महिला अधिकारों पर वार्षिक बैठक में बुनियादी सेवाओं पर ज़ोर

11 मार्च 2019

लैंगिक समानता और महिला अधिकारों पर चर्चा के नज़रिए से अहम 'कमीशन ऑन द स्टेट्स ऑफ़ वीमेन' का 63वां सत्र न्यूयॉर्क में शुरू हो गया है. पहले दिन हुई चर्चा में महिलाओं और लड़कियों को ज़रूरत पर आधारित और मानवाधिकारों के अनुरूप, मूलभूत सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की गई है.

न्यूयॉर्क स्थित संंयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 'कमीशन ऑन द स्टेट्स ऑफ़ वीमेन' या महिलाओं की स्थिति पर आयोग के 63वें सत्र को नागरिक समाज के प्रतिनिधि के तौर पर पाकिस्तान की मुनीबा मज़ारी और दक्षिण सूडान की मैरी फ़ातिया ने संयुक्त रूप से संबोधित किया. अपने भाषण में उन्होंने रेखांकित किया कि दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों की बुनियादी सुविधाओं और ढांचे तक पहुंच होनी चाहिए.

साथ ही ज़रूरत पर आधारित और मानवाधिकारों के अनुरूप, मूलभूत सामाजिक सुरक्षा सेवाओं को भी उपलब्ध कराना बेहद अहम है. 

यूएन पाकिस्तान के लिए सद्भावना राजदूत मुनीबा मज़ारी व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती हैं. संयुक्त राष्ट्र महासभा में कार्यकर्ताओं, राजनयिकों और शिक्षाविदों से उन्होंने  कहा, "एक महिला होना वैसे ही चुनौतियों से भरा है. एक व्हीलचेयर तक सीमित में रह जाना इसे और मुश्किल बना देता है."

वहीं मैरी फ़ातिया ने पुरानी याद साझा करते हुए बताया कि वह लंबा रास्ता तय करते हुए एक ऐसे स्कूल जाती थीं जहां 600 बच्चों के लिए सिर्फ़ दो शौचालय थे. उन्होंने कहा कि उनके लिए एक आदर्श दुनिया का अर्थ शांतिपूर्ण अस्तित्व, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और अच्छा आधारभूत ढांचा है. "मैं आरामदेह सड़कों की मांग नहीं कर रही हूं. मुझे बस ये चाहिए और इसे लेना मेरा अधिकार है."

आयोग के वार्षिक सत्र में नागरिक समाज संगठनों के 9,000 से ज़्यादा प्रतनिधि हिस्सा ले रहे हैं और यह दो हफ़्तों तक चलेगा. इस वर्ष की विषय वस्तु 'सामाजिक सुरक्षा प्रणालियां, और लैंगिक समानता और महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए  टिकाऊ आधारभूत ढांचा और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच' है.' इस दौरान होने वाले विमर्शों में लैंगिक समानता और टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा पर भी चर्चा होगी.

'मूल रूप से ताक़त का सवाल'

अपने उद्घाटन संबोधन में यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि महिलाओं की स्थिति पर बने इस आयोग को ताक़त की स्थिति पर आयोग का भी नाम दिया जा सकता है.  "क्योंकि मुद्दे के केंद्र में यही है. लैंगिक समानता मुख्य रूप से ताक़त से जुड़ा सवाल है."

महासचिव ने कहा कि शक्ति समीकरणों को बदलना, खाई और पूर्वाग्रहों को समाप्त करना, और अब तक मिली सफलता को बचाए रखने की लड़ाई जारी रखने के लिए ज़रूरी है कि महिलाओं को समाज में बराबरी की हिस्सेदारी दी जाए. "जब हम महिलाओं को बाहर रखते हैं तो उसकी क़ीमत हर एक को चुकानी पड़ती है. जब हम महिलाओं को शामिल करते हैं तो दुनिया की जीत होती है."

हाल के दशकों में हुई प्रगति का ज़िक्र करते हुए संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था की प्रमुख पुमज़िले म्लाम्बो-न्गुका ने कहा कि बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में निवेश के चलते पहले से कहीं अधिक संख्या में लड़कियां अब स्कूल जा रही हैं.

हालांकि उन्होंंने ध्यान दिलाया कि दुनिया में 71 फ़ीसदी आबादी के पास अब भी सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं है और इस खाई को पाटा जाना चाहिए. 

 

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