़ रही है और मामले दर्ज कराने की प्रक्रिया में भी पहले की तुलना में सुधार आया है. 2017 की तुलना में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है जब 138 आरोप लगे थे. वहीं 2016 में 165 आरोप सामने आए थे. 

शांतिरक्षा अभियानों में स्थिति बेहतर होने के संकेत मिले हैं और आरोपों में पिछले दो सालों में  50 फ़ीसदी की कमी आई है.  2016 में यौन शोषण और दुर्व्यवहार के 103 आरोप सामने आए लेकिन 2018 में यह संख्या घटकर 54 रह गई है. 

2018 में अधिकतर मामले मध्य अफ़्रीकी गणराज्य (MINUSCA), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य  (MONUSCO), माली (MINUSMA), हैती (MINUSTAH), लाइबेरिया (UNMIL) और दक्षिण सूडान (UNMISS) में यूएन मिशनों से निकल कर आए. यूएन के विशेष राजनीतिक मिशनों से संबंधित कोई आरोप नहीं देखने को मिला. 

संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षक अभियानों में बेहतरी के बावजूद, अन्य यूएन संस्थानों में आरोपों की संख्या बढ़ी है. 2017 में 50 मामले सामने आए थे लेकिन 2018 में 94 आरोप लगे. 

संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रमों को लागू कर रहे साझेदार संगठनों में आरोपों की संख्या भी बढ़कर 109 हो गई है. 2017 में सिर्फ़ 25 मामलों का पता चला था और उसके मुक़ाबले यह चार गुना बढ़ोत्तरी है. 

इसके अलावा, 2018 में दो आरोप उन ग़ैर-यूएन सैन्य बलों के ख़िलाफ़ लगे हैं जिन्हें सुरक्षा परिषद से मान्यता मिली है. 2017 में ऐसा एक मामला जबकि 2016 में 20 आरोप पता लगे थे. 

आंकड़े दिखाते हैं कि एक साल पहले पीड़ितों पर विशेष ध्यान दिए जाने वाला तरीक़े से लाभ मिला है. इससे पीड़ितों में विश्वास बढ़ा है और वे मामलों को सामने लाने में प्रोत्साहित महसूस कर रहे हैं. 

प्रगति का मूल्यांकन करना एक जटिल मामला है जिसे सिर्फ़ आंकड़ों के ज़रिए नहीं जांचा जा सकता. उदाहरण के लिए, अगर किसी संस्था में एक भी आरोप का पता नहीं चलता तो यह भी हो सकता है कि वहां मामला दर्ज करने और उनकी रोकथाम करने के लिए ठोस प्रणाली न हो.

संयुक्त राष्ट्र के पास लोगों पर आपराधिक मुक़दमा चलाने संबंधी अधिकार नहीं है, और यह ज़िम्मेदारी संबंधित देशों के पास ही है. जिन मामलों में आरोप आम नागरिकों के ख़िलाफ़ लगते हैं, उनमें संयुक्त राष्ट्र प्रशासनिक तौर पर जांच करता है, और ठोस सबूत मिलने पर स्टाफ़ सदस्य को बर्ख़ास्त कर दिया जाता है और अपराध के निष्कर्ष पर पहुंचने के बाद आगे की कार्रवाई के लिए मामले को स्थानीय प्रशासन को सौंप दिया जाता है. 

जिन मामलों में सुरक्षा बलों पर आरोप लगते हैं उनमें सैन्य बलों के योगदानकर्ता देशों के पास जांच का विशेषाधिकार होता है लेकिन जवाबदेही तय करने के लिए यूएन भी जांच कार्य में मदद करता है.

 

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