दक्षिण सूडान में यौन हिंसा के मामलों में तेज़ी से बढ़ोत्तरी

15 फ़रवरी 2019

दक्षिण सूडान के यूनिटी प्रांत में यौन हिंसा के बढ़ते मामलों के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय  (OHCHR) ने स्थानीय प्रशासन से पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करने और दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया है.  यौन हिंसा में आठ साल की बच्चियों तक को निशाना बनाए जाने की रिपोर्टें सामने आई हैं. 

यूएन टीम ने अपनी जांच में  पता लगाया है कि सितंबर से दिसंबर 2018 तक 175 से ज़्यादा महिलाओं और लड़कियों के साथ या तो बलात्कार हुआ है या फिर उन्हें यौन और शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा.  मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के  प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने जिनिवा में पत्रकारों को बताया कि पीड़ितों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. 

“स्पष्ट है कि तस्वीर अभी पूरी तरह से साफ़ नहीं है. लेकिन पता लगा है कि 175 से ज़्यादा महिलाओं लड़कियों के साथ बलात्कार, सामूहिक बलात्कार हुआ या अन्य तरहों से उन्हें शारीरिक कष्ट पहुंचाया गया. जिनके साथ बलात्कार हुआ उनमें 49 बच्चियां थीं.”

सूडान की सीमा से लगने वाले यूनिटी प्रांत में ऐसे मामलों के लगातार सामने आने के बाद स्थानीय समुदायों में ऐसी भावना पनप रही है कि यौन हिंसा का शिकार होना आम बात है. 

बार बार हुए हमले

एक पीड़ित के साथ हुई घटना का ज़िक्र करते हुए कोलविले ने बताया कि अधिकतर महिलाओं के साथ बलात्कार तब हुए जब वे लकड़ियां, भोजन या पानी ला रही थीं और उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा प्राप्त नहीं थी. 

"उसने बताया कि अगर मुख्य सड़क पर जाओ तो बलात्कार होता है. अगर झाड़ी में जाओ तो बलात्कार होता है. तीन अलग अलग बार मेरा उसी इलाक़े में अन्य पीड़ितों के साथ बलात्कार हुआ."

वर्षों तक चले गृह युद्ध के बाद इलाक़े में क़ानून व्यवस्था के ढहने, रोज़गार के अवसरों के छीन जाने, जबरन विस्थापन और खाद्य असुरक्षा को इन मामलों में वृद्धि के लिए कारण बताया जा रहा है.  बड़ी संख्या में लड़ाकों का क्षेत्र में मौजूद होना और मुख्य धारा में शामिल न हो पाने के चलते भी ये घटनाएं हो रही हैं. 

यूनिटी प्रांत में पीड़ितों की मदद के लिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए यूएन मिशन (UNMISS) ने सड़क के आस पास के इलाक़ों से झाड़ियों को साफ़ कर दिया है ताकि उनमें हमलावर छिप कर न बैठ पाएं. 

साथ ही कस्बों में मोबाइल अदालत प्रणाली की शुरुआत हुई है जिसमें यौन हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाने के प्रयास हो रहे हैं. लेकिन कोलविले ने माना है कि ये सब महासागर में एक बूंद के समान हैं. 

 

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