सिकुड़ती जैव विविधता खाद्य और कृषि प्रणाली के लिए ख़तरा

22 फ़रवरी 2019

संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की एक नई रिपोर्ट दर्शाती है कि खाद्य प्रणाली को मज़बूत आधार प्रदान करने वाली जैव विविधता धीरे धीरे गायब हो रही है. इससे भोजन, आजीविका, स्वास्थ्य और पर्यावरण के भविष्य के लिए  बड़ा ख़तरा पैदा होता जा रहा है. 

खाद्य और कृषि प्रणालियों में जैव विविधता से आशय पालतू और जंगली दोनों तरह के जीवों, कीटों, पेड़-पौधों, वनस्पतियों और पशु-पक्षियों आदि से है जिनसे हमें भोजन, ईंधन, चारा और फ़ाइबर मिलता है और जो भूमि की उर्वरता, मछलियों और वृक्षों को स्वस्थ बनाए रखने जैसे अहम कार्य करते हैं.

संगठन के महानिदेशक खोसे ग्रात्सियानों डे सिल्वा ने जैव विविधता को बेहद अहम बताया है. "वैश्विक खाद्य सुरक्षा, पोषक और सेहतमंद आहार, आजीविका के साधनों की बेहतरी के लिए और ग्रामीण समुदायों के लिए जैव विविधता अहम है. हमें उनका उपयोग टिकाऊ ढंग से करने की आवश्यकता है ताकि जलवायु परिवर्तन से उभरती चुनौतियों का हम बेहतर ढंग से सामना कर सकें."

भोजन और कृषि के लिए दुनिया में जैव विविधता की स्थिति नाम से जारी यह रिपोर्ट अपनी तरह का  पहला अध्ययन है. रिपोर्ट में सचेत किया गया है कि अगर जैव विविधता का क्षरण होता रहा और हमारी भोजन प्रणाली और पैदा करने वाले लोगों को सहारा देने वाली प्रजातियां लुप्त होती गईं तो उन्हें फिर बहाल करना संभव नहीं होगा. 

खाद्य प्रणाली की नींव ख़तरे में

रिपोर्ट बताती है कि किसानों के खेतों में पादप विविधता घट रही है, मवेशियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने का ख़तरा झेल रही हैं और मछलियों को भी बेहिसाब ढंग से पकड़ा जा रहा है. 

वैसे तो पौधों की 6,000 से अधिक प्रजातियों को भोजन के लिए उगाया जाता है लेकिन आम  तौर पर लगभग 200 प्रजातियों का ही उल्लेखनीय इस्तेमाल होता है. इनमें भी सिर्फ़ 9 प्रजातियां 66 फ़ीसदी से ज़्यादा फ़सल उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार हैं.   

दुनिया में मवेशियों का उत्पादन  मुख्य रूप से 40 प्रजातियों पर है लेकिन मांस, दूध और अंडों के लिए सिर्फ़ कुछ ही मवेशियों का इस्तेमाल होता है.

इस रिपोर्ट में 90 से ज़्यादा देशों से जानकारी मिली है जिसके मुताबिक़ जंगली प्रजातियां और पारिस्थितिक तंत्र में अहम योगदान देने वाली प्रजातियां ख़ास तौर पर गायब हो रही हैं. लातिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों में ख़ास तौर पर यह देखने को मिल रहा है.  यही हाल कुछ पक्षियों, चमगादड़ों, कीटों, मधुमक्खियों और तितलियों सहित अन्य प्रजातियों का है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भूमि को इस्तेमाल में लाने के तौर-तरीक़ों के बदलाव आने के साथ साथ प्रदूषण, अत्यधिक दोहन, ज़्यादा पैदावार की कोशिशें, जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण की वजह से जैव विविधता को ख़तरा पैदा हो रहा है. 

इस चुनौती से निपटने के लिए ऐसे तरीक़े इस्तेमाल में लाने की सलाह दी गई है जिससे जैव विविधता को लाभ पहुंचे. अधिकतर देश इसी दिशा में प्रयास करते हुए जैविक खेती, विनाशकारी कीटों से निपटने के लिए एकीकृत प्रबंधन, टिकाऊ भूमि और वन प्रबंधन और मछली पालन को प्राथमिकता दे रहे हैं. 

रिपोर्ट में सरकारों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वर्तमान नीतिगत और संस्थानिक ढांचे को मज़बूत करने के साथ साथ लोगों को जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रेरित करने और उसको नुक़सान पहुंचा रहे कारणों को दूर करने की आवश्यकता है. 

 

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