'यमन के प्रति आशावान होने का अवसर'

19 फ़रवरी 2019

यमन सरकार और हूती विद्रोहियों में हुदायदाह पुन: तैनाती योजना के पहले चरण पर सहमति बनना दर्शाता है कि दोनों पक्ष स्टॉकहोम समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं. सुरक्षा परिषद को यह जानकारी देते हुए यमन के लिए यूएन महासचिव के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने बताया कि समझौते के अमलीकरण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. 

हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले बंदरगाह शहर हुदायदाह से हूती लड़ाकों की वापसी, नाज़ुक संघर्षविराम को मज़बूत बनाने और मानवीय राहत के रास्ते खोलने के लिए सुरक्षा परिषद द्वारा नियुक्त एक टीम मध्यस्थता कर रही है. उन्हीं प्रयासों के अंतर्गत पुन: तैनाती योजना के पहले चरण पर सहमति बन गई है. 

लेफ़्टिनेंट जनरल माइकल लोलेसगार्ड के नेतृत्व में पहला कदम उठाते हुए दोनों पक्ष सलीफ़ और रस इसा बंदरगाहों से हटने के लिए राज़ी हो गए हैं. इसके बाद हुदायदाह बंदरगाह और शहर के अन्य हिस्सों  में भी यही प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी. इससे मानवीय राहत  पहुंचाने के लिए रास्तों को खोलने में आसानी होगी. 

सरकारी सुरक्षा बलों और हूती लड़ाकों के बीच संघर्ष के चलते हाल के महीनों में राहत प्रदान करना और खाद्य भंडारों तक पहुंचना मुश्किल साबित हुआ है. लाल सागर मिल में बड़ी मात्रा में अनाज का भंडार है है लेकिन राहत एजेंसियां सुरक्षा हालात के चलते वहां पहुंचने में विफल रही हैं. इस सामग्री से 37 लाख लोगों को एक महीने तक पर्याप्त भोजन दिया जा सकता है लेकिन पहुंचने में हो रही देरी के चलते अनाज के सड़ने की आशंका भी जताई गई थी. 

ग्रिफ़िथ्स ने कहा कि पहले चरण के लिए सहमति दिखाती है कि दोनों पक्ष इस गति को बनाए रखने के लिए कटिबद्ध हैं और शब्दों को ठोस प्रगति में बदलने के लिए प्रयास सफल हो रहे हैं.  यह विश्वास को बढ़ाता है और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचायक है "स्वीडन में किए गए वायदों से आगे बढ़ कर यमन के लिए आशावान होने का हमारे पास अवसर है. पुन: तैनाती के लिए समझौता मानवीय राहत प्रयासों की दृष्टि से भी अहम हैं."

ग्रिफ़िथ्स ने प्रगति पर संतोष ज़ाहिर करते हुए अपील की है कि बिना देरी के इस समझौते को ज़मीन पर लागू किया जाना चाहिए और दूसरे चरण के लिए प्रयास शुरू होने चाहिए जिसका उद्देश्य हुदायदाह शहर से सैन्य बलों को हटाना है. 

क़ैदियों की अदला बदली के मुद्दे पर भी सहमति के लिए किए जा रहे प्रयासों पर उन्होंने संतोष ज़ाहिर किया. इसके तहत ऐसे बंदियों की रिहाई के प्रयास हो रहे हैं जिन्हें गायब कर दिया गया, मनमाने ढंग से हिरासत में ले लिया गया या फिर घर में नज़रबंद कर दिया गया.  ग्रिफ़िथ्स ने कहा कि हो सकता है कि शांति प्रयासों में रूकावटों का सामना करना पड़े लेकिन उनसे पार पाते हुए दूर क्षितिज को देखने की ज़रूरत है. 

पिछले कुछ सालों में यमन सरकार और हूती लड़ाकों के बीच चले संघर्ष से करोड़ों लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें मानवीय राहत की आवश्यकता है. शांति प्रयासों के तहत स्वीडन के स्टॉकहोम में वार्ता यमन में संघर्ष को व्यापक तौर पर सुलझाने की दिशा में एक महत्वूर्ण कदम रहा है. स्टॉकहोम में जिन मुद्दों पर रज़ामंदी हुई थी उन्हीं को मज़बूती से आगे बढ़ाने के लिए  प्रयास लगातार जारी है जिनके बारे में विशेष दूत ने सुरक्षा परिषद को  जानकारी दी.

 

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