ख़सरा के मामले एक साल में हुए दोगुना

14 फ़रवरी 2019

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि दुनिया भर में ख़सरा के मामलों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है जो चिंता का कारण है. शुरुआती आंकड़े दिखाते हैं कि 2017 की तुलना में 2018 में ख़सरा के दोगुने मामले सामने आए हैं. इनसे निपटने के लिए टीकाकरण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया जा रहा है. 

तेज़ी से फैलने वाली लेकिन आसानी से रोकी जा सकने वाली बीमारी, ख़सरा के कारण वर्ष 2017 में एक लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई. 

इसके लक्षणों में आमतौर पर लाल चकत्ते उभरना, बुखार, खांसी, आंखों का लाल होना और उनमें पानी आना जैसे संकेत देखने को मिलते हैं.

ख़सरा से पीड़ित मरीज़ की स्थिति बिगड़ जाने और बीमारी में जटिलता आने से मौत भी हो सकती है.

पाँच साल से कम उम्र के बच्चों और तीस साल से अधिक आयु के वयस्कों में कई बार ऐसे जटिल मामले देखने को मिलते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में  निदेशक डॉक्टर कैथरीन ओ ब्रिएन ने कहा, "ख़सरा अभी ख़त्म नहीं हुई है. इससे निपटने में सभी की ज़िम्मेदारी बनती है.  ख़सरा अगर एक भी व्यक्ति को संक्रमित करती है तो उससे 9 से 10 लोगों तक इसका विषाणु पहुंच सकता है.  इस बीमारी को भौगोलिक या राजनैतिक दायरे में नहीं रखा जा सकता है."

उन्होंने हालाँकि ध्यान दिलाया कि पिछले दो दशकों में ख़सरा से होने वाली मौतों में 80 फ़ीसदी की कमी आई है जिससे साल 2000 से अब तक 2 करोड़ से ज़्यादा लोगों की जान बचाने में सफलता मिली है. 

दोगुने मामले

जनवरी-2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घोषणा की थी कि 2018 में 183 सदस्य देशों में ख़सरा संबंधी सवा दो लाख से ज़्यादा मामले सामने आए जो 2017 की तुलना में दोगुने हैं.

लेकिन ये अभी आख़िरी आंकड़ा नहीं है क्योंकि सदस्य देशों के पास ख़सरा के मामलों के बारे में अंतिम जानकारी देने के लिए अप्रैल महीने तक का समय होता है. 

उदाहरण के तौर पर जनवरी 2018 में जब सदस्य देशों ने 2017 के लिए शुरुआती आंकड़े दिए थे तो कुल एक लाख, 15 हज़ार 117 मामले थे लेकिन बाद में अंतिम सख्या एक लाख 73 हज़ार 330 तक जा पहुंची.

इसीलिए  विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता जताई है कि अभी और ज़्यादा मामले सामने आ सकते हैं. 

स्वास्थ्य एजेंसी ने एक वक्तव्य में कहा, "आंकड़े मिलने में देरी के कारण और 2018 के आख़िर में बीमारी फैलने की वजह से हमें लगता है कि इन आंकड़ों में अभी और ज़्यादा बढ़ोत्तरी हो सकती है. उसी तरह जैसे कि पिछले कुछ वर्षों में होता आया है."

खसरे के मामलों की बढ़ती संख्या

अफ़्रीका में ख़सरा संबंधी 33 हज़ार से ज़्यादा मामले देखने को मिले. सिर्फ़ मैडागास्कर में चार हज़ार 300 से अधिक मामले थे. अक्टूबर 2018 में बीमारी का प्रकोप शुरू हुआ और अब तक 922 लोगों की मौत होने की ख़बर आ चुकी है. 

योरोप के 53 में से 47 देशों में 82 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आए हैं जो दक्षिण पूर्व एशिया में 73 हज़ार 133 मामलों से कहीं ज़्यादा है.

ख़सरा का संक्रमण रोकने और उसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी देशों से आग्रह किया है कि वे टीकाकरण अभियान को जारी रखें जिसके तहत टीके की दो ख़ुराक दी जाती हैं. 

जिनीवा में ओ ब्रिएन ने कहा, "अब तक जो प्रगति हुई थी उसमें हम फिर फिसल रहे हैं. इसलिए नहीं कि हमारे पास साधन नहीं हैं, बल्कि इसलिए कि हम टीके नहीं लगा रहे हैं."

बीमारी को फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण द्वारा 95 फ़ीसदी कवरेज होनी चाहिए लेकिन फ़िलहाल ये 85 प्रतिशत पर रुकी हुई है जिसके कारण लोगों के इसका शिकार बनने की आशंका बढ़ जाती है.

दूसरी बात ये कि टीके की कवरेज गिरकर 67 फ़ीसदी रह जाती है. 

1963 में ख़सरा के लिए टीका सामने आने से पहले ये बीमारी हर दो-तीन साल में बड़े पैमाने पर फैलती थी जिससे प्रतिवर्ष लगभग 26 लाख लोगों की मौत होती थी.

 

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