वेनेज़्वेला: सुरक्षा परिषद में पारित नहीं हुए रूस और अमेरिका के प्रस्ताव

28 फ़रवरी 2019

वेनेज़्वेला पर इस हफ़्ते दूसरी बार सुरक्षा परिषद की गुरुवार को बैठक हुई जिसमें अमेरिका और रूस की ओर से परस्पर विरोधी प्रस्ताव पेश किए गए. लेकिन दोनों ही पारित नहीं हो पाए क्योंकि अमेरिकी प्रस्ताव को वीटो कर दिया गया जबकि रूस के प्रस्ताव को ज़रूरी वोट नहीं मिले.  

वेनेज़्वेला में लंब समय से चले आ रहे संकट का समाधान ढूंढने के लिए सुरक्षा परिषद की यह तीसरी बैठक थी. तनाव तब बढ़ा जब इस साल जनवरी में देश की नेशनल असेम्बली के प्रमुख जुआन ग्वाइदो ने मौजूदा राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की सत्ता की वैधता को चुनौती दी. मदुरो 2013 से राष्ट्रपति का पद संभाल रहे हैं और दूसरे कार्यकाल की शपथ उन्होंने हाल ही में 10 जनवरी को ली थी. 

सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य दो हिस्सों में बंटे नज़र आए: एक पक्ष ने राष्ट्रपति मदुरो का यह कहते हुए समर्थन किया कि वह क़ानूनी प्रक्रिया से चुने गए राष्ट्रपति हैं वहीं ग्वाइदो का समर्थन करने वाले पक्ष ने देश में नए चुनाव कराए जाने की मांग की.  

अमेरिका की ओर से पेश प्रस्ताव के मसौदे में नए चुनाव कराए जाने और अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में ग्वाइदो को मान्यता देने की मांग की गई थी. 9 सदस्यों (जर्मनी, पोलैंड, पेरू, अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, बेल्जियम, डोमिनिकन गणराज्य, कुवैत) ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि तीन (रूस, चीन दक्षिण अफ़्रीका) ने विरोध में मत डाले. तीन सदस्य देश (इक्वेटोरियल गिनी, इंडोनेशिया, कुवैत) मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे.

वेनेज़्वेला के लिए विशेष अमेरिकी प्रतिनिधि इलियट अब्राम्स ने सुरक्षा परिषद को बताया कि “वेनेज़्वेला में जो स्थिति है उस सिलसिले में कार्रवाई की ज़रूरत है. लोकतंत्र की तरफ़ कदम बढ़ाने का समय अब है. हम देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की आशा करते हैं और एक ऐसी सरकार की भी जो वेनेज़्वेलावासियों की इच्छाओं और अभिलाषाओं का प्रतिनिधित्व करे.”

रूस की ओर से पेश मसौदे में सरकार और विपक्षी दलों के बीच बातचीत की बात कही गई थी. इसके पक्ष में चार वोट (रूस, चीन, दक्षिण अफ़्रीका, इक्वेटोरियल गिनी) पड़े जबकि सात वोट विरोध में पड़े (जर्मनी, पोलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, बेल्जियम, पेरू). चार सदस्य देश (आइवरी कोस्ट, डोमिनिकन गणराज्य, इंडोनेशिया, कुवैत) मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे.

रूसी दूत वैसेली नेबेन्ज़िया ने कहा, “हमने एक वैकल्पिक प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था जिसका उद्देश्य राजनीतिक कौतूहल पैदा करना या सत्ता परिवर्तन करना नहीं था बल्कि सही मायनों में वेनेज़्वेला के लोगों की मदद करना था ताकि देश में स्थिति सामान्य हो सके.” 

इससे पहले मंगलवार को राजनीतिक और शांतिनिर्माण मामलों की प्रमुख रोज़मैरी डीकार्लो ने सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए बताया था कि वेनेज़्वेला को गंभीर हालात का सामना करना पड़ रहा है. 

बढ़ते तनाव के बीच मानवीय मामलों में संयुक्त राष्ट्र का समन्वयन कार्यालय बिगड़ती स्थिति पर नज़र रखे हुए है. 2017 से अब तक शिशु मृत्यु दर में 50 फ़ीसदी से ज़्यादा की वृद्धि हो चुकी है. हर पांच में चार अस्पतालों में ज़रूरी दवाओं और कर्मचारियों की कमी है. यूएन एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार अब तक 34 लाख लोग देश छोड़ कर जा चुके हैं. 

 

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