'ईबोला से एक कदम आगे रहने की ज़रूरत'

18 फ़रवरी 2019

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की प्रमुख हेनरिएटा फ़ोर ने सचेत किया है कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के पूर्वी हिस्से में अगर ज़रूरी निवेश नही किया गया और वहां असुरक्षा कायम रही तो ईबोला संक्रमण तेज़ी से फैलने का ख़तरा बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसे रास्ते ढूंढे जाने चाहिए ताकि ईबोला वायरस से लड़ाई में हमेशा  आगे रहा जा सके. 

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में यूनिसेफ़ की कार्यकारी निदेशक ने ईबोला बीमारी पर अलार्म जारी करते हुए कहा कि यह एक ऐसी घातक बीमारी है जिसमें 100 फ़ीसदी मामलों में पूरी तरह नियंत्रण पाने और मरीज़ों को अलग रखने की आवश्यकता होती है. 

फ़ोर ने ध्यान दिलाया कि 2014 के मुक़ाबले अब स्थिति बेहतर हुई है लेकिन बीमारी फैलने के पिछले मामलों से सीख लिए जाने की आवश्यकता है क्योंकि वायरस का बड़ी आबादी वाले इलाक़ों में पहुंचने का जोखिम बना हुआ है. 

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य का पूर्वी हिस्सा हथियारबंद गुटों के बीच संघर्ष से अस्थिरता से घिरा रहा है. इन परिस्थितियों में  यूनिसेफ़ सहित अन्य यूएन एजेंसियों के लिए प्रभावित लोगों तक ज़रूरी सहायता मुहैया कराने के प्रयासों में चुनौती सामने आ रही है. 

लेकिन ईबोला से निपटने में महज़ सुरक्षा ही एक बड़ी चुनौती नहीं है. यूएन एजेंसियों को स्थानीय लोग से विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है क्योंकि वे राहत प्रयासों को संदेह की नज़र से देखते हैं. अब तक कांगो गणराज्य में यूनिसेफ़ ने 1 करोड़ लोगों को बीमारी से निपटने और संक्रमण के मामले घटाने पर ज़रूरी सूचना मुहैया कराई है. 

"असुरक्षा भरे ऐसे माहौल में कांगो गणराज्य में ईबोला के नए मामलों को नियंत्रण में लाने में हम पर ज़ोर पड़ेगा.  यहां तक की अन्य आपात स्थितियों के पैदा होने, जैसे हैज़ा या पोलियो बीमारियों के पड़ोसी देशों में फैलने पर मुश्किल होगी."

उन्होंने कहा कि इसीलिए ईबोला वायरस से एक कदम आगे सोचने की आवश्यकता है. "हम अपने काम को पूरा करने के लिए नई सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि सुरक्षा ख़तरों का सामना किया जा सके. 

फ़ोर ने कहा, "हम बीमारी के जोखिम से जुड़ी जानकारी और समुदायों के साथ मिलने-जुलने पर काफ़ी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि सेहत में बेहतरी और बीमारी की रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदमों में उनका विश्वास बने. हमारी टीमें लोगों से लगातार संपर्क में हैं और निगरानी कर रही हैं ताकि उन इलाकों में ये बीमारी न फैले जहां अभी इसका प्रभाव नहीं है." 

यूगांडा और रवांडा में ईबोला से निपटने के प्रयासों में मिली सफलता का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये साबित करता है कि ज़रूरी कदमों के ज़रिए ईबोला को रोका जा सकता है. 

ईबोला बीमारी फैलने के बाद से यूनिसेफ़ और अन्य साझेदार संगठनों ने अब तक 650 एजेंट नियुक्त किए हैं,  साथ ही 13 लाख लोगों को पीने का साफ़ पानी और साफ़ सफ़ाई के लिए ज़रूरी किट उपलब्ध कराई है.  जो लोग बीमारी से संक्रमित हैं उनके उपचार के अलावा पोषण का भी ख़्याल रखा जा रहा है. सीधे तौर पर 950 परिवारों की मदद की गई है. 

"हम अभिनव तरीक़ों को इस्तेमाल में ला रहे हैं. जैसे मरीज़ों को अलग रखने की सुविधा, नए टीके, प्रयाेग के तौर पर नए इलाज और बीमारी को न फैलने देने के लिए बड़े डाटा का विश्लेषण.  पहले जो बीमारी का प्रकोप फैला उससे सीखते हुए हम बेहतर और समन्वित ढंग से एक साझा रणनीतिक योजना पर काम कर रहे हैं. "

फ़ोर ने ईबोला के ख़तरे से निपटने के लिए भविष्य में स्वास्थ्य तंत्रों को मज़बूत बनाने, हर प्रभावित बच्चे और समुदाय तक पहुंच होने, ज़रूरी वित्तीय मदद मुहैया कराए जाने और नए स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती को अहम बताया है. 

 

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