सीरिया में शांति स्थापना अंतरराष्ट्रीय समुदाय का 'नैतिक दायित्व'

17 मार्च 2019

दुनिया भर में सरकारों का नैतिक दायित्व बनता है कि वे सीरियाई नागरिकों को उनके साझा भविष्य के लिए एक साथ लाने में सहायता प्रदान करें. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सीरिया में आठ साल से चले आ रहे संघर्ष के अंत के लिए इसे ज़रूरी बताया है. 

सीरिया में लड़ाई अब नौवें साल में प्रवेश कर रही है. अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की अपील करते हुए महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि सीरियाई नागरिक मौजूदा समय के सबसे ख़राब संघर्ष को झेल रहे हैं जिसमें हज़ारों लोगों की जान जा चुकी है, इससे कहीं ज़्यादा लोग घायल या अपंग हुए हैं, लाखों लोग विस्थापित हुए जबकि हज़ारों लोग या तो हिरासत में हैं या लापता.

“यह एक नैतिक दायित्व है और राजनीतिक रूप से अनिवार्य है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सीरियाई जनता को उनके साझा भविष्य के लिए एक साथ लाने में उनकी मदद करे. इससे लोगों को सुरक्षा प्रदान करने, पीड़ा कम करने, अस्थिरता दूर करने, राजनीतिक संकट के मूल कारणों को हल करने और समस्या का विश्वसनीय राजनीतिक संकट निकालने में मदद मिलेगी.”

कुछ ही दिन पहले ब्रसेल्स में हुए ‘संकल्प सम्मेलन’ में सीरिया में और सीरिया से बाहर रह रहे हिंसा प्रभावित लोगों के लिए 7 अरब डॉलर की मदद का वादा किया गया है. ब्रसेल्स में दानदाताओं को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि सीरिया के लोगों की अपेक्षा के अनुरूप राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए मज़बूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन का होना बेहद ज़रूरी है. 

सीरिया के उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम में रह रहे लोग अब भी मानवीय संकट के ख़तरे से जूझ रहे हैं.   यूएन महासचिव ने लड़ाई में शामिल सभी पक्षों से कहा है कि उन्हें अपने वचनों के अनुसार इदलिब में संघर्ष-विराम बनाए रखना चाहिए. 

“हाल के कुछ हफ़्तों में सैन्य अभियान तेज़ होने से मैं बहुत चिंतित हूं. आतंकवाद के ख़िलाफ़ अभियान का अर्थ यह नहीं है कि नागरिकों के संरक्षण का ख़्याल न रखा जाए. इदलिब में संघर्ष-विराम देश-व्यापी संघर्ष विराम के लिए एक ज़रूरी कदम है.” इससे पहले विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़े में लड़ाई तेज़ होने की ख़बर आई थी.

कई स्तरों पर लड़ाई जारी रहने के बावजूद महासचिव गुटेरेश ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों का सम्मान और पालन किए जाने की अपील की है ताकि मानवाधिकारों की रक्षा हो सके. “मासूम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों, ने इस संघर्ष की सबसे अधिक क़ीमत चुकाई है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मानवीय और मानवाधिकार क़ानूनों की ज़रा भी परवाह नहीं की गई.”

साथ ही उन्होंने ध्यान दिलाया कि मानवीय राहत पहुंचाने के लिए आम लोगों तक पहुंचने का रास्ता खुला रहना चाहिए. सीरिया में फ़िलहाल 1.17 करोड़ लोगों को संरक्षण और सहायता की आवश्यकता है.

 

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